कलक्टर के आदेश : सांभर झील में नहीं रहे एक भी मृत पक्षी

- कलक्टर ने ड्रॉन सर्विलांस, वॉच टावर निर्माण समेत कई निर्देश दिए

By: Kashyap Avasthi

Published: 27 Nov 2019, 11:10 PM IST

जयपुर. जिला कलक्टर जगरूप सिंह यादव ने कहा कि हजारों किलोमीटर दूरी तय करके आए प्रवासी पक्षी हमारे मेहमान हैं। उनके प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने और वर्तमान त्रासदी जैसी घटनाएं दोबारा नहीं हों। इसके लिए प्रयास किए जाएं। उन्होंने कहा कि सांभर सॉल्ट लिमिटेड उसी आवास का हिस्सा है और वह झील के 90 वर्ग किमी क्षेत्र को कारकस मुक्त करे।


यह बात कलक्टर यादव ने बुधवार को कलक्ट्रेट परिसर में आयोजित जिला पर्यावरण समिति की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जब तक झील में संक्रमित कारकस है, तब तक स्थिति को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं माना जा सकता। उन्होंने सांभर सॉल्ट के महाप्रबंधक को निर्देश दिए कि झपोक डेम गहराई वाले पानी में और पूरे झील इलाके में अभी भी मृत पक्षियों के शव हो सकते हैं। एक भी संक्रमित मृत पक्षी का शव रिएक्शन से कई पक्षियों की जान ले सकता है। एक महीने में अभियान चलाकर कारकस निकालने के निर्देश दिए। साथ ही कार्मिकों को दूरबीनों के साथ वॉच टावर विस्थापित करने और ड्रोन सर्वे से डेटा रेकॉर्ड रखने को भी कहा।


साथ ही उन्होंने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि समय-समय पर झील क्षेत्र का ड्रोन सर्वे कराया जाए एवं उसका टेबुलेशन कर रिकॉर्ड रखा जाए। वहीं वन विभाग ने सांभर सॉल्ट्स से तीन प्वाइंट पर ड्रॉन सर्विलांस की मांग की है। झील क्षेत्र में ट्यूरिस्ट यूनिट एवं इंडस्ट्रियल यूनिट्स, किचन वेस्ट, सीवरेज के डिस्पोजल एवं स्थापना की शर्तों की समय-समय पर जांच की जाए। साथ ही एडवेंचर गतिविधियां, डीजे की ध्वनि प्रदूषण नहीं हों। अनुमति के बिना शूटिंग भी प्रतिबंधित रहे। सांभर में ग्राउण्ड वाटर के सैपल लिए जाएं एवं अवैध रूप से चल रहे ट्यूबवैल जल्द बंद कराए जाएं। साथ ही विद्युत लाइन के अवैध लाइनें हटाने के लिए नागौर कलक्टर से भी बिजली बंद कराने की बात कही।

97 पक्षियों को स्वस्थ्य होने पर उड़ाया


काचरोदा रेस्क्यू सेंटर में कार्य कर रहे एनजीओ के जॉय गार्डनर व रोहित गंगवाल के मुताबिक अभी तक सांभर व नावां से करीब 971 पक्षी रेस्क्यू किए गए हैं। इनमें 485 पक्षियों की मौत हो गई चुकी है, जबकि 240 पक्षियों को स्वस्थ होने पर उड़ा दिया गया है। वर्तमान में रेस्क्यू सेंटर में 137 पक्षी उपचाररत हैं। अब तक इस पक्षी त्रासदी में मृत पक्षियों की संख्या करीब 27 हजार हो चुकी है।

Kashyap Avasthi Desk/Reporting
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