LOCKDOWN: 10 हजार लोगों के रोजगार पर संकट

- कोरोना का कहर
- उद्योग पर आर्थिक मार

कालाडेरा. करीब 23 वर्ष पूर्व बेरोजगारी की मार झेल रहे कालाडेरा परिक्षेत्र के करीब 15 गांवों के लिए कालाडेरा रीको औद्योगिक क्षेत्र खुशियां लेकर आया। इसके चलते कई लोगों के पास रोजगार थे तथा क्षेत्र में बेरोजगारी नहीं थी। लेकिन पिछले एक सप्ताह से कोरोना वायरस के कहर के चलते हुए लॉक डाउन ने यहां के नियोजनकर्ताओं के साथ बेरोजगारों की कमर तोड़ दी है। सूत्रों के अनुसार सरकारी स्तर पर इन मजदूरों को वेतन व भोजन के आदेश तो जारी कर दिए गए हैं, लेकिन इनके परिवार जो दूर-दराज हंै उनको लेकर यह मजदूर परेशानी में ही है। जानकारी अनुसार कालाडेरा में रीको औद्योगिक क्षेत्र आने के बाद लोगों को रोजगारमिला था। आज यहां सीमेंट, विद्युत पोल, आटा मिल जैसी कई औद्योगिक इकाइयां युवाओं के साथ महिलाओं को भी रोजगार दे रही थी, लेकिन अब 21 दिनों के लॉक डाउन के बाद यहां स्थिति बदतर दिखाई दे रही है। यह भी नहीं है कि इसकी मार केवल मजदूर ही सहन कर रहे हैं बल्कि उद्योगपति भी इस मार का खमियाजा उठा रहे हैं। (निसं.)
450 फैक्ट्रियों में 10 हजार बेरोजगार

कालाडेरा रीको औद्योगिक क्षेत्र में रीको व नॉन रीको क्षेत्र में करीब 450 से अधिक फैक्ट्रियों स्थापित है। जिनमें टैक्सटाइल, पत्थर पिसाई, चप्पल-जूते, दूध प्लांट संयत्र, ढलाई, प्लाइवुड, पेपर मिल, मैदा-आटा, ट्रांसफार्मर, फर्नीचर एक्सपोर्ट, पशु आहार प्लांट आदि शामिल हंै।
सूत्रों के अनुसार इन फैक्ट्रियों में 10 हजार लोग काम कर रहे थे, जिनमें कालाडेरा क्षेत्र के करीब 3 हजार, राजस्थान के विभिन्न जिलों के 3 हजार एवं बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, उत्तरांचल, मध्यप्रदेश, असम, उत्तराखण्ड, हरियाणा आदि प्रांतों के करीब 4 हजार लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

दस वर्ष पूर्व थी बेरोजगारी
सूत्रों के अनुसार क्षेत्र के धानाकाबास, कानरपुरा, विमलपुरा, खन्नीपुरा, जयसिंहपुरा, टांकरडा, देवपुरा, अनोपपुरा, बिहारीपुरा, सिरसली सहित करीब एक दर्जन से अधिक ऐसे गांव है जहां करीब दस वर्ष पूर्व जल स्तर गहरा गया था। जिसके चलते इन गांवों में बेरोजगारी की समस्या ने विकराल रूप ले लिया था, लेकिन कालाडेरा में रीको औद्योगिक क्षेत्र आने के बाद इन गांवों के लोगों को रोजगार मिला हुआ है।

लोगों को हो रही अच्छी आमदनी
कालाडेरा रीको औद्योगिक क्षेत्र ने आसपास के गांवों को रोजगार प्रदान करने के साथ कालाडेरा गांव की भी फिजा बदल दी थी। रीको के कारण लोगों को दुकान, व्यापार, मकान के भाड़े आदि से अच्छी आय होने लगी है। सब्जी-राशन की दुकान पर व्यापार में वृद्धि हुई है।

रंगाई छपाई में भी लहराया परचम भी फीका
कालाडेरा ने रंगाई-छपाई उद्योग में भी परचम लहराया है। यहां के छीपा समाज के लोगों द्वारा ठप्पा प्रणाली से बनाई गई बैड शीट, साडिय़ां आज भी विदेश व पड़ोसी राज्यों में एक्सपोर्ट की जा रही है। रीको के आने पर इस उद्योग को भी बढ़ावा मिला है। लेकिन कोरोना वायरस ने बढ़ते व्यापार को चौपट कर दिया है।

उद्योगपतियों के सामने आर्थिक संकट
कई उद्योगों के संचालकों की ओर से मजदूरों को भोजन व वेतन तो उपलब्ध करवा दिया, लेकिन वे उद्योगों के मासिक विद्युत बिल, मासिक बैंक किश्त, स्थाई सेवा शुल्क व जीएसटी सहित वित्तीय वर्ष में होने वाले आंकड़ों को लेकर परेशानी में घिर जाएंगे। हालात ऐसे हैं कि वित्तीय वर्ष के अंतिम सप्ताह में इकाइयों के बंद के चलते आय का अन्य साधन नहीं होने से वे आखिऱ किस प्रकार अन्य देनदारियों व अन्य बकायादारों भुगतान करेंगे।

उद्यमियों का कहना है.....

- कालाडेरा में अब सरकार के निर्देशों के बाद ही औद्योगिक इकाइयों का संचालन किया जाएगा। उद्यमी संकट की इस घड़ी में सरकार के साथ खड़े है।
बनवारी लाल शर्मा, अध्यक्ष रीको

एसोसिएशन कालाडेरा

- सरकार के निर्देश पर औद्योगिक इकाइयों को बंद करवा दिया गया है। लेकिन अब कई उद्यमियों के सामने इकाइयों का मासिक विद्युत बिल चुकाना व नहीं चुकाने पर पैनल्टी देना एक बड़ी समस्या बन गई है। हालांकि उम्मीद है सरकार उद्योगों को राहत जरूर प्रदान करेंगी।
मनोज शर्मा, संचालक आयरन फाउण्ड्री व

कोषाध्यक्ष रीको एसोसिएशन, कालाडेरा

- इकाई बंद होने के बाद बैंकों की ओर से मासिक किस्त का भुगतान करना मुश्किल हो गया। ऐसे हालातों में अतिरिक्त समय, इस अवधि के ब्याज में छूट व जमा नहीं करवाने पर पैनल्टी भी नहीं लगाना चाहिए।
सायर सिंह शेखावत, संचालक डिस्टेम्बर फैक्ट्री, कालाडेरा

Ramakant dadhich Desk/Reporting
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