LOCKDOWN: लॉक डाउन में भी समझाने पर भी नहीं मान रहे

कोरोना

 

By: Ramakant dadhich

Updated: 27 Mar 2020, 10:03 PM IST

चौमूं. कोरोना वायरस से बचाव का एक ही तरीका है कि घरों से बाहर नहीं निकलें। घरों में बंद रहें, इसकी कोई दवा नहीं है और यह संक्रमण की बीमारी है एक से दूसरे को छूने से हो सकती है।
यह बात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कह चुके हैं। स्थानीय पुलिस-प्रशासन कह चुका है। नगरपालिका प्रशासन लाउडस्पीकर से जनता को जागरूक करने के लिए शहरभर में उद्घोषणा करवा चुका है, लेकिन शुक्रवार को भी चौमूं शहर में जगह-जगह लोग घूमते नजर आए। जब पुलिस की सख्ती बढ़ी तो 'ये देश के दुश्मनÓ नौ-दो ग्यारह हो गए।

जानकारी के अनुसार जनता कफ्र्यू के बाद शहर में सभी बाजार बंद रहे। हालांकि इन बाजारों में सुबह 9 से दोपहर 1 बजे तक परचूनी व किराना की दुकानें खुली। बस स्टैण्ड के पास स्थित सब्जियों की दुकानें भी खुलीं। दूध की सेवा भी बहाल रही। बड़ी संख्या में लोगों ने जरूरत की वस्तुएं भी खरीदीं। मेडिकल की दुकानें, बैंक-एटीएम खुले रहे।
लोग नहीं मान रहे

थानाधिकारी हेमराज सिंह गुर्जर ने बताया कि थाना मोड़ चौराहा, बस स्टैण्ड मोरीजा तिराहे पर पुलिस जाप्ता तैनात किया हुआ है। इसके अलावा पुलिसकर्मियों को गली-मोहल्लों एवं वार्डों के अंदर भेजा रहा है, जिससे लोग घरों में ही रहें, लेकिन अब भी कुछ लोग ऐसे जो किसी भी कारण बाहर आ-जा रहे हैं। हालांकि पुलिसकर्मियों को निर्देश दिए हैं कि जिसके पास बाहर निकलने का कोई कारण नहीं हो, उसके खिलाफ सख्ती से निपटा जाए। शुक्रवार को भी कई जगह सख्ती करनी पड़ी।


अंगूर 180 रुपए किलो

खरीदारों की मानें तो सब्जी मंडी बंद होने से फल-सब्जी की किल्लत का शुक्रवार को फुटकर दुकानदारों ने भरपूर फायदा उठाया। चार दिन पहले जो अंगूर 45 किलोग्राम थे। वहीं 180रुपए किलो बेचा गया। इसके अलावा सब्जियों व किराना एवं परचूनी के सामानों के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं, लेकिन अब तक किसी भी विभाग ने ऐसे लोगों पर कार्रवाई करके दामों को नियंत्रण करने की कोशिश नहीं की है, जिससे विपरीत परिस्थतियों में लाभ उठाने वाले लोगों के हौसले बुलंद हैं।


पास बनवाने की आ रही समस्या

चौमूं में रहने वाले कुछ लोगों के परिजन अचानक लॉकडाउन हो जाने के कारण दूसरे जिलों या दूसरे स्थानों पर फंसे हुए हैं। ऐसे लोगों को चौमूं लाने के लिए उनके परिजन चिन्तित हैं। ऐसे लोगों की मांग है कि पुलिस और प्रशासन परिजनों को लाने की व्यवस्था करवाने में सहयोग प्रदान करे।

Ramakant dadhich Desk/Reporting
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