1959 से बीते 59 वर्ष, फिर भी रीते, किसानों को खातेदारी का इंतजार

1959 से बीते 59 वर्ष, फिर भी रीते, किसानों को खातेदारी का इंतजार

Ramakant dadhich | Publish: Apr, 17 2018 08:12:24 PM (IST) Jaipur, Rajasthan, India

फागी के किसान परिवार लगा रहे चक्कर, रेवन्तपुरा व नथमलपुरा गांव का मामला

फागी (जयपुर). सरकारी लेटलतीफी का आलम यह है कि करीब दौ सौ किसान परिवार हक के लिए 60 साल से तरस रहे हैं। जबकि इस दौरान ये किसान परिवार अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों तक कई चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन राहत नहीं मिली है। जानकारी के अनुसार वर्ष 1959 में उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत मण्डोर के ग्राम पिनाच निवासी रेवन्तसिंह राजावत ने जैसलमेर के 30 बंजारा परिवारों को 464 बीघा भूमि में से 14 बीघा जमीन का आबादी भूमि में परिवर्तित करवाकर तथा पिनाच ग्राम सहकारी समिति के नाम पर प्रत्येक परिवार को 15-15 बीघा जमीन कृषि के लिए देकर बसाया था। राजस्व रिकार्ड में यह रेवन्तपुरा के नाम से दर्ज है। वर्तमान में 110 परिवार हो गए। ग्राम नथमलपुरा व नथमलपुरा की ढाणी के किसानों को वर्ष 464 में ही कृषि सहकारी समिति बनाकर 472 बीघा भूमि ओबीसी, एससी, एसटी वर्ग के किसानों को आवंटित की गई थी। लेकिन अब तक इन किसान परिवारों को भूमि के खातेदारी अधिकार नहीं मिल पाए हैं। खातेदारी के अभाव में सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं।
ये होती है पैदावार
दोनों गांवों के किसानों ने बताया कि बारिश होने पर यहां मूंगफली, मूंग, बाजरा, ग्वार, सरसों, चने की पैदावार होती है, लेकिन ओलावृष्टि-अतिवृष्टि एवं अकाल पडऩेे पर फसल बीमा नहीं होने पर परेशानी रहती है। उधार लेकर बोए बीज के पैसे भी नहीं चुकते हैं।
यूं हो सकता है समाधान
विभागीय सूत्रों की मानें तो इन सोसायटियों को भंग करने के बाद पूर्व में कब्जा काश्त करते आ रहे किसानों के इस भूमि का अलाटमेंट हो सकता है। इसके बाद खातेदारी अधिकार का सपना पूरा हो सकता है, लेकिन विभागीय अधिकारी हस्तक्षेप से परहेज करते हैं।
नहीं मिली सुविधाएं
यह किसान खातेदारी अधिकार नहीं होने से सिंचाई के लिए कुआं नहीं खोद सकते। किसान के्रडिट कार्ड व खराबा होने पर फसल बीमा योजना के लाभ से वंचित रहते हैं। कृषि यन्त्र खरीद में रियायत नहीं मिलती। सूत्रों के अनुसार अधिकारी उपखंड क्षेत्र में करीब 10 हजार बीघा जमीन को तालाबी, बहाव क्षेत्र व बांध पेटा की बताकर खातेदारी देने से परहेज कर रहे हैं। जबकि हजारों बीघा जमीन अब्दुल रहमान प्रकरण के दायरे में नहीं है। इन किसानों को खातेदारी अधिकार दिया जा सकता है।
इनको भी खातेदारी का इंतजार
उपखंड में सैकड़ों किसान ऐसे भी हैं जो वर्षों से अलाटमेंट पर्चे के आधार पर कृषि कर रहे हैं। उपखण्ड अधिकारी कार्यालय में खातेदारी अधिकार के लिए वर्षों से दावे कर रखे हैं। किसानों का आरोप है कि अधिकारी किसानों को न्याय देने की बजाय टरका रहे हैं और फैसले की जगह सिर्फ तारीख दे रहे हैं। नतीजतन भूमि होने के बावजूद किसान भूमिहीन की श्रेणी में नजर आ रहे हैं।

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