साहब! 25 दिन से अटके हैं, मां-बाप बीमार हैं, अब तो कर दो घर जाने का जुगाड़

- बगरू के दहमीकलां आश्रय स्थल पर किया प्रदर्शन

By: Kashyap Avasthi

Published: 23 Apr 2020, 09:19 PM IST

जयपुर. जिले के बगरू के समीप दहमीकलां के आश्रय स्थल पर रह रहे करीब सौ श्रमिक यूपी, गुजरात व मध्यप्रदेश जाने के लिए झटपटा रहे हैं। कुछ श्रमिकों का कहना है कि साहब! 25 दिन से अटके हैं, मां-बाप बीमार हैं, अब तो घर जाने का जुगाड़ कर दो। रोज फोन आ रहे हैं। जबकि राजस्थान के लोगों को सरकार ने घर भेज दिया है। अब हम पर भी मेहरबानी कर दो।


बगरू कस्बे के निकट ग्राम पंचायत दहमीकलां स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए आश्रय स्थल पर रह रहे बाहरी राज्यों के श्रमिक लोग अब घर जाने की जिद पर हैं। यूपी के करीब 68 श्रमिकों ने गुरूवार को प्रदर्शन किया। साथ ही जल्द घर जाने की मांग को लेकर नारे लगाते रहे। इस दौरान मौके पर उपस्थित नोडल अधिकारी मुकेश कुमार सैन, सह प्रभारी आशा रैगर, सरपंच गणेश कुमावत की समझाइश व आश्वासन के बाद उन्हें शांत कराया गया।


जानकारी के मुताबिक गुरुवार को घर जाने की जिद पर अड़े श्रमिक अपने कमरों से बाहर आकर प्रदर्शन करने लग गए। उत्तरप्रदेश निवासी संजयसिंह, योगेन्द्र, लव प्रसाद, अजीतसिंह, लालचंद, मनोज, सुखदेव, रामबीर आदि श्रमिकों ने कहा कि 30 मार्च से यहां पर रहे हैं। 25 दिन बीत गए है उन्हें 14 अप्रेल को घर भेजने की बात कही थी लेकिन 19 दिन का और लॉकडाउन बढ़ा दिए जाने के बाद 20 अप्रेल को भेजने की बात कही गई लेकिन 21 अप्रेल को राजस्थान के मूल निवासियों को भेज दिया गया फिर उन्हें क्यों नहीं भेजा रहा। श्रमिकों ने बताया कि रोज घर से फोन आते हैं। उनके खेतों में भी कार्य चल रहा है। कई श्रमिकों के घर पर मां-बाप बीमार हैं। अब उन्हें बस घर पहुंचना है।


दो भतीजों की मौत पर भी नहीं जा सका घर


इन श्रमिकों की साथ शराफत निवासी बागपत (यूपी) भी अपने छह परिजनों के साथ डूंगरपुर से अपने घर जा रहा था जो लॉकडाउन के चलते यहीं अटक गया। 14 अप्रेल को ही उनके दो भतीजों की दुर्घटना के दौरान मौत हो गई थी लेकिन वह गमी में शामिल नहीं हो पाया।

Kashyap Avasthi Desk/Reporting
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