scriptSchool till class XII, study under trees | बारहवीं तक स्कूल, पेड़ों के नीचे पढ़ाई | Patrika News

बारहवीं तक स्कूल, पेड़ों के नीचे पढ़ाई

दर्जन भर से अधिक टूटी पट्टियां, विद्यार्थियों और शिक्षकों में दहशत

बगरू

Updated: February 22, 2022 11:47:52 pm

कालवाड़. जालसू ब्लॉक के पूनाना गांव स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के 15 में से 11 कक्षा-कक्षों के तीन दिन पहले अचानक पड़ी दरारें और पट््ियों के टूटने से भवन क्षतिग्रस्त होने से इसके गिरने की आशंका गहरा गई है। वहीं अब यहां विद्यार्थियों के लिए मात्र चार कमरे बचे हैं। इसके चलते अब कक्षा 1 से 12 वीं तक के छात्र-छात्राओं के लिए बैठने की समस्या हो गई है। ऐसे में विद्यालय में अध्यनरत विद्यार्थियों को कक्षा-कक्ष के बाहर पेड़ों के नीचे बैठा कर पढ़ाया जा रहा है। स्थानीय सरपंच प्रतिनिधि रतन शर्मा और विद्यालय के प्रधानाचार्य कैलाश आर्य ने बताया कि संभवतया शनिवार रात को विद्यालय भवन में दरारें पड़ी और पट्टियां टूटी है। रविवार को अवकाश होने से इसकी जानकारी नहीं मिल पाई और सोमवार को विद्यालय पहुंचे तो कक्षा-कक्षों, बरामदे की छत, दीवार, लेंटर, व पट्टियां टूटी दिखी। इस राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के 90 फीसदी से अधिक भवन के अयोग्य होने विद्यालय के लिए बड़ी समस्या उत्पन्न हो गई है। पूनाना का यह सरकारी विद्यालय 80 के दशक के बाद खारड़ा डेयरी के पास बनाए गए भवन में स्थानांतरित हो गया था। तब से यह विद्यालय यहीं संचालित हो रहा है। पूनाना के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के भवन के खंडित होने और इसके कभी भी गिरने की आशंका से या पढऩे वाले विद्यार्थियों के साथ प्रधानाचार्य, शिक्षक और अभिभावक भी ङ्क्षचता में नजर आ रहे हैं। जालसू ब्लॉक के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पूनाना के भवन की पटिटयां टूटने व दरारें आने के बाद संभावित हादसे की आशंका के मद्देनजर प्रधानाचार्य कैलाश चंद्र आर्य, सरपंच प्रतिनिधि रतन शर्मा ने जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलक्टर, संबंधित थाना व सरकार के उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया है। वहीं स्थानीय ग्राम पंचायत में मंगलवार को आयोजित पाक्षिक बैठक में भी विद्यालय के इस मुद्दे को विशेष रूप से उठाया गया।
बारहवीं तक स्कूल, पेड़ों के नीचे पढ़ाई
बारहवीं तक स्कूल, पेड़ों के नीचे पढ़ाई
दरारों व पट्टियों के टूटने के कारणों का नहीं चला पता
प्रधानाचार्य कैलाश आर्य ने बताया कि 3 दिन पूर्व तक विद्यालय के सभी कक्षा कक्ष एकदम दुरुस्त और सुरक्षित थे, लेकिन शनिवार रात के बाद में दरारें व पट्टियां टूटी मिली। यह कैसे हुआ हम लोग अचंभित हैं। इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। लेकिन चर्चा यह भी है कि तीन-चार दिन पूर्व भूकंप के हल्के झटकों से भी ऐसा हो सकता है लेकिन इस गांव में विद्यालय के अलावा और कहीं भी किसी भवन में ऐसा नहीं हुआ।

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