नेता उद्घाटन कर भूले, समस्या बरकरार

टै्रफिक लाइट से भी नहीं मिल पाई निजात, सड़क पर स्थायी व अस्थायी अतिक्रमण बना रोड़ा

By: Dinesh

Published: 03 Jan 2020, 07:47 PM IST

चौमूं. शहर में पेयजल के बाद दूसरी सबसे बड़ी समस्या जयपुर रोड पर तहसील के सामने से मोरीजा रोड तिराहे तक बार-बार लगने वाली जाम की है। जेडीए की ओर से दो चौराहों पर लगवाई गई टै्रफिक लाइट का उद्घाटन कर भाजपा व कांग्रेस नेताओं ने वाहवाही लूट ली, लेकिन अब भी शहर को पूरी तरह जाम से मुक्ति नहीं मिली है। बावजूद इसके ना नेताओं को चिंता है और ना ही जिम्मेदार सरकारी कारिंदों को। वाहन चालक व राहगीर सजा भुगत रहे हैं।


जयपुर रोड पर आए दिन लगने वाले जाम को राजस्थान पत्रिका ने विधानसभा आम चुनाव २०१८ का चुनावी मुद्दा बनाया था तथा सिलसिलेवार खबर भी प्रकाशित की, जिसके चलते जेडीए प्रशासन ने चुनाव के बाद फरवरी, २०१९ में थाना मोड़ चौराहे पर सात लाख से अधिक राशि खर्च करके टै्रफिक लाइट लगवा दी। लाइट लगवाने का श्रेय भाजपा विधायक रामलाल शर्मा ने लेते हुए २ मार्च को भाजपा पदाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में विधिवत रूप से टै्रफिक लाइट का उद्घाटन करवाकर वाहवाही लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसे लेकर कांग्रेसियों में नाराजगी भी थी, क्योंकि पूरा कार्यक्रम भाजपामयी हो गया था।

कांग्रेसियों ने दिखाई सक्रियता


जेडीए ने थाना मोड़ के छह माह बाद ही बस स्टैण्ड के पास मोरीजा तिराहे पर भी टै्रफिक लाइट लगवा दी। कांगे्रसी पार्षदों ने सक्रियता दिखाते हुए पूर्व विधायक भगवानसहाय सैनी ने इस लाइट का शुभारंभ १९ सितम्बर को करवाकर जनता में वाहवाही लूटने का काम किया। भरोसा दिलाया गया कि जाम से मुक्ति मिल जाएगी।

पत्रिका ने जानी सच्चाई


जेडीए की लाखों रुपए की राशि खर्च होने के बावजूद जयपुर रोड पर जाम की समस्या से निजात नहीं मिल पा रही है। राजस्थान पत्रिका ने दो प्रमुख तिराहे व चौराहों पर टै्रफिक लाइट लगने के बाद भी जाम लगने के कारणों को जानने की कोशिश की। जयपुर रोड पर तहसील कार्यालय, जलदाय विभाग कार्यालय, न्यायालय, पुलिस थाना, छोड़े-बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठान, बड़े-बड़े कॉम्पलेक्स, नगरपालिका कार्यालय, बस स्टैण्ड आदि स्थित है। व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े अधिकतर लोगों ने तहसील से मोरीजा तिराहे तक सड़क पर दस-दस फीट तक स्थायी व अस्थायी रूप से कब्जा कर रखा है। इन प्रतिष्ठानों एवं कार्यालयों में आने वाले अधिकतर लोग वाहनों को सड़क पर बेतरतीब खड़ा कर देते हैं। स्थिति ये है कि करीब डेढ़ सौ फीट चौड़ा जयपुर रोड अतिक्रमण के कारण सिकुड़कर दिन में मात्र 50-6० फीट का रह जाता है। इससे यातायात सेवा प्रभावित होती है और जाम लग जाता है।

अवैध स्टैण्ड भी बाधक


पत्रिका पड़ताल में सामने आया कि जयपुर से चौमूं के बीच चलने वाली जीपों के चालक ही सवारियों से किराया पुलिस थाने और तहसील के सामने बीच सड़क पर वाहन खड़ा करके वसूलते हैं। इसके अलावा थाना मोड़ चौराहे पर अवैध रूप से सवारियां ढोने वाले खड़ा रहते हैं, जिससे दूसरे वाहनों को घूमने-फिरने समेत निकलने में परेशानी होती है। नगरपालिका के सामने भी यही हाल है। निजी जीप, बस व अन्य वाहन सवारियों को ढोने के लिए सड़कों पर जमा रहते हैं। स्थिति ये है कि कई दुकानदारों ने तो सड़क पर पुख्ता अतिक्रमण तक कर रखा है।

रोडवेज स्टैण्ड पर भी अतिक्रमण


चौमूं नगरपालिका के पास बने रोडवेज बस स्टैण्ड पर भी अतिक्रमियों का बोलबाला है। यहां अनाधिकृत रूप से नगरपालिका प्रशासन ने अस्थायी रूप से दीवार के तौर पर आड़ तक लगा रखी है। यह भी यातायात में बाधा हो रही है।

दूर हों निजी वाहनों के स्टैण्ड


बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजेन्द्र पालावत ने बताया कि जब शहर में रोडवेज व लो-फ्लोर बसें आती हैं तो निजी वाहनों को स्टैण्ड दूर बनाना चाहिए। जयपुर की तरफ जाने वाली प्राइवेट जीपों का स्टैण्ड दुर्गा मंदिर के पास बनाया जाए। रेनवाल व कालाडेरा बस स्टैण्ड का स्थान भी बदला जाए। जयपुर रोड पर बेतरतीब खड़े रहने वाले सवारी वाहनों के खिलाफ पुलिस भी २७९/३३६आईपीसी के तहत मामला दर्ज कर कार्यवाही कर सकती है। अन्य लोगों ने बताया कि नगरपालिका प्रशासन की ओर से निष्पक्ष रूप से अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाए, जिससे आमजन को सुविधा मिल सके।

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