यूडाइस प्रपत्र नहीं भरने पर हो सकती है कार्रवाई

यूडाइस प्रपत्र नहीं भरने पर हो सकती है कार्रवाई

mahesh doune | Publish: Dec, 07 2017 11:32:16 AM (IST) | Updated: Dec, 07 2017 11:33:31 AM (IST) Balaghat, Madhya Pradesh, India

जिले के समस्त हाईस्कूल व हायर सेकेण्डरी अशासकीय स्कूलों की प्राचार्य की डायरी व यूडाइस प्रपत्र संधारित कराने बुधवार को कार्यशाला संपन्न हुई।

बालाघाट. जिले के समस्त हाईस्कूल व हायर सेकेण्डरी संचालित अशासकीय स्कूल के स्कूलों की प्राचार्य की डायरी व यूडाइस प्रपत्र संधारित कराने बुधवार को कार्यशाला संपन्न हुई। कार्यशाला शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल के सभागार में सहायक परियोजना समन्वयक राजेन्द्र श्रीवास्तव की प्रमुख उपस्थिति में हुई।
इस दौरान उपस्थित प्राचार्य व संचालकों को यूडाइस प्रपत्र किस तरह से भरा जाए इस बारे में सहायक परियोजना समन्वयक द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि प्रपत्र में स्कूल के शिक्षक स्टॉप, भवन से संबंधित जानकारी, खेल मैदान, लायब्रेरी, प्रयोगशाला शौचालय सहित स्कूल संबंधित जानकारी भरकर देना है।
५० प्रतिशत से भी कम शामिल
शिक्षा विभाग द्वारा करीब १५६ अशासकीय स्कूलों के प्राचार्य व संचालकों को कार्यशाला में शामिल होने सूचना दी गई थी। लेकिन करीब ७० स्कूल के ही प्राचार्य व संचालक शामिल हुए। श्रीवास्तव ने बताया कि ८ दिसम्बर तक प्रपत्र भरकर जमा करने का समय दिया गया है। इस अवधि तक स्कूल संचालकों द्वारा प्रपत्र भरकर जमा नहीं किया जाएंगा तो उचित कार्रवाई की जाएंगी।

रिश्वत लेने के आरोप में लिपिक को ४ वर्ष की सजा
जिला एवं सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार अग्रवाल की अदालत ने विशेष लोकायुक्त आपराधिक प्रकरण मामले में जनपद पंचायत बैहर के लिपिक दशरथलाल हिरवाने को रिश्वत लेने के आरोप में ४ वर्ष का कारावास व १०,००० रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई गई।
अभियोजन के अनुसार ग्राम पंचाय गोहारा के सचिव जिसके एरियर राशि १६,००० रुपए मिलना था। जब दशरथलाल जनपद पंचायत बैहर में लिपिक के पद पर पदस्थ थे और वेतन बनाने का कार्य करता था। सचिव राजकुमार ने लिपिक दशरथलाल से एरियर बनाने का निवेदन किया तो ४,००० रुपए के रिश्वत की मांग की गई। मामले की लिखित शिकायत २७ मार्च २०१४ को पुलिस अधीक्षक लोकायुक्त जबलपुर को किया था। पुलिस अधीक्षक द्वारा ट्रेप दल का गठन किया। जिससे २९ मार्च २०१४ को २५०० रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया। इस मामले में ६ दिसम्बर को माननीय न्यायालय ने रिश्वत लेने के आरोप में दोषी पाते हुए धारा ७ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत ३ वर्ष का कारावास व ५००० रुपए अर्थदंड व धारा १३ (१) ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषी पाते हुए ४ वर्ष का कारावास व ५००० रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई।

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