आर्यिकारत्न तपोमति माताजी ससंघ 10 माताजी ने किया पिच्छिका परिवर्तन

स्थानीय नूतन कला निकेतन में 10 अक्टूबर को पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

बालाघाट. स्थानीय नूतन कला निकेतन में 10 अक्टूबर को पिच्छिका परिवर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जैन समाज के लोग शामिल रहे। इस अवसर पर अशोक नगर से पहुंचे बाल ब्रम्हचारी प्रतिष्ठाचार्य मुकेश भैयाजी के कुशल मार्गदर्शन में अशोक जैन स्वराज कुमार व पार्टी भोपाल द्वारा संगीतमय भजन किया गया।
इस संबंध में दिगम्बर जैन कमेटी के पूर्व सचिव व सिद्धचक्र महामंडल विधान के निर्देशक अजय कुमार जैन ने बताया कि पिच्छिका परिवर्तन समारोह का आयोजन किया गया। एक वर्ष बीत जाने पर जैन साधु संत चार्तुमास में पिच्छिका बदलते है। पुराने उपकरण को छोड़ नए उपकरण को धारण करते है। पिच्छिका मोर पंख से बनी अत्यंत मुलायम और अहिंसा का उपकरण व जैन साधु संतों का शोभा चिन्ह है। उन्होंने बताया कि आचार्य विद्यासागर मसा की शिष्या आर्यिकारत्न तपोमति माता ससंघ 10 माताजी ने चार्तुमास के बाद पिच्छिका परिवर्तन कर पुराने उपकरण का त्याग कर नए उपकरण धारण किया। उन्होंने बताया कि यह पिच्छिका समाज के ऐसे विवेकशील व्यक्ति को दी जाती है जो रात्रि भोजन का त्याग, सप्त व्यसनों का हिंसा, व पांचो पाप का त्याग एवं नित्य अभिषेक पूजनपाठ, स्वाध्याय का नियमानुसार पालन करता है उसे प्रदान की जाती है।

mahesh doune
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