अनुपयोगी साबित हो रहा मुख्यमंत्री ग्राम सरोवर

समतन भूमि में पार बनाकर तालाब निर्माण की कर दी गई खानापूर्ती
विभाग नहीं कर सका एक करोड़ 37 लाख का सही इस्तेमाल

By: mukesh yadav

Updated: 08 Feb 2020, 05:03 PM IST


लालबर्रा. क्षेत्र अंतर्गत ग्राम निलजी और मुरझड़ में मुख्यमंत्री ग्राम सरोवर योजना के तहत तालाब का निर्माण किया गया है। वर्तमान में यह तालाब अनुपयोगी साबित हो रहा है। दरअसल निर्माण ठेकेदार ने तालाब की भूमि को बिना गहरे करें ही समतल जमीन में पार बनाकर तालाब निर्माण की औपचारिकता पूरी कर दी है। इस कारण वर्षा होने के बाद भी तालाब में गहरीकरण नहीं होने के कारण जल संरक्षित नहीं हो पा रहा है। परिणाम स्वरूप इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस भूमि पर तालाब बनाया गया है। उसका सर्वे ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग २ द्वारा करते हुए स्थानीय पंचायत से अनुमोदन के बाद उक्त भूमि का चयन कर ठेकेदारी में कार्य प्रारंभ करवा दिया गया। लेकिन मुख्यालय से 10 किमी दूर स्थित ग्राम लिनजी में स्थित उक्त भूमि में ठेकेदार द्वारा बगैर गहरीकरण के चारों ओर पार बना दी गई है। जहां पर गहरीकरण नहीं होने की वजह से पानी एकत्रित नहीं हो पाया है। यह बात और है कि उक्त स्थान से मुरम का अवैध उत्खनन करने वाले गड्ढा बना रहे हैं। जहां पर आने वाले दिनों में पानी एकत्रित हो सकता है।
नहीं मिला फायद
जल संरक्षण और पानी के संतुलन के लिए करीब एक करोड़ 37 लाख रुपए की लागत से बनाया गया मुख्यमंत्री सरोवर का ग्रामीण जनों और किसानों को कोई फायदा नहीं मिल पाया है। यह कहा जा सकता है कि शासन के एक करोड़ 37 लाख रुपए उक्त योजना के संचालन में बर्बाद कर दिए गए हैं। जलाशय में पानी जमा नहीं होने के चलते ग्रामीणों का निस्तार तो दूर मवेशियों को पानी भी नहीं मिल पा रहा है। ऐसे स्थान पर सरोवर निर्माण करना योजना को पलीता लगाए जाने जैसा प्रतीत हो रहा है
बीत गई अवधि, नहीं हो सका कार्य पूर्ण
जानकारी के अनुसार 27 सितंबर 2018 को प्रारंभ हुआ मुख्यमंत्री ग्राम सरोवर योजना का कार्य 1 वर्ष के भीतर पूरा करना था, जिसकी अवधि बीत जाने के बाद 4 माह अधिक होने पर भी उक्त सरोवर का कार्य पूर्ण नहीं हो पाया है। पीचिंग और अन्य कार्य अब तक अधूरे पड़े हुए हैं। जिससे लगता है कि ठेकेदार और विभाग के बीच दाल में कुछ काला होने जैसा प्रतीत हो रहा है। एक्सटेंशन के नाम पर ठेकेदार को अधिक समय दिया जा रहा है।
इनका कहना है।
ठेकेदार को एक्सटेंशन दिया जा रहा है, जिसके बदले कुछ राशि काट दी जाती है। बहुत दिनों से मैं भी साइड पर नहीं गया हूं। इसलिए कार्य किस गति से चल रहा है, सही सही नहीं बता पाऊंगा।
राजुल हक, सब इंजीनियर ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग दो बालाघाट

mukesh yadav Reporting
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