जहरीले सर्प के काटन से दो की मौत, लगातार सामने आ रहे मामले

जिले के दो अलग-अलग स्थानों से सर्प दंश से मौत के दो मामले सामने आए हैं।

By: mukesh yadav

Updated: 18 Aug 2017, 09:09 PM IST

बालाघाट. जिले के दो अलग-अलग स्थानों से सर्प दंश से मौत के दो मामले सामने आए हैं। दोनों ही मामलों में अस्पताल चौकी पुलिस ने मर्ग दर्ज कर डायरी संबंधित थाने को भेजी जा रही है। अस्पताल चौकी से प्राप्त जानकारी के अनुसार पहला जिले के कटंगी थाना क्षेत्र के ग्राम नवेगांव से सामने आया है। नवेगांव निवासी मृतक विकास राणा (२२) के पिता गणेश राणा ने बताया कि गुरूवार की रात्रि में परिवार के सभी सदस्य खाना खाने के बाद खटिया में सो गए थे। तभी रात्रि में विकास को उसकी खाट में कुछ होना समझ में आया। जब लाइट जलाकर देखे तो खाट में जहरीला सर्प था। इसके बाद सभी ने सर्प को भगाकर पुन: सो गए। इतने में विकास की तबियत बिगडऩे लगी। इसके बाद परिजनों ने उसे १०८ की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया। यहां शुक्रवार की प्रात: करीब ३.३० बजे विकास की उपचार के दौरान मौत हो गई।
इसी तरह दूसरा मामला खैरलांजी थाना क्षेत्र के ग्राम मोहगांव का है। मोहगांव निवासी विनोद पिता सेवकदास मेश्राम (४५) जो की गुरूवार की रात्रि में खाना खाकर खाट में सोया हुआ था। जिसके सीने में एक जहरीले सर्प ने दंश दिया। इसके बाद उसने अपने परिजनों को जानकारी दी। परिजनों ने निजी वाहन कर विनोद को जिला अस्पताल में भर्ती कराया। इसकी भी उपचार के दौरान मौत हो गई।
बहरहाल बारिश के मौसम में जिले के विभिन्न स्थानों से सर्प दंश के मामले में लगातार सामने आ रहे हैं। इनमें अधिकांश मामलों में पीडि़त अस्पताल में उपचार न कराते हुए प्राथमिक उपचार के तौर पर झाड़ फूंक करवाते हैं। ऐसे में समय पर उपचार नहीं मिलने से मरीज की तबियत और बिगड़ जाती है और जहर पूरे शरीर में फैल जाता है। परिणाम अस्पताल पहुंचते तक मरीज दम तोड़ देते हैं। जिला अस्पताल से प्राप्त आंकड़ों की माने तो पिछले दो महिनों में ही करीब एक दर्जन से अधिक मरीजों की सर्प दंश से मौत हो चुकी है। हालाकि सर्प दंश के मामलों को लेकर जिला स्वास्थ्य प्रबंधन पूरी तैयारी होने की बात कर रहे हैं। वहीं ग्रामीण अंचलों से जिला अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों की माने तो ग्रामीण अंचलों के स्वास्थ्य केन्द्रों में विभाग ने वैक्सीन तो मुहैया करवा दी है। लेकिन विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने के कारण वैक्सीन का उपयोग नहीं किया जा रहा है और ऐसे स्वास्थ्य केन्द्रों में पहुंचने वाले मरीजों को सीधे जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। ऐसे में उपचार में देरी होती है और मरीज काल के गाल में समा रहे हैं।

mukesh yadav Reporting
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