गेहूं की कालाबाजारी मामले की विभागीय जांच शुरू

मप्र स्टेट वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक कर रहे है मामले की जांच, दोनों कर्मचारियों के समर्थन में आगे आया संगठन, सौंपा ज्ञापन

By: Bhaneshwar sakure

Updated: 04 Mar 2021, 09:13 PM IST

बालाघाट/वारासिवनी. 151 क्विंटल शासकीय गेहूं की अफरा-तफरी के मामले में बालाघाट कलेक्टर द्वारा व्यापारी, परिवहनकर्ता और दो कर्मचारियों को दोषी मानते हुए 6 माह की जेल भेज देने के मामले ने अब तूल पकडऩा प्रारंभ कर दिया है। इस मामले में अब मध्यप्रदेश राज्य नागरिक आपूर्ति निगम अधिकारी, कर्मचारी संघ भोपाल भी सामने आ गया है। संगठन ने प्रबंध संचालक एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कार्पोरेशन भोपाल को ज्ञापन देकर कलेक्टर बालाघाट द्वारा की गई कार्रवाई को गलत बताया है।
इधर, इस मामले की जांच करने के लिए गुरुवार को मध्यप्रदेश स्टेट वेयर हाउसिंग एवं लॉजिस्टिक कार्पोरेशन के क्षेत्रीय प्रबंधक बीएस सुमन वारासिवनी वेयर हाउस पहुंचे हैं। जहां उन्होंने दिन भर दस्तावेजों की जांच पड़ताल की। साथ ही विभागीय अधिकारी व कर्मचारी के बयान दर्ज किए। प्रबंधक सुमन ने मीडिया के सवालों पर सिर्फ इतना ही कहा कि जांच विभागीय प्रक्रिया है। जांच पूरी होने के बाद जो भी तथ्य आएंगे, उसकी रिपोर्ट भोपाल में उच्चाधिकारियों को सौंप दी जाएगी।
वहीं सेमी गवर्नमेंट फेडरेशन एम्प्लाइज के प्रांत अध्यक्ष अनिल वाजपेयी ने वारासिवनी शाखा प्रबंधक व नागरिक आपूर्ति निगम केंद्र प्रभारी को डायरेक्ट सीधे छह माह के लिए जेल भेजने के कलेक्टर के आदेश को तानाशाही रवैया बताया है। उन्होंने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और आयुक्त जबलपुर संभाग को पत्र भी लिखा है। उन्होंने पत्र में मांग की है कि बिना नियोक्ता की अनुमति के शाखा प्रबंधकों केंद्र और प्रभारी को सीधे जेल भेजने की प्रक्रिया की गई हैं, वह अवैधानिक है। इससे कर्मचारियों में रोष व्याप्त है। पत्रानुसार आने वाले समय में खाद्यान्न खरीदी का कार्य 15 मार्च से चालू हो रहा है। कलेक्टर की इस कार्रवाई से खरीदी में व्यवधान पैदा होगा। नागरिक आपूर्ति निगम की अनुमति से संबंधित परिवहनकर्ता द्वारा राशन को लेकर राशन की दुकानों तक पहुंचाए जाने का कार्य किया जाता हैं। इस बीच अगर किसी प्रकार की कोई भी अनियमितता या हेराफेरी होती हैं, तो उसकी जिम्मेदारी परिवहनकर्ता की होती हैं। पत्र में लिखा गया है कि इस प्रकरण में भी ऐसा ही हुआ है। लेकिन कलेक्टर बालाघाट द्वारा परिवहनकर्ता के साथ-साथ नागरिक आपूर्ति निगम और वेयरहाउसिंग कारपोरेशन के प्रबंधकों को जिम्मेदार मानते हुए 6 माह के कारावास की कार्रवाई की गई है, जो कि निंदनीय है। उन्होंने चेतावनी दी है कि संबंधित दोनों निगमों के कर्मचारियों पर की गई कार्रवाई पर पुनर्विचार कर उन्हें दोषमुक्त नहीं किया जाता हैं तो पूरे प्रदेश में आंदोलन कर खरीदी कार्य का बहिष्कार करने पर भी संगठन विचार कर सकता हैं।
गौरतलब है कि 3 मार्च को कलेक्टर दीपक आर्य ने सरकारी गेहूं की कालाबाजारी के मामले में चोर बाजारी निवारण एवं अत्यावश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत चार व्यक्तियों को 6 माह की अवधि के लिए जेल मे बंद रखने के आदेश दिए थे। जिस पर पुलिस ने चारों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जिसमें नागरिक आपूर्ति निगम के केन्द्र प्रभारी रिकज देशमुख व मध्यप्रदेश स्टेट वेयर हाऊसिंग एंड लाजिस्टिक के शाखा प्रबंधक नवीन बिसेन के साथ व्यापारी और परिवहनकर्ता को 6-6 माह के जेल की सजा सुना दी है। सूत्रों के अनुसार इस मामले में वेयर हाउस से सरकारी अनाज को सोसायटियों में भेजने की प्रक्रिया में कांटा पर्ची व गेट पास तक जारी होने की बात सामने आ रही है। वहीं गेहूं के आबंटन का चालान तक कटने की बात कही जा रही है। इस मामले में जहां वेयर हाउस व नागरिक आपूर्ति निगम प्रदाय केन्द्र द्वारा पूरी प्रक्रिया व दस्तावेज होने की बात कही जा रही है। पूरे मामले में परिवहनकर्ता राजिक खान व व्यापारी लालू सोहाने को कालाबाजारी के लिए पूरी तरह जिम्मेदार बताया जा रहा हैं।

Bhaneshwar sakure Bureau Incharge
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