scriptDoing residence in forest land, agricultural work, lease not yet recei | वनभूमि में कर रहे निवास, कृषि कार्य, अब तक नहीं मिला पट्टा | Patrika News

वनभूमि में कर रहे निवास, कृषि कार्य, अब तक नहीं मिला पट्टा

बैगा आदिवासियों ने जनप्रतिनिधियों को सुनाई अपनी व्यथा

बालाघाट

Published: July 18, 2021 09:56:13 pm

बालाघाट. जिले के आदिवासी अंचलों में निवासरत विशेष पिछड़ी बैगा जनजाति वर्षों से वन भूमि में निवास भी कर रहे हैं और खेती भी। बावजूद इसके आज तक उन्हें मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। इधर, बैगा आदिवासियों ने जनप्रतिनिधियों को अपनी व्यथा सुनाई। समस्या का समाधान किए जाने की मांग की। लेकिन उन्हें केवल कोरा आश्वासन ही मिल पाया है।
जानकारी के अनुसार जनपद पंचायत बैहर और परसवाड़ा के अंतर्गत आने वाले आधा सैकड़ा से अधिक बैगा आदिवासी इस समस्या से जूझ रहे हैं। इन बैगा आदिवासियों ने १४ जुलाई को बालाघाट प्रवास पर पहुंचे जिले के प्रभारी मंत्री हरदीप सिंह डंग से भी मुलाकात की, समस्याएं बताई और उसका निराकरण किए जाने की मांग भी की। लेकिन प्रभारी मंत्री से भी उन्हें केवल कोरा आश्वासन ही मिला है। इसी तरह उन्होंने आयुष मंत्री रामकिशोर कावरे को भी ज्ञापन सौंपा।
पीडि़त कैलाश मड़ावी, गुलाब मड़ावी, सुरेश मेरावी, राजेश मेरावी, सुकदेव मेरावी, फूलसिंह धुर्वे, बाबूलाल धुर्वे सहित अन्य ने बताया कि वे छिंदीटोला, लगमा, पिंडकेपार, सुंदरवाही सहित अन्य ग्रामों के मूल निवासी है। वे वर्षों से जंगलों में निवास कर रहे हैं। वनोपज के सहारे अपनी जीविका चला रहे हैं। वर्ष २००४-०५ से लगातार वन भूमि पर खेती कर रहे हैं, लेकिन वन विभाग द्वारा उन्हें कार्रवाई का भय दिखाकर भगाया जा रहा है। जबकि शासन ने बैगा समुदाय को राष्ट्रीय मानव घोषित कर अनेक योजनाएं संचालित की है। लेकिन आज तक इन योजनाओं का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है। उसमें वन भूमि में निवासरत लोगों को पट्टा नहीं मिलने की भी समस्या शामिल है।
इसी तरह जनपद पंचायत बैहर के अंतर्गत गढ़ी क्षेत्र के कान्हा नेशनल पार्क से लगे जंगल में ५० वर्ष से भी अधिक समय से निवासरत लोगों को आज तक वन भूमि का पट्टा नहीं मिल पाया है। ग्रामीण देवसिंह पिता सिंगनू, झिंगरु पिता मानसिंह, सम्मल पिता मंगलू, छत्तर पिता भाठिया, करन पिता गत सिंह, दशरु मड़ावी, उदल सिंह मरकाम, झाड़ सिंह तेकाम सहित अन्य ने बताया कि वर्ष १९९२-९३ से वे पशु प्रजनन प्रक्षेत्र गढ़ी के समीप राजस्व भूमि पर बंजर भूमि को कृषि योग्य बनाकर खेती का कार्य कर रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें इसका मालिकाना हक नहीं मिल पाया है। इतना ही नहीं सभी बैगा आदिवासी उसी स्थान पर निवास भी करते हैं। लेकिन आज तक उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पाया है।
रोजगार के भी नहीं है साधन
जिला मुख्यालय पहुंचे बैगा आदिवासियों ने बताया कि उनके पास रोजगार के साधन भी नहीं है। पंचायत से भी पर्याप्त काम नहीं मिल पाता है। वनोपज के सहारे जैसे-तैसे जीवन-यापन कर रहे हैं। शेष समय में रोजगार की तलाश में महानगरों की ओर पलायन कर जाते हैं। रोजगार की समस्या वर्षों से बनी हुई है। लेकिन आज तक इसका समाधान नहीं हो पाया है। जबकि अनेक बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या से अवगत करा दिया गया है, ज्ञापन भी सौंपा गया है। लेकिन आज तक निराकरण नहीं हो पाया है।
इनका कहना है
बैगा आदिवासियों की समस्याओं को लेकर मेरे द्वारा अनेक बार सदन में उठाया गया है, लेकिन आज तक सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है। बैगा आदिवासियों की समस्याएं जायज है।
-संजय उइके, विधायक बैहर
बैगा आदिवासियों ने समस्याएं बताई है, उनकी समस्याओं पर विचार किया जाएगा। उन्हें आज तक पट्टा क्यों नहीं मिल पाया है, पहले इसकी विस्तृत जानकारी ली जाएगी।
-हरदीप सिंह डंग, प्रभारी मंत्री बालाघाट
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