scriptDr. Gaharwar trying to give respect to mother tongue | मातृभाषा को सम्मान दिलाने प्रयासरत डॉ गहरवार | Patrika News

मातृभाषा को सम्मान दिलाने प्रयासरत डॉ गहरवार

मातृ भाषा को सम्मान दिलाने स्वमं को किया समर्पित
हिंदी के सम्मान में कई पुस्तकों का किया प्रकाशन
विभिन्न अभियान और काव्य गोष्ठियां करके भी मातृ भाषा का करते हैं प्रचार

बालाघाट

Updated: September 14, 2022 08:11:02 pm

बालाघाट. भारत सरकार ने हिंदी को हमारी राष्ट्र भाषा घोषित कर रखा है। बावजूद इसके हिंदी भाषा का चलन और उपयोगिता अपेक्षाकृत कम में देखने को मिलता है। शहर में ही हमने हस्ताक्षर अभियान शुरू किया, तो सामने आया कि अधिकांश लोग अंग्रेजी भाषा में अपने हस्ताक्षर करते हैं, हिंदी में हस्ताक्षर करने में उन्हें झिझक व शर्म महसूस होती है। इससे स्पष्ट अंदाजा लगाया जा सकता है हमारी मातृ भाषा कितने पायदान में है।
यह कहना शहर के प्रसिद्ध साहित्यकार व पुरातत्व विद डॉ गहरवार का है। डॉ वीरेन्द्र सिंह गहरवार का जिले के हिंदी साहित्य में महत्व पूर्ण योगदान रहा है। हिंदी दिवस पर पत्रिका ने उनसे हिंदी भाषा के चलन, पतन और उनके योगदान सहित अन्य बिंदुओं पर चर्चाएं की। उन्होंने वर्तमान परिदृश्य को हिंदी भाषा के विपरीत बताते हुए मातृ भाषा को उचित सम्मान दिलाए जाने पर चिंतन करने की बात कही।
चलन मेें बनी रहे हमारी भाषा
डॉ वीरेन्द्र सिंह गहवार के अनुसार प्राचीन काल से आजादी के पूर्व तक मातृभाषा का विशेषत: उल्लेखनीय योगदान था। गहरवार दम्पति के लिए भी उनकी एक मात्र भाषा हिंदी ही है। वर्तमान में हिंदी भाषा का चलन बना रहे इसके लिए उन्होंने गद्य और पद्य में शब्दांशों को उत्प्रेरित किया। हिन्दी दिवस पर 14 सितंबर 1984 को इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान का गठन किया। तब से वे निरंतर साहित्य, इतिहास एवं पुरातत्व पर शोधात्मक अध्ययन कर त्रैमासिक सामान्य शोध अंक यादें तथा वार्षिक गंगोत्री पत्रिका में गद्य और पद्य प्रकाशित करके विशालतम रुप में राष्ट्रीय एवं अंतर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी मातृभाषा के प्रति सम्मान प्रगट करते आ रहे हैं। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में शोध कर साहित्याचार्य की विशेष उपाधियों से वे अलंकृत भी हो रहे हैं।
मातृ भाषा अभियान
डॉ गहरवार के अनुसार उन्होंने ०1 सितंबर 2022 से मातृभाषा हस्ताक्षर अभियान की श्रृंखला का शुभारंभ किया हैं, काफी सफलताएं प्राप्त भी हो रही हैं। इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय में विभिन्न विषयों से संबंधित शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों को प्रायोगिक परीक्षा हेतु आना होता हैं, जिन्हें मातृभाषा में लिखना होता हैं। जब लिखानोंपरांत उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन किया जाता था, तब उनकी लेखनी में अशुद्धियों को देख अत्यंत दु:ख होता हैं। उनका प्रयास है कि हम गर्व से कहते हैं कि हम हिंदी है तो क्यों न हम हिंदी में ही अपने हस्ताक्षर करें। यह शुरूवात ही सही लेकिन हिंदी भाषा को अव्वल रखने इस तरह के अनेक प्रयासों की जरूरत है, तभी हमारी भाषा का सहीं मायनों में सम्मान बना रहेगा।
इनका कहना है।
वर्तमान परिदृश्य में प्रारंभिक शिक्षा दीक्षा से शुद्ध लेखन प्राय: बंद कर दिया गया है, जिसका प्रतिफल अब सामने आ ही गया हैं। उच्च शिक्षा प्राप्तोंपरांत भी कहीं न कहीं युवा मात्राओं में गलतियां कर रहे हैं। यह अपना दोष नहीं बल्कि अपने अपनत्व का दोष हैं, हम हिन्दी मात्राओं पर ज्यादा ध्यानाकर्षण करवा रहे हैं, ताकि भविष्य में परिपक्वता की ओर अग्रसर हो सकें।
डॉ वीरेन्द्र सिंह गहरवार, साहित्यकार
मातृभाषा को सम्मान दिलाने प्रयासरत डॉ गहरवार
मातृभाषा को सम्मान दिलाने प्रयासरत डॉ गहरवार
नोट- यह भी लगा सकते हैं-
डॉ वीरेन्द्र सिंह गहरवार के हिंदी भाषा को लेकर प्रयास, प्रकाशन व योगदान।

शिक्षा:-
1. एमए प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्वद्ध सागर से।
2. एमए अर्थशास्त्रद्ध
3. एलएलबी
4. कम्प्यूटर डिप्लोमा ई दक्ष बालाघाट
5. वास्तु, पुरातत्व, साहित्य, विधि सलाहकार
6. पीएचडी
विघा:-
लेख, कहानियां, गीत, कविता, हास्य, व्यंग्य, पुरातत्व समीक्षा, नाटक आदि।

हिंदी के लिए योगदान व प्रकाशन:-
साहित्य, पुरातत्व, इतिहास, समसामयिक, पर्यावरण तथा अन्य रचनात्मक कार्यों में नि:स्वार्थ भाव से कार्यों में समर्पित।

प्रकाशन:-
1. वैनगंगा घाटी का इतिहास, पुरातत्व, साहित्य, संस्कृति वैभव शोध ग्रंथ
2. बालाघाट जिले की प्राचीन मूर्ति कलात्मक, इतिहास एवं पुरातत्व शोध संस्थान संग्रहालय परिदृश्य।
3. वीर के तीर हास्य व्यंग्य।
4. वीर संवाद
5. अन्य लेख, कहानियां, गीत, कविताएं, लघुकथाएं तथा तात्कालिक विचारधाराएं।
सम्मान:-
साहित्य, पुरातत्व, पर्यावरण, समसामयिक क्षेत्रों में योगदान हेतु सन् 1973 से निरंतर 3700 के ऊपर सम्मान, अभिनन्दन पत्र, प्रशस्ति एवं रजक पदक आदि।

विशेष सम्मान:-
1. भारतीय डाक टिकट जारी हुआ।
2. विश्व रत्न सम्मान डॉ भीमराव आम्बेडकर 15/8/2022
३. पद्मश्री के लिए नामित

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