scriptEncroachment-अतिक्रमण से बदल रहा नदी का मूल स्वरुप | Encro The original form of the river is changing due to encroachment | Patrika News
बालाघाट

Encroachment-अतिक्रमण से बदल रहा नदी का मूल स्वरुप

कटंगी और वारासिवनी क्षेत्र की जीवनदायिनी चंदन नदी का अब मूल स्वरुप ही बदल गया है। अतिक्रमण के कारण नदी ने कुछेक स्थानों पर कृत्रिम रुप धारण कर लिया। जिसके कारण मिट्टी का कटाव हो रहा है। मिट्टी कटाव से भूमि स्वामी किसानों के खेत खराब हो रहे हैं। इतना ही नहीं चंदन नदी में […]

बालाघाटJun 12, 2024 / 09:56 pm

Bhaneshwar sakure

चंदन नदी

अतिक्रमण से बदल रहा नदी का मूल स्वरुप

कटंगी और वारासिवनी क्षेत्र की जीवनदायिनी चंदन नदी का अब मूल स्वरुप ही बदल गया है। अतिक्रमण के कारण नदी ने कुछेक स्थानों पर कृत्रिम रुप धारण कर लिया। जिसके कारण मिट्टी का कटाव हो रहा है। मिट्टी कटाव से भूमि स्वामी किसानों के खेत खराब हो रहे हैं। इतना ही नहीं चंदन नदी में पानी को रोके जाने के लिए बनाया गया स्टाप डेम भी अब मिट्टी कटाव के कारण क्षतिग्रस्त होने लगा है।
बालाघाट/कटंगी. कटंगी और वारासिवनी क्षेत्र की जीवनदायिनी चंदन नदी का अब मूल स्वरुप ही बदल गया है। अतिक्रमण के कारण नदी ने कुछेक स्थानों पर कृत्रिम रुप धारण कर लिया। जिसके कारण मिट्टी का कटाव हो रहा है। मिट्टी कटाव से भूमि स्वामी किसानों के खेत खराब हो रहे हैं। इतना ही नहीं चंदन नदी में पानी को रोके जाने के लिए बनाया गया स्टाप डेम भी अब मिट्टी कटाव के कारण क्षतिग्रस्त होने लगा है। बावजूद इसके शासन-प्रशासन इस नदी को बचाने के लिए कोई पहल नहीं कर रहा है। जबकि प्रदेश सरकार ने जल स्रोतों को बचाने के लिए नमामि गंगे अभियान शुरु की है। लेकिन चंदन नदी को बचाने के लिए इस अभियान में भी पहल नहीं हो पाई है।
जानकारी के अनुसार कटंगी क्षेत्र के ग्राम नहलेसरा, लोहमारा, चिचगांव, कोल्हापुर, उजाडबोपली, गोपालपुर, उमरी, सावंगी, कलगांव, बाहकल, टटेकसा, गजपुर सहित अन्य ग्रामों से होकर गुजरने वाली चंदन नदी अपने अस्तित्व को बचाने लड़ाई लड़ रही है। क्षेत्र के रसूखदारों ने अपने निजी स्वार्थ के चलते चंदन नदी पर बेजा अतिक्रमण कर लिया है। अतिक्रमण कर अपनी स्वाथपूर्ति कर रहे है। पिछले दो दशक से चंदन नदी पर रसूखदारों ने अतिक्रमण कर चंदन नदी की सैकड़ों एकड़ भूमि को लील लिया है। नदी की भूमि पर अतिक्रमण कर अब खेती की जा रही है। जिसके चलते नदी अब नाला बनकर रह गई है। किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने इसे बचाने का प्रयास कभी नहीं किया। चंदन नदी पर अतिक्रमण का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो इस नदी का पूरा अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा।
इतिहास बनकर न रह जाए चंदन नदी
चंदन नदी को बचाने के लिए यदि प्रयास नहीं किया गया तो यह केवल इतिहास बनकर रह जाएगी। आने वाले कुछ वर्षों में नदी का अस्तित्व ही पूरा समाप्त हो जाएगा। आने वाली युवा पीढ़ी चंदन नदी का नाम ही सुन पाएगी, उसे कभी देख नहीं पाएंगे।
नहलेसरा और लोहमारा के बीच हुआ है बेजा अतिक्रमण
नहलेसरा और लोहमारा गांव से होकर गुजरने वाली चंदन नदी में भूमाफिया, रसूखदारों और ग्रामीणों ने बेजा अतिक्रमण किया है। इस पर खेती की जा रही है। जिसके कारण नदी का मूल स्वरुप परिवर्तित होने लगा है। अन्य निजी किसानों की भूमि अतिक्रमण के कारण खराब हो रही है। भूमि स्वामी किसानों ने बताया कि इसकी शिकायत संबंधित पटवारी को भी की गई थी। लेकिन उन्होंने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके पहले तत्कालीन एसडीएम को भी इस समस्या से अवगत कराया गया था। लेकिन उन्होंने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिसके कारण समस्या जस की तस बनी हुई है।
तो बारिश में बह सकता है स्टाप डेम
नदी के पानी को रोकने के लिए स्टाप डेम का निर्माण भी किया गया है। यह स्टाप डेम अब भूमि के कटाव की वजह से जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच गया है। आलम यह है कि इस बार की बारिश में यह स्टाप डेम भी बह सकता है। जिसके कारण अन्य किसानों को नुकसान होने की संभावना है।
इनका कहना है
चंदन नदी में हो रहे अतिक्रमण की अनेक बार शिकायत की गई। लेकिन किसी ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। जिसके चलते चंदन नदी का अस्तित्व अब धीरे-धीरे समाप्त होते जा रहा है। नदी से अतिक्रमण हटाना चाहिए।
-अजुर्न गाडेकर, किसान
नदी में अतिक्रमण कर खेती किए जाने से अन्य भूमि स्वामी किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। मिट्टी के कटाव से उनकी खेती खराब हो रही है। जिससे उन्हें काफी नुकसान हो रहा है। नदी में अतिक्रमण का दायरा दिनोंदिन बढ़ते ही जा रहा है।
-प्रवीण दीक्षित, किसान
चंदन नदी को अतिक्रमण मुक्त करने के लिए शासन-प्रशासन को मुहिम चलाना चाहिए। अतिक्रमण के कारण नदी का पूरा अस्तित्व ही समाप्त हो चुका है। नदी पूरी तरह से नाला बन गई है। इसे बचाने की पहल हर हाल में होनी चाहिए।
-विनोद मेश्राम, किसान
नदी को बचाने के लिए प्रयास शुरु कर दिए गए हैं। नदी में हो रहे रेत के खनन को रोकना पहली प्राथमिकता है। अतिक्रमण भी प्राथमिकता के साथ हटाया जाएगा। इतना ही नहीं चंदन नदी के मुहाने पौधरोपण भी किया जाएगा।
-गौरव पारधी, विधायक कटंगी

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