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बालाघाट

Farmers In Distress-पानी की कमी, गन्ने की फसल सूखी

जिले के पठार अंचल की जीवनदायिनी बावनथड़ी नदी पूरी तरह से सूख गई है। नदी में पानी की जगह रेत नजर आ रही है। पानी की कमी से गन्ना की फसल भी सूखने लगी है। जिससे किसान आफत में आ गए हैं। किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। बालाघाट. जिले के पठार अंचल की […]

बालाघाटJun 02, 2024 / 10:11 pm

Bhaneshwar sakure

गन्ने की फसल सूखी

पानी की कमी, गन्ने की फसल सूखी

जिले के पठार अंचल की जीवनदायिनी बावनथड़ी नदी पूरी तरह से सूख गई है। नदी में पानी की जगह रेत नजर आ रही है। पानी की कमी से गन्ना की फसल भी सूखने लगी है। जिससे किसान आफत में आ गए हैं। किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।
बालाघाट. जिले के पठार अंचल की जीवनदायिनी बावनथड़ी नदी पूरी तरह से सूख गई है। नदी में पानी की जगह रेत नजर आ रही है। पानी की कमी से गन्ना की फसल भी सूखने लगी है। जिससे किसान आफत में आ गए हैं। किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसानों ने राजीव सागर बांध परियोजना से बावनथड़ी नदी में पानी छोड़े जाने की गुहार लगाई है।

बावनथड़ी नदी में पानी की जगह नजर आ रही रेत

जानकारी के अनुसार पठार अंचल में ज्यादातर गन्ना उत्पादक किसान हैं। मौजूदा समय में भी किसानों ने गन्ना की फसल लगाई हुई है। लेकिन किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। जिसके कारण अधिकांश गन्ना की फसल पूरी तरह से सूख गई है। फसल के सूखने से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। किसानों ने राजीव सागर बांध परिजयोजना से नदी में पानी छोड़े जाने की मांग की है। बावजूद इसके अभी तक नदी में पानी नहीं छोड़ा गया है। जिससे किसान काफी परेशान है।

गांवों में गहरा रहा जल संकट

बावनथड़ी नदी के सूखने से गांवों का भू-जल स्तर भी प्रभावित हो रहा है। गांवों में जल संकट गहराने लगा है। खासतौर पर नदी के मुहाने बसे गांवों में यह समस्या सबसे अधिक देखने को मिल रही है। इस भीषण गर्मी में जहां सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। वहीं ग्रामीणों को पेयजल के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।

दो दर्जन से अधिक गांव प्रभावित


नदी के मुहाने बसे दो दर्जन से अधिक गांव के किसान प्रभावित हो रहे हैं। जिसमें भोंडकी, गोरेघाट, बड़पानी, महकेपार, मासूलखापा, कोडबी, दिग्धा, आजंनबिहरी, कोसमटोला, बम्हनी, बोनकट्टा, हरदोली, चाकाहेटी, पुलपुट्टा, छतेरा, चंदरकुआं, टेकाड़ी, चीचोली, शंकर पिपरिया, डोंगरिया, मोवाड सहित अन्य ग्राम शामिल है।

नदी में पानी छोड़े जाने की मांग


पठार क्षेत्र के किसान रमेश गोपाले, लक्ष्मीचंद घोनमोडे, विजय कापगते, केशवराव हाथजाड़े, सकाराम गहाने, कांतिलाल पुष्पतोड़े, वंजीर पुष्पतोड़े, हेमेश्वर पुष्पतोड़े, दिनेश घोनमोडे, दयाराम गोपाले, सुखदेव देशमुख, गुलाब पुष्पतोड़े, बेनीराम पुष्पतोड़े सहित अन्य किसानों ने राजीव सागर बांध परियोजना से बावनथड़ी नदी में पानी छोड़े जाने की मांग की है। ताकि सूख रही गन्ना की फसल को पानी मिल सकें। पानी नहीं मिलने से किसानों को काफी नुकसान होगा।
फैक्ट फाइल
गांव- दो दर्जन से अधिक गांव
किसान- करीब चार हजार किसान
गन्ना फसल का रकबा- करीब सात हजार एकड़
सब्जी का रकबा- करीब 500 एकड़
इनका कहना है
बावनथड़ी नदी के सूखने से गांवों के जलस्रोतों पर भी असर पड़ रहा है। तेजी से भू-जल स्तर गिर रहा है। नदी के मुहाने बसे गांवों में पानी की समस्या गहराने लगी है। जिसके कारण ग्रामीणों, किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
-सुखदेव देशमुख, ग्रामीण
क्षेत्र में गन्ना की फसल अधिक लगाई जाती है। यही किसानों की मुख्य आय का स्रोत है। ऐसे में फसल सूखने से किसानों को नुकसान हो रहा है। उन्हें आर्थिक क्षति हो रही है। बावनथड़ी नदी में पानी छोड़े जाने से किसानों को कुछ राहत मिल सकती है।
-रमेश गोपाले, किसान
राजीव सागर बांध परियोजना से बावनथड़ी नदी में पानी छोड़ा जाना चाहिए। जिससे किसानों को सिंचाई के लिए पानी मिल सकें। पानी नहीं होने से किसान सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। गन्ना की फसल पूरी तरह से सूख गई है। किसान काफी परेशान है।
-विजय कापगते, किसान
बावनथड़ी नदी पूरी तरह से सूख गई है। पानी की जगह रेत ही नजर आ रही है। पानी की कमी से गन्ना की फसल पूरी तरह से सूख गई है। सब्जियों की स्थिति भी काफी खराब है। फसल के सूखने से किसानों को काफी नुकसान हो रहा है।
-दीपक पुष्पतोड़े, अध्यक्ष, पठार संघर्ष समिति

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