मत्स्य पालकों, पशु पालकों को मिलेगा क्रेडिट कार्ड

डीएलसीसी की बैठक का हुआ आयोजन

By: Bhaneshwar sakure

Published: 17 Jun 2020, 07:58 PM IST

बालाघाट. अग्रणी बैंक कार्यालय बालाघाट द्वारा दुग्ध संघो से जुड़े हुए पशु पालकों और मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़े कृषको को किसान क्रेडिट कार्ड की सुविधा उपलब्ध करने के लिए विशेष जिला स्तरीय समन्वय समिति की बैठक का आयोजन कलेक्टर दीपक आर्य की अध्यक्षता में किया गया। बैठक में अपर कलेक्टर राघवेन्द्र सिंह, जिपं सीईओ रजनी सिंह भी उपस्थित थी।
बैठक में अग्रणी जिला प्रबंधक दिगम्बर भोयर द्वारा बताया गया कि दुग्ध उत्पादक किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान करने के लिए 1 जून से 31 जुलाई तक विशेष अभियान प्रारंभ किया गया है। दुग्ध उत्पादक किसानों को अल्प अवधि के क्रेडिट प्रदाय करने का मूल उद्देश्य उनकी कार्यशील पूंजी, मार्केटिंग आदि की आवश्यकताओ की पूर्ति करना है। भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा सभी पशु पालक किसानो को केसीसी अंतर्गत शामिल किया गया है।
अग्रणी जिला प्रबंधक भोयर ने बताया कि ऋण पर किसानों को 2 प्रतिशत ब्याज की छूट और समय पर भुगतान करने पर ब्याज में 3 प्रतिशत की अतिरिक्त छूट प्राप्त होगी। वर्तमान परिस्थिति में ऐसे सभी किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड प्रदाय किए जाने है जो की डेयरी सहकारी समितियों के सदस्य है और उनके पास केसीसी नहीं है। यदि इन किसानो के पास भूमिस्वामी होने के कारण किसान के्रडिट कार्ड है तो वे अपनी लिमिट बढ़वा सकते है। परन्तु ब्याज पर छूट 3 लाख रुपए तक की सीमा तक ही रहेगी। इस प्रक्रिया के लिए मप्र शासन और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा दिशा निर्देश सभी बैंको को दिए गए है।
जिला दुग्ध संघ की प्रबंधक माधुरी सोनेकर ने बताया कि जिले में 102 दुग्ध समितियों में 3781 सदस्य हैं। जिसमें से लगभग 1600 के आसपास ही सक्रीय है। साथ ही बैंकों द्वारा दुग्ध समिति के महिला सदस्यों के नाम से भी किसान क्रेडिट कार्ड बनाया जाना चाहिए।
कलेक्टर आर्य द्वारा बैठक में निर्देशित किया गया कि सभी सदस्यों को इस योजना में शामिल किया जाए। बंद पड़ी समितियों को भी पुनर्जीवित कर उन्हें भी योजना का लाभ दिलाया जाए। इसी तरह बैठक में बताया गया कि दुग्ध उत्पादक पशुपालकों की तरह ही जिले में मत्स्यपालन गतिविधि में शामिल किसानो को भी क्रेडिट कार्ड प्रदाय किया जाना है। जिपं सीईओ रजनी सिंह ने बैठक में सुझाव दिया कि नहरों के समीप वाली जमीन में पानी के रिसाव से खेती नहीं हो पाती। अत: ऐसे क्षेत्रो में किसान चाहे तो छोटे-छोटे पानी के कुण्ड निर्मित कर मत्स्यपालन कर सकते है।
बैठक में जीके शेट्टे नाबार्ड, एमएएल समुद भारतीय स्टेट बैंक, आरके सोलंकी दुग्ध उत्पादन विभाग, डॉ. पीके अतुलकर उप संचालक पशु चिकित्सा सेवा विभाग, ओमप्रकाश बेदुआ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, बैंको के जिला समन्वयक सहित अन्य उपस्थित थे।

Bhaneshwar sakure Bureau Incharge
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned