पेट पालने मछुआरों ने की तालाब की सफाई

लापरवाही का खामियाजा, जलकुंभी से भरा तालाब

By: mukesh yadav

Published: 24 Feb 2020, 04:02 PM IST

कटंगी। हमारे परिवार का पेट ही इस तालाब के भरोसे भरता है। तालाब में मत्स्य पालन और सिंघाड़ा उत्पादन कर 191 मछुआरों के परिवार अपना गुजर-बसर करते हैं। लेकिन बीते एक दशक में अतिक्रमण और घटते जल संग्रहण क्षेत्र से तालाब में मत्स्य पालन करना मुश्किल हो गया है। वही पूरे तालाब में फैली जलकुंभी से मछलियां मर चुकी है और बीते 3 साल से सिंघाड़े का उत्पादन नहीं कर पा रहे हैं। जल संसाधन विभाग और नगर परिषद के अधिकारियों को कई बार तालाब के आस-पास का अतिक्रमण हटाकर गहरीकरण एवं जीर्णोद्धार करने की मांग की गई। लेकिन हमें सिर्फ आश्वासन ही मिला। अब पेट पालना है तो तालाब की सफाई भी जरूरी थी, इसलिए जब प्रशासन ने हमारी नहीं सुनी तो हम मछुआरों ने ही समिति के पास की पुंजी से तालाब की सफाई शुरू कर दी है।
यह व्यथा मत्स्य उद्योग सहकारी समिति कटंगी के वह मछुआरे सुना रहे थे, जिनका परिवार शहर के बड़़ा तालाब के भरोसे ही पलता है। मगर, क्षेत्रीय नेताओं और प्रशासन की उदासीनता तथा लापरवाही की वजह से यह तालाब दिन-ब-दिन अतिक्रमण की वजह से सिकुड़ता जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि बड़ा तालाब जल संसाधन विभाग की संपत्ति है। लेकिन इसकी देख-रेख की जिम्मेदारी नगर परिषद के पास हैं। लेकिन नगर परिषद इस तालाब का जीर्णोद्धार करने में पूरी तरह से अक्षम ही साबित हुई है। नगर परिषद को राज्य सरकार शहरों के तालाबों के गहरीकरण एवं जीर्णोद्धार के लिए 2 बार राशि की घोषणा भी कर चुकी है। मुख्यमंत्री अधोसंरचना से यह राशि नगर परिषद को दी गई। पहली बार तो नगर परिषद ने उक्त राशि से सड़क एवं नालियों का निर्माण करवा लिया। वहीं अब जब दूसरी बार राशि की घोषणा हुई है, तो नपा समय पर प्राक्कलन ही तैयार नहीं कर पाई।
बड़ा तालाब पर आश्रित मछुआरे एवं सिंघाड़ा उत्पादक योगेश मौरी, संदीप मौरी, ठाकुरदास बर्वे, ओमप्रकाश मौरी, श्रीप्रकाश मौरी, सुनील चौरगड़़े, गौरव चौरगड़े, कौडुलाल चौरगड़़े, तेजलाल बर्वे, धनेन्द्र बर्वे, पुनाराम चौरगड़े, सुरेश चौरगड़े, शंकर चौरगड़े, अनिल बरमैया, अशोक बरमैया, प्यारेलाल बरमैया, लालु मानकर, नन्दु मोरसिया, जय मोरसिया, राधेलाल बर्वे, ओमप्रकाश मोरसिया, दिलीप बर्वे, हर्ष बर्वे, रंजीत सुर्यवंशी, निलमदार बरमैया, मेघदास बरमैया, इश्वरदास बरमैया, हरि बरमैया, दिलीप सुलाखे, कमलेश मानकर ने तालाब में जलकुंभी की सफाई की।
ज्ञात रहे कि बड़ा तालाब पूरी तरह से जलकुंभी से भरा पड़ा है। मछुआरों को यह जलकुंभी हटाने में करीब सप्ताह भर का समय लग सकता है। वहीं इस काम में समिति को करीब 5 लाख रुपए की लागत लगने का अनुमान है। खैर मछुआरों की यह समिति तो पाइ-पाइ जोड़़ती है वह समिति आज शासन-प्रशासन द्वारा तालाब की उपेक्षा का शिकार होने पर स्वंय ही तालाब की सफाई कर रहे हैं। यह तब हो रहा है जब जल संग्रहण और संरक्षण को लेकर सरकार और अफसर बड़ी-बड़ी ढ़ीगें हाकंते हैं।

mukesh yadav Reporting
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