धूल फांक रहे गैस सिलेंडर, चुल्हे की ओर लौट रही जिंदगी

रसोई गैस के बढ़ते दाम ने बिगाड़ा गरीबों का बजट

By: Bhaneshwar sakure

Published: 22 Sep 2021, 11:35 PM IST

बालाघाट. बड़ी मुश्किल से दो वक्त की रोटी के लिए पैसे कमा पाते हैं। ऐसे में हम कैसे रसोई गैस भरवा पाएंगे। दो वक्त की रोटी के लिए पूरे परिवार के सदस्य को मेहनत करनी पड़ती है। इसके बाद ही हमें घर का खाना उपलब्ध हो पाता है। यदि एक माह के लिए हम रसोई गैस भरवा भी ले तो हमारा पूरा बजट बिगड़ जाता है। यह कहना है कि शहर के वार्ड क्रमांक १३ गंगानगर निवासी अनीता बुर्डे का।
घर का काम-काज करने वाली अनीता बुर्डे ने बताया कि उन्हें निशुल्क गैस कनेक्शन तो मिला है, लेकिन उसे भरवा पाने के लिए उनके पास पैसे नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्हें एक घर से बमुश्किल ७ सौ रुपए प्रतिमाह के मिलते हैं। जबकि उनका बेटा ५० रुपए प्रतिदिन की दर से मजदूूरी करता है। इस तरह से हमारे द्वारा घर का खर्चा चलाया जा रहा है। ऐसी स्थिति में क्या हम लोग एक माह में रसोई गैस भरवा पाएंगे? मजबूरी में हम लोगों को चुल्हे में खाना पकाना पड़ता है। जंगल से लकड़ी लाने भी जाते हैं तो वहां वन विभाग वाले कार्रवाई का डर बताते हैं। उनके साथ यह समस्या काफी दिनों से बनी हुई है। इसी तरह से कृषि कार्य करने वाले समोतीन सैय्याम ने बताया कि उन्हें अभी तक गैस कनेक्शन मिला ही नहीं है। जिसके कारण वे चुल्हे पर ही खाना पकाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि उनके पास आय के स्रोत नहीं है। कृषि से जो आय होती है उससे ही घर का गुजारा चलता है।
जानकारी के अनुसार महिलाओं को चुल्हे से आजादी दिलाने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष २०१६ से उज्जवला योजना शुरू की थी। इस योजना के तहत पात्र गरीब हितग्राहियों को निशुल्क गैस कनेक्शन प्रदान किया जा रहा है। लेकिन इसमें बाद में हितग्राहियों को अपने पैसे से रसोई गैस भरवाना पड़ता है। लेकिन मौजूदा समय में रसोई गैस के दाम बढऩे से हितग्राहियों का बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है। खासतौर पर इससे गरीब वर्ग ज्यादा प्रभावित हुआ है। रसोई गैस के बढ़ते दामों ने न केवल गरीबों का बजट बिगाड़ दिया है। बल्कि उन्हें चुल्हे की ओर फिर से लौटने मजबूर कर दिया है। अब अधिकांश गरीब परिवार चुल्हे में ही खाना बनाते नजर आते हैं।
इनका कहना है
गैस कनेक्शन तो मिला है, लेकिन रसोई गैस के बढ़ते दामों के कारण वे उसे भरवाते नहीं हैं। आसानी से लकड़ी मिल जाने के कारण वे चुल्हे पर ही खाना पकाते हैं।
-हेमलता पटले, ग्रामीण हितग्राही
मेरे पास गैस कनेक्शन है, लेकिन पिछले ८-९ माह से गैस नहीं भरवा पाए हैं। रसोई गैस के बढ़ते दाम के कारण वे गैस नहीं भरवा रहे हैं। वे बमुश्किल मजदूरी कर अपना घर चलाते हैं।
-पुष्पलता, हितग्राही
सरकार को रसोई गैस के दाम कम करना चाहिए। कभी गैस भरवा लिए तो उसे ६-८ माह तक थोड़ा-थोड़ा उपयोग करते हैं। मजबूरी में हमें चुल्हे में खाना पकाना पड़ता है।
-रायवंता बाई कोकोटे, हितग्राही

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