वाहन में क्षमता से अधिक बैठाए जा रहे बच्चे

हादसों से सीख नहीं ले रहे जिम्मेदार


खैरलांजी. क्षेत्र में पिछले दिनों लगातार सामने आए स्कूली वाहनों के हादसों से भी जिम्मेदार सीख नहीं रहे हैं। वर्तमान समय में भी स्कूली वाहनों में क्षमता से अधिक बच्चो को बैठाया जा रहा है। ऐसा कर स्कूली बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ किए जाने के साथ ही स्कूल शिक्षा विभाग और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना की जा रही है।
जानकारी के अनुसार क्षेत्र में लगभग एक सैकड़ा निजी स्कूल संचालित है। इनमें अधिकांश स्कूलों में बच्चो को चौपहियां वाहन से लाना ले जाना किया जाता है। इन्हीं वाहनों में आवश्यकता से अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है। इस ओर ना तो स्कूल प्रबंधन गंभीरता दिखा रहा है और ना ही संबंधित विभाग इस दिशा में प्रयासरत है। 
वहीं सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन पर गौर करें तो स्कूल बसों में सम्बंधित स्कूल का नाम, नंबर लिखा हो, यदि बस किराए पर ली गई है तो बस पर ऑन स्कूल ड्युटी लिखा होना अनिवार्य है। स्कूल वाहनों में प्राथमिक उपचार की व्यवस्था, अग्निशामक यंत्र, स्कूल बैग रखने के लिए पर्याप्त जगह, खिड़कियों में समतल ग्रील फिट होना चाहिए, स्कूल का एक कर्मचारी बच्चों के साथ हो, ड्रायवर हमेशा वर्दी में हो, वाहन में स्पीड गर्वनर हो ताकि बस की गति न्यूनतम 40 किमी. घंटा हो इत्यादि का  पालन होना चाहिए। लेकिन क्षेत्र के एक स्कूल वाहन में भी इन निर्देशों का पालन नहीं किया जा रहा है।

बैठाएं जा रहे 15-20 बच्चे 
जानकारी के अनुसार क्षेत्र के स्कूली वाहनों में 09-1 की पासिंग है। लेकिन वाहन चालक नियम विरुद्ध 15 से 20 बच्चों को बैठा रहे हैं। वहीं इन वाहनों का आरटीओ में पंजीयन स्कूली वाहन के रुप में हैं और इन वाहनों से स्कूली समय के बाद व्यवसायिक उपयोग में भी किया जा रहा है। इन स्कूली वाहनों के मालिकों द्वारा स्कूली वाहनों में स्कूली का नाम, नंबर व रंग इत्यादि भी नहीं करवाया है। बावजूद इसके इन वाहनों की जांच तक नहीं जा रही है। सूत्रों की माने तो स्कूलों में चलने वाले कुछ वाहनों को केरोसिन से भी चलाया जा रहा है।

कई बार हो चुके हादसे
स्कूली वाहनों से हुए हादसों पर गौर करें तो एक वर्ष पूर्व ही खैरलांजी के फोगलटोला में एक स्कूल की बस अनियंत्रित होकर पलट गई थी। वहीं विगत 3 सितम्बर को सांवरी गांव में इसी स्कूल की बस से एक दो वर्षीय मासूम की मौत हो गई थी। इसके अलावा भी छुट मुट दुर्घटनाएं घटित हो चुकी है। लेकिन नियम विरुद्ध संचालित वाहनों पर लगाम नहीं लगाई जा रही है।

इनका कहना है
हमारे द्वारा लगातार नियम विरुद्ध दौड़ रहे वाहनों की जांच कर जुर्माना वसूला जा रहा है। शीघ्र ही स्कूली वाहनों की जांच व नियमों का पालन करवाया जाएगा।
पीएस भिलाला, आरटीओ बालाघाट
Prashant Sahare
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