MP ELECTION 2018 : उद्योग धंधे न रोजगार के साधन, ये कैसा विकास

कटंगी विधानसभा संग्राम
पत्रिका ग्राउंड रिपोर्ट, बेरोजगारी, पलायन, किसानों की समस्याएं बिगाड़ रही समीकरण

By: Bhaneshwar sakure

Updated: 25 Nov 2018, 09:19 PM IST

विकास के मुद्दे पर भाजपा तो जन समस्या के निराकरण को लेकर कांग्रेस चुनावी मैदान में
भानेश साकुरे
बालाघाट. उद्योग धंधे न रोजगार के साधन। बेरोजगारी का आलम। रोजगार के लिए लोगों का बड़ी संख्या में पलायन करना। कुछ इस तरह की स्थिति कटंगी विधानसभा क्षेत्र में बनी हुई है। इस सीट पर भाजपा जहां विकास के मुद्दों पर तो कांग्रेस समस्याओं के समाधान करने को लेकर चुनावी मैदान में है। वर्षों पुरानी समस्याओं का निराकरण नहीं होने के कारण जनता नाराज है। यहां पर वर्ष २००३ और २०१३ में भाजपा से केडी देशमुख विधायक निर्वाचित हुए तो कांग्रेस से २००८ मेंं विश्वेश्वर भगत। हालांकि, इस सीट पर मुख्य मुकाबला ६ बार विधायक व एक बार सांसद रहे भाजपा प्रत्याशी केडी देशमुख और दो बार विधायक रहे कांग्रेस प्रत्याशी टामलाल सहारे के बीच है। जीत के लिए दोनों ही प्रत्याशी मेहनत कर रहे है।
चिखलाबांध में अलग-अलग गांव के लोग चुनाव पर चर्चा कर रहे थे। दैतबर्रा निवासी नितेश भलावी से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि गांव और पूरे कटंगी विधानसभा क्षेत्र में रोजगार के कोई भी साधन नहीं है। तिरोड़ी, मिरगपुर, कोयलारी क्षेत्र में मैगनीज का बड़ी मात्रा में दोहन किया जाता है, लेकिन इस से जुड़ा कोई भी उद्योग यहां आज तक स्थापित नहीं किया गया है। मनरेगा से भी उतना काम नहीं मिल पाता, जितना एक व्यक्ति को आवश्यक है। यदि काम भी मिल गया तो मजदूरी भुगतान में विलंब होता है। देवेन्द्र मसराम ने बताया कि प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में लोग पलायन करते है। होली, दीपावली में ही पर्व मनाने के लिए अपने-अपने घरों में पहुंचते हैं। भैयालाल खंडाते का कहना है कि इस क्षेत्र के किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। जबकि तिरोड़ी, खैरलांजी और कटंगी तहसील में पिछले वर्ष कम बारिश हुई थी। अनेक किसानों की फसलें तबाह हो गई थी। किसानों को समस्याओं को लेकर बोनकट्टा, तिरोड़ी और कटंगी मुख्यालय में अनेक बार आंदोलन भी किया गया। केवल आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला। आज भी वही समस्याएं विद्यमान है। आनंद कोडोपे का कहना है कि सिंचाई के साधन के लिए नहरें तो हैं, लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता है। मुख्य नहर और वितरक नहरों में ऊंचाई का अंतर होने के कारण अनेक किसानों के खेतों में पानी नहीं पहुंच पाता है। हरिशंकर बघेल, ताराचंद जामुंपाने, प्रतीक डहरवाल चिखला का कहना है कि क्षेत्र में सड़कों का निर्माण हुआ है। लेकिन बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य की सुविधाएं अभी ग्रामीणों को पर्याप्त नहीं मिल पा रही है। अस्पतालों में डॉक्टर नहीं रहते। गर्मी के दिनों में भू-जल स्तर गिरने से जलस्रोत सूख जाते हैं। कभी बिजली गुल रहती है तो कभी लो-वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। चुनाव आने के पूर्व जनप्रतिनिधियों द्वारा लोक लुभावने वादे किए जाते हैं, लेकिन उसे पूरा नहीं किया जाता है।
फैक्ट फाइल
कुल मतदाता-188९३२
पुरुष मतदाता-९५००५
महिला मतदाता-९३९२७
थर्ड जेंडर मतदाता-०
कुल बूथ-२४८
कुल प्रत्याशी-१८
-भाजपा और कांग्रेस में मुकाबला
१५ साल में ये रहे विधायक
वर्ष २००३ में- केडी देशमुख (भाजपा)
वर्ष २००८ में- विश्वेश्वर भगत (कांग्रेस)
वर्ष २०१३ में- केडी देशमुख (भाजपा)
जातिगत वोट बैंक
पंवार ५६६७९, लोधी २२६७१, मरार २८३३९, एससी २०७८२, गोवारी १८८९३, शेष में ४१५६५
कमजोरी और ताकत
केडी देशमुख (भाजपा प्रत्याशी)
ताकत-वर्तमान विधायक। पार्टी में एकजुटता। मिलनसार। लोगों से सतत संपर्क में रहना। प्रदेश सरकार की योजनाओं का क्रियान्वयन।
कमजोरी-समस्याओं का निराकरण नहीं होने से जनता में आक्रोश। किसान वर्ग की नाराजगी। उद्योग धंधों की स्थापना नहीं कर पाना।
टामलाल सहारे (कांग्रेस प्रत्याशी)
ताकत- पार्टी में एकजुटता। जनता का समर्थन। पूर्व विधायक।
कमजोरी-जनता से संवादहीनता। लगातार सक्रिय नहीं रहना। लगातार विपक्ष में रहना।
इनका कहना है
केन्द्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन, विकास कार्यों को लेकर चुनावी मैदान में है। जनता इस बार अपना आशीर्वाद अवश्य देगी।
-केडी देशमुख, भाजपा प्रत्याशी
बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, किसानों की समस्या सहित अन्य मुद्दों को लेकर चुनावी मैदान में है। क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं है।
-टामलाल सहारे, कांग्रेस प्रत्याशी

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