पक्के आवास की चाह में बिके जेवर, बन रहे कर्जदार

पीएम आवास के हितग्राहियों की व्यथा-
स्वयं का मकान तोड़ किराए के मकान में कर रहे गुजारा
ढाई लाख की राशि में पूर्ण नहीं हो रहे पीएम आवास
३० से ४० प्रतिशत बढ़े निर्माण सामग्रियों के दाम
ढाई लाख की राशि को बढ़ाए जाने की कि जा रही मांग

बालाघाट. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के आवास की चाह में घर के जेवर तो बिके ही साथ ही कर्जदार भी हो गए हैं। इतना सब करने के बावजूद अभी भी मकान में कुछ कार्य शेष ही है। महंगाई के इस दौर में ढाई लाख से परिवार के लिए पक्का मकान बना पाना संभव नहीं है। सरकार को भी इस विषय में सोचना चाहिए। यह कहना प्रधानमंत्री आवास योजना के उन हिग्राहियों का है, जिन्हें योजना के तहत किस्तों में ढाई रूपए मिल चुके हैं। लेकिन इसके बावजूद उनके आवास पूर्ण नहीं हो पाए हैं। इन हितग्राहियों का कहना है कि पक्के आवास की चाह में उन्होंने उनके पुर्खो का हवादार व होलसोल कच्चा मकान ढहा दिया और अब डिब्बेनुमा छोटे से आवास में जीवन यापन करना पड़ रहा है।
दरअसल हितग्राहियों को पक्का मकान बनाने में योजना के तहत स्वीकृत ढाई लाख की राशि नाकाफी लग रही है। हालाकि ढाई लाख की यह राशि सरकार द्वारा २७० से ३०० स्क्वेयर फिट में भवन निर्माण किए जाने स्वीकृत की जा रही है। लेकिन योजना से संबंधित मापदंडों की जानकारी के अभाव में हितग्राही अपना पूरा की पूरा कच्चा मकान ढहा रहे हैं। इसके बाद उनके कच्चे मकान के पूरे क्षेत्रफल में मकान बनाना महंगा पड़ रहा है। शहर की नगरपालिका क्षेत्र के अंतर्गत प्रथम बार में स्वीकृत ६७८ व २४४ कुल ९२२ मकान सभी निर्धारित क्षेत्रफल से अधिक में निर्माण किए गए हैं। परिणाम स्वरूप जेवर बेचकर व कर्जा लेने के बावजूद इन सभी मकानों में कुछ न कुछ कार्य शेष रह गया है। अब हितग्राही राशि बढ़ाए जाने की मांग कर रहे हैं।
पक्के मकान ने बनाया कर्जदार
आवास योजना के हितग्राही भटेरा रोड निवासी राजकुमार यादव ने बताया कि सज्जा हाईट तक मकान निर्माण करने उन्हें योजना के तहत दो किस्तों में एक लाख की राशि मिली है। लेकिन इतने निर्माण में ही उनके करीब एक लाख ७५ हजार रुपए की राशि खर्च हो चुकी है। इसके लिए उन्होंने समूह के माध्यम से कर्जा लिया है। अब तीसरे किस्त के इंतजार में काम रूका हुआ है, इस दौरान निर्माण सामग्रियों के मूल्यों में बढ़ोत्तरी हो गई है अब ढाई लाख में उनका मकान पूर्ण नहीं हो पाएगा।
तीसरी किस्त का इंतजार
इधर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शहर के ३३ वार्डो में प्रथम बार में ६७८ फिर २४४ कुल ९२२ मकान स्वीकृत किए गए हैं। जिन्हें सभी चार किस्तों का भुगतान किया जा चुका है। वहीं अगले वर्षो में स्वीकृत १२ सौ व फिर ६४० हितग्राहियों को दो किस्तें ही प्रदान की गई है। तीसरी किस्त के लिए करीब पांच माह से अधिक का समय होने लगा है, लेकिन तीसरी किस्त का भुगतान नहीं किया गया है। इस दौरान निर्माण सामग्रियों के दाम बढऩे से मकान की लागत भी बढ़ती जा रही है।
छह माह में दोगुनी हुई निर्माण सामग्री
गायखुरी निवासी हितग्राही नरेश दौने व दुलीराम उरकुड़े ने बताया समय के साथ भवन निर्माण सामग्रियों के दामों में भी नित्य इजाफा हो रहा है। पहले जब इन्होंने निर्माण कार्य शुरू किया था उस समय ८०० से १००० रुपए ट्राली के हिसाब से रेत व ४८ सौ रुपए ट्राली के हिसाब से ईंट मुहैया हो गई थी। लेकिन छह माह बाद अब उसी रेत का मूल्य १२०० से १५ सौ व ईंट का मूल्य ०७ हजार से ७२ सौ रुपए ट्राली हो गया है। इसके अलावा लोहा, सीमेंट व अन्य मटेरियल के दाम भी बढ़ गए हैं।
राशि बढ़ाए जाने की मांग
हितग्राहियों के अनुसार सरकार किस्तों के भुगतान में स्वयं देरी कर रही है। इस कारण घर बनाने का उनका बजट बिगड़ता जा रहा है। सरकार को या तो निर्माण सामग्रियों के बढ़ते मूल्यों पर रोक लगानी चाहिए या फिर योजना के तहत स्वीकृत ढाई लाश की राशि को बढ़ाया जाना चाहिए। नहीं तो सरकार की गरीबों को फायदा पहुंचाने वाली अतिमहत्वकांक्षी योजना हितग्राहियों के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनकर रह जाएगी।
वर्सन
निर्माण सामग्री के मूल्यों में नियंत्रण व योजना की राशि बढ़ाए जाने संबंधित अधिकारी शासन के पास ही है। हितग्राही निर्धारित मापदंडों व क्षेत्रफल में निर्माण करें तो ढाई लाख में मकान बन सकता है। हितग्राही मकान को स्वयं के हिसाब से सुसज्जित करने के फेर में खर्चा कर रहे हैं। योजना के तहत तीसरी किस्त भी आवंटित होते ही हितग्राहियों के खातों में भुगतान की जाएगी।
सूर्यप्रकाश उके, आवास योजना प्रभारी शहरी

mukesh yadav Reporting
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