पहले दी जमीन, अब भूखे रहकर मांग रहे नौकरी

कटंगी-तिरोड़ी रेल परियोजना भूमि अधिग्रहण का मामला

By: Bhaneshwar sakure

Published: 13 Jan 2021, 11:21 AM IST

बालाघाट/कटंगी. अच्छा मुआवजा मिलेगा और साथ में नौकरी भी मिलेगी। क्षेत्र को नई रेल की सौगात भी मिलेगी। इसी उम्मीद के साथ अपनी खेती की जमीन रेलवे को बेझिझक प्रदान करने वाले किसान परिवारों के बेरोजगार युवा अब रेल विभाग में नौकरी नहीं मिलने की वजह से परेशान है। इन युवाओं की उम्र बढ़ती जा रही है और रोजी-रोटी का संकट भी मंडरा रहा है। मगर, अफसोस और चिंता की बात तो यह है कि इन बेरोजगार युवाओं की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है। इन बेरोजगार युवा रेलवे की तय शर्त के मुताबिक नौकरी के लिए बीते 3 सालों में सांसद, विधायक, डीआरएम, जीएम और रेलवे के कार्यालयों में आवेदन ले-लेकर चक्कर काट कर अब थक चुके है। अब आंदोलन, भूख-हड़ताल को नौकरी की राह मान रहे है। अब आप अपने घर में बैठकर कल्पना कीजिए कि जिस किसान ने अपने बच्चे का भविष्य संवारने के लिए रेलवे को अपनी जमीन दे दी। वहीं रेलवे आज किसान और उसके पूरे परिवार को ठंड में भूख-हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर कर चुका है। हालांकि, युवाओं ने अब ठान रखा है कि जब तक रेलवे नौकरी नहीं देता भूख हड़ताल जारी रहेगी। मंगलवार को आलोक चौधरी, अंशुल ठाकरे, कमल राहंगडाले कटंगी में बायपास के पास भूख हड़ताल की शुरूआत की। जिन्हें सभी प्रभावित किसानों और उनके परिजनों सहित बेरोजगार युवाओं ने समर्थन दिया है।
दरअसल, पूरा मामला कटंगी-तिरोड़ी रेल परियोजना भू-अर्जन से जुड़ा हुआ है। रेलवे ने इस परियोजना के लिए वर्ष 2015 में 214 किसानों से भूमि अधिग्रहित की थी। भूमि अधिग्रहण के बाद सभी किसानों को मुआवजा प्रदान किया जा चुका है। मगर, रेलवे ने भू-अर्जन के नियमानुसार प्रभावित किसान के परिवार के एक सदस्य को नौकरी नहीं दी है। जानकारी के मुताबिक कटंगी-तिरोड़ी रेल परियोजना के लिए जिन किसानों की भूमि अर्जन की गई उनमें से 163 किसान परिवारों के सदस्यों ने रेलवे में नौकरी के लिए आवेदन किया था। जिसमें रेलवे 42 लोगों को रेलवे नौकरी दे चुका है लेकिन शेष 121 आवेदकों को लगातार रेल अधिकारी गुमराह कर भ्रामक जानकारी दे रहे है। जिससे युवाओं में आक्रोश पनप रहा है तथा संतोषजनक जवाब नहीं मिलने की वजह से अब युवा नौकरी नहीं मिलने तक भूख-हड़ताल पर बैठ चुके है। गौरतलब हो कि इसके पूर्व भी इन बेरोजगार युवकों ने अक्टूबर 2020 में तिरोड़ी में शांतिप्रिय धरना प्रदर्शन शुरू किया था जिसके बाद रेल अधिकारियों ने संज्ञान लेते हुए लिखित में शीघ्र ही नौकरी की कार्रवाई शुरू करने का आश्वासन देकर धरना प्रदर्शन समाप्त करवाया था। लेकिन आज तक रेल प्रशासन ने युवाओं को नौकरी देने के लिए कोई ठोस कागजी कार्रवाई नहीं की है। 163 आवेदकों ने साल 2016 में पहली बार नौकरी के लिए आवेदन किया। आवेदन करने के बाद युवक नौकरी का इंतजार करने लगे। रेलवे ने इन आवेदकों को नौकरी प्रदान करने की पूरी कागजी कार्रवाई और सत्यापन प्रक्रिया में 2 साल का समय गुजार दिया। इस 2 साल में दर्जनों बार आवेदकों को नागपुर कार्यालय बुलाया गया और जब नौकरी देने की बारी आई तो अप्रैल 2019 में महज 42 लोगों को नौकरी प्रदान की गई। बाकि के आवेदकों को पहले वैश्विक माहमारी कोरोना का लिखित बहाना और अब भू-अर्जन अधिनियम 2013 के नियम कायदे-कानूनों का मौखिक रुप से हवाला दिया जा रहा है।

Bhaneshwar sakure Bureau Incharge
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