लाइनमेन ने दिनदहाड़े बिजली के खम्बो को जेसीबी मशीन से खुदवाया


विद्युत पोल गायब होने से ग्रामींणों में आक्रोश
अब झूलते नजर आ रहे बिजली तार, वन्य प्राणियों की जान पर मंढरा रहा खतरा

By: mukesh yadav

Published: 12 May 2021, 07:39 PM IST


बालाघाट। इन दिनों आंधी तूफान का दौर चल रहा है। तूफान से कई विद्युत पोल व तार क्षतिग्रस्त होकर टूट जाते हैं और विद्युत प्रवाह अवरुद्ध हो जाता है। इस समस्या से निपटने बिजली विभाग कमजोर व क्षतिग्रस्त बिजली पोलो को उखाड़कर नए पोल लगाने की कार्रवाई की जा रही है। लेकिन तहसील परसवाड़ा अन्तर्गत ग्राम ढिपुर के ग्रामींणों ने विद्युत विभाग में कार्यरत लाइनमेन ओम गौर के द्वारा क्षतिग्रस्त बिजली के खम्बो को उखाड़कर अन्यत्र जगह ले जाने पर नाराजगी जताई है। ग्रामींणों का आरोप है कि लाइनमेन आदिवासी ग्रामों में लगे बिजली के पोल को उखाड़कर परसवाड़ा की प्राइवेट कॉलोनी में लगा रहे हैं। ग्रामींणों में भारी आक्रोश है। ग्रामींणों की मांग है कि लाइनमेन पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। वही ग्रामींणों ने इस संदर्भ में विभाग के उच्चाधिकारियों को भी शिकायत की है। लेकिन अब तक कोई कार्रवाई का ना होना, विभाग की दोहरी कार्यप्रणाली को दर्शाता है, ऐसा ग्रामींणों का मानना है।
ग्रामींणों ने बताया कि लाइनमेन ओम गौर परसवाड़ा के ग्राम बघोली में कार्यरत है। जिनके द्वारा ग्राम ढीपुर में लगे करीब 5 बिजली के पोल से बिजली के तार निकाले गए साथ ही जेसीबी मशीन की सहायता से खंबो को उखाड़कर उन्हें ट्रेक्टर में भरकर अन्यत्र स्थान ले जाया गया। ग्रामींणों के अनुसार जिस जगह पोल निकाले गए हैं, वहां की बिजली तार अब नीचे झूल रही है। जिससे चरवाही करने गए पालतू मवेशियों सहित वन्य प्राणियों की जान पर भी खतरा मंढराने लगा है। आक्रोशित ग्रामींणों ने लाइनमेन पर त्वरित कार्रवाई किए जाने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि विभाग के द्वारा उक्त लाइनमेन पर कार्रवाई नहीं की जाती, तो ग्रामींण जल्द उग्र आंदोलन करने पर मजबूर होंगें।
ग्रामींणों का मानना है कि उक्त लाइनमेन ओम गौर राजनीतिक रशुखदार भी है। जिसके द्वारा उक्त बिजली के पोल निकालकर अपने पदीय दायित्वों का दुरुपयोग किया गया है और खम्बों को परसवाड़ा लाकर उस निजी कालोनी में लगा दिया है। ग्रामींणों ने लाईनमेन पर मकान मालिक से सांठगांठ करने के भी आरोप लगाए हंै।
ग्रामींणों का कहना है कि शिकायतों के बावजूद विभागीय अधिकारीयों द्वारा लाइनमेन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया जाना लाइनमेन को बतौर संरक्षण प्रदान करना साबित हो रहा है। जिससे लाइनमेन के द्वारा न केवल अपने पदीय कर्तव्यों के प्रति उदासीनता बरती जाती है, बल्कि आदिवासी बाहुल्य इस परसवाड़ा क्षेत्र में निवासरत आदिवासियों को ठगने का काम किया जा रहा है।
वर्सन
उक्त जानकारी गलत व आरोप निराधार है। दरअसल, ग्रामींण क्षेत्रों में आंधी तूफान से पोल टूटने व गिरने से विद्युत कटौती की जानकारियां आती है। इसलिए कमजोर हो चुके विद्युत पोलों को उखाड़ा जा रहा है, ताकि नए पोल लगाए जा सकें और विद्युत प्रवाह अवरुद्ध ना हो।
राकेश सोनपुरी, जेई बैहर

mukesh yadav Reporting
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