घर-घर विराजेंगी आज भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा

Mukesh Yadav | Updated: 22 Aug 2019, 09:20:03 PM (IST) Balaghat, Balaghat, Madhya Pradesh, India

प्राचीन श्री कृष्ण मंदिर में आर्कषक सजावट

बालाघाट. जन्माष्टमी पर्व मुख्यालय सहित ग्रामीण अंचलों में २३ अगस्त को बड़े ही धूमधाम से हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा स्थापित करने श्रद्धालुओं द्वारा घर-घर में तैयारियां की गई। नगर मुख्यालय स्थित प्राचीन श्री कृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी पर्व मनाने आर्कषक सजावट की गई है।
गौरतलब हो कि ***** धर्म में जन्माष्टमी का पर्व बहुत ही महत्वपूर्ण है। इस पर्व को लेकर गुरूवार को बाजार में भी पूजन सामग्री की दुकानें सजी रही। मूर्तिकार भी भगवान कृष्ण की प्रतिमा को अंतिम रूप देने में लगे हंै। बाजारों में भी भगवान कृष्ण की प्रतिमाएं विक्रय के लिए रखी गई थी। भगवान श्रीकृष्ण को धरती पर भगवान विष्णु का आठवां अवतार माना गया है। पुराणों के अनुसार भगवान कृष्ण का जन्म श्रावण मास की अष्टमी पर रात्रि १२ बजे रोहणी नक्षत्र में हुआ था। इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टी को लेकर दो तिथियां सामने आ रही है। इस कारण श्रद्धालुगण असमंजस में है। इस संबंध में नवेगांव निवासी ज्योतिषाचार्य व पंडित राजेश दुबे ने बताया कि भगवान कृष्ण का जन्म रोहणी नक्षत्र में रात्रि के समय हुआ था। इस बार यह रोहणी नक्षत्र २३ अगस्त की रात्रि में शुरू हो रहा है, जो कि २४ अगस्त की सुबह तक रहेगा। वहीं कृष्ण का जन्म रात्रि में हुआ था। इस कारण २३ अगस्त को ही सही जन्माष्टमी का समय माना जा रहा है।
जन्माष्टमी का महत्व
इस पर्व के बारे में किंवदती है कि मथुरा में कंश नाम के राजा का भारी आतंक था। कंश की छोटी बहन का नाम राजकुमारी देवकी था। कंश ने अपनी बहन का विवाह वासुदेव के साथ करा दिया। लेकिन आकाश से भविष्यवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र कंश की मौत का कारण बनेगा। यह सुनने के बाद कंश ने अपनी बहन व वासुदेव को बंदी बनाकर कारागार में डाल दिया। कंश ने देवकी की ६ संतान तक को मार डाला। लेकिन उनकी ७ वीं संतान को बताया गया कि गर्भपात हो गया और उसे रहस्यमय ढंग से वृन्दावन की राजकुमारी रोहिणी के गर्भ में स्थानांतरित कर दिया गया। जिनका जन्म कृष्ण के बड़े भाई बलराम के रूप में हुआ। इसके बाद ८ वीं संतान के रूप में कृष्ण का जन्म हुआ। भगवान कृष्ण का जन्म होते ही वासुदेव ने काली अंधयारी रात में टोकरी में रखकर जमुना पार कर नंद व यशोदा के पास वृन्दावन ले गए। वहां से एक बच्ची लेकर आए जिसका भी जन्म उसी रात हुआ था। राजा कंश को बताया गया कि देवकी ने एक बच्ची को जन्म दिया है। कंश ने इस बच्ची को मारने की कोशिश की तो वह आसमान में उड़ गई और कंश को उसकी मौत की चेतावनी दी। कृष्ण ने इसके बाद बड़ा होकर अपने दुष्ट मामा कंश का वध किया।

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