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बालाघाट

Strange And Wonderful-35 वर्ष की उम्र में दसवें बच्चे को दिया जन्म

जिले की एक बैगा आदिवासी महिला ने 35 वर्ष की उम्र में दसवें बच्चे को जन्म दिया। वह 13 वर्ष की उम्र में पहली बार मां बनी। फिलहाल, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य है। बालाघाट. जिले की एक बैगा आदिवासी महिला ने 35 वर्ष की उम्र में दसवें बच्चे को जन्म दिया। वह 13 वर्ष की उम्र […]

बालाघाटJul 10, 2024 / 09:53 pm

Bhaneshwar sakure

दसवें बच्चे को दिया जन्म

अस्पताल में भर्ती प्रसूता, पास खड़ी बेटी।

जिले की एक बैगा आदिवासी महिला ने 35 वर्ष की उम्र में दसवें बच्चे को जन्म दिया। वह 13 वर्ष की उम्र में पहली बार मां बनी। फिलहाल, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य है।

बालाघाट. जिले की एक बैगा आदिवासी महिला ने 35 वर्ष की उम्र में दसवें बच्चे को जन्म दिया। वह 13 वर्ष की उम्र में पहली बार मां बनी। फिलहाल, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य है। प्रसूता बालाघाट जिले के बैहर तहसील के ग्राम मोहगांव की निवासी है।
आशा कार्यकर्ता रेखा कटरे ने बताया कि प्रसूता जुगतीबाई पति अकलुसिंह मरावी (35) निवासी वार्ड क्रमांक 1 मोहगांव को प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिरसा में भर्ती कराया गया था। जहां बच्चे का हाथ गर्भ से बाहर गया था। जिसके कारण उसे सीजेरियन प्रसव के लिए जिला चिकित्सालय रेफर किया गया। जिला चिकित्सालय में महिला रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना लिल्हारे ने ऑपरेशन से उसका प्रसव कराया। उसने एक बेटे को जन्म दिया है। यह उसका दसवां बेटा है।
7 बेटे, 3 बेटियों को महिला ने दिया जन्म
35 वर्षीय जुगतीबाई ने सबसे पहले एक बेटी को जन्म दिया। जो वर्तमान में 22 साल की है। जिसका विवाह हो गया है। इसके बाद एक बेटा 13 वर्ष, 9 वर्ष, बेटी 8 वर्ष, बेटा 6 वर्ष, 3 वर्ष और नवजात बेटा शामिल है। जबकि दूसरा, सातवें और आठवें बेटे की प्रसव के बाद दो से तीन माह में ही मौत हो गई।
ऑपरेशन के बगैर संभव नहीं था प्रसव
डॉ. अर्चना लिल्हारे ने बताया कि जब महिला को जिला चिकित्सालय लाया गया था, तब वह काफी क्रिटिकल स्थिति में थी। बच्चे का एक हाथ बाहर आ गया था। उसके पास प्रसव के अलावा कोई जानकारी नहीं थी। सोनोग्राफी रिपोर्ट भी नहीं थी। जिसकी हालत को देखते हुए उसका ऑपरेशन बहुत जरुरी हो गया था। यूटरेस निकालकर ऑपरेशन करना ही संभव था। ऑपरेशन के लिए सीएचएमओ डॉ मनोज पाण्डेय से कंसर्न लिया गया। इसके बाद ही ऑपरेशन किया गया। दसवां प्रसव था, तो ऑपरेशन भी काफी मुश्किल था। ऑपरेशन में अत्यधिक रक्तस्राव होने से महिला की जान का जोखिम हो सकता था। लेकिन ऑपरेशन के दौरान बगैर यूटरेस निकाले बेहतर ढंग से प्रसव करा दिया गया। महिला और बच्चा दोनों स्वस्थ्य है।
मेरे कार्यकाल का पहला मामला
सिविल सर्जन डॉ निलय जैन ने बताया कि वह जिला चिकित्सालय में 30 वर्षों से पदस्थ है। लेकिन अब तक किसी भी महिला का दसवां प्रसव का मामला प्रकाश में नहीं आया है। यह रेयर से रेयरेस्ट मामला है। यह अच्छा है कि मां-बेटे दोनों सुरक्षित है।

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