शहीदी सप्ताह मनाने नक्सलियों ने जंगलों में फेेंके पर्चे, बांधे बैनर

शहीदी सप्ताह मनाने नक्सलियों ने जंगलों में फेेंके पर्चे, बांधे बैनर

Bhaneshwar Sakure | Updated: 23 Jul 2019, 09:45:13 PM (IST) Balaghat, Balaghat, Madhya Pradesh, India

हाई अलर्ट पर जिला, सीमावर्ती क्षेत्रों में सर्चिंग तेज, ३ अगस्त तक चलते रहेगा सप्ताह, शहीदी सप्ताह को लेकर पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा

बालाघाट. नक्सलियों का शहीदी सप्ताह 28 जुलाई से शुरू होगा, जो ३ अगस्त तक चलेगा। लेकिन इसके पूर्व ही नक्सलियों ने इस शहीदी सप्ताह को मनाने के लिए जंगलों में बैनर, पोस्टर बंाधे हैं। वहीं पर्चे भी फेंके हैं। इन बैनर, पोस्टर और पर्चे के माध्यम से जहंा नक्सलियों ने सरकार की दमनकारी नीतियों का विरोध किया है। वहीं पुलिस के खिलाफ भी आक्रोश जाहिर किया है। इतना ही नहीं नक्सलियों ने मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों को श्रद्धाजंलि भी दी है। ग्रामीणों को नक्सलियों के साथ जुडऩे का आव्हान भी किया है। इधर, नक्सलियों के पर्चें फेंके जाने के बाद से जिले को हाईअलर्ट पर रखा गया है। सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। साथ ही जवानों को अलर्ट रहने कहा गया है।
जानकारी के अनुसार नक्सलियों ने डाबरी पुलिस चौकी अंतर्गत पित्तकोना और डाबर के जंगल में बैनर बांधे हैं। जंगलों में पर्चे फेंके है। साथ ही पोस्टर लगाकर ग्रामीणों को नक्सलियों का साथ देने का आव्हान भी किया है। पुलिस ने इन नक्सल सामग्रियों को जब्त भी कर लिया है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में बालाघाट पुलिस ने देवरबेली चौकी के पुजारीटोला में दो नक्सलियों को मार गिराया था। वहीं ८-१० नक्सली मौके से भाग गए। इस घटना के बाद से ही जिले में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सर्चिंग तेज की जा रही है। मुठभेड़ के बाद भागे हुए नक्सलियों की तलाश की जा रही है। इतना ही नहीं पुलिस ने नक्सलियों को शरण देने के मामले में तीन ग्रामीणों को भी गिरफ्तार किया है। इसके बाद से ही जिले में नक्सलियों की पकड़ और कमजोर हो गई है।
विदित हो कि प्रतिवर्ष नक्सलियों का शहीदी सप्ताह २८ जुलाई से शुरू होता है, जो ३ अगस्त तक चलते रहता है। नक्सलियों द्वारा यह शहीदी सप्ताह संगठन के मारे लोगों की याद में मनाया जाता है। माना जा रहा है कि पुलिस द्वारा लगातार नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है, जिसके चलते नक्सलियों की पकड़ न केवल ढीली हुई है। बल्कि उनकी संख्या में भी कमी आई है। इधर, वर्षा ऋतु के दौरान नक्सली किसी बड़ी घटना को अंजाम नहीं देते हैं। बल्कि जंगलों में शिविर कर नए सदस्यों को ट्रेनिंग देते हैं। लेकिन इस बार ऐसी स्थिति भी कम ही नजर आ रही है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में बढ़ाई सर्चिंग
इधर, नक्सलियों द्वारा फेंके गए पर्चे, बैनर, पोस्टर को जब्त करने के साथ ही जंगलों में सर्चिंग तेज कर दी गई है। खासतौर पर जिले की छग और महाराष्ट्र राज्य की सीमा से लगे क्षेत्रों में यह सर्चिंग तेज कर दी गई है। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में पुलिस दोनों ही राज्यों की नक्सल ऑपरेशन से जुड़ी पुलिस से आपसी समन्वय स्थापित कर सर्चिंग कर रही है। लगातार सर्चिंग होने के कारण नक्सलियों के होश उड़े हुए है। बताया जा रहा है कि पुलिस जहां गोपनीय रुप से नक्सली उन्मूलन के लिए कार्य कर रही है। वहीं नक्सली भी अपने कार्यों को बेहद गोपनीय ढंग से अंजाम दे रहे हैं।
नक्सलियों की बनी है मौजूदगी
जिले में भले ही पुलिस सुरक्षा बढ़ा दी गई है, लेकिन नक्सलियों की मौजूदगी बनी हुई है। लेकिन वे शांत है। किसी भी घटना को अंजाम नहीं दे पा रहे हैं। करीब दो दर्जन नक्सलियों ने बेहद गोपनीय ढंग से अपना ठिकाना बनाकर शरण लिए हुए है। माना जाता है कि बालाघाट जिला नक्सलियों के लिए सबसे सुरक्षित जगह है। इसी वजह से बारिश के दिनों में नक्सली बालाघाट जिले में पनाह ले लेते हैं।
इनका कहना है
नक्सलियों द्वारा फेंके गए बैनर, पोस्टर, पर्चों को जब्त कर लिया गया है। सुरक्षा बढ़ा दी गई है। पूरे जिले को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सीमावर्ती क्षेत्रों में लगातार सर्चिंग की जा रही है। जैसे-जैसे सूचना मिल रही है, वैसे-वैसे आगे की कार्रवाई की जा रही है।
-अभिषेक तिवारी, एसपी, बालाघाट

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