रहने का ठिकाना न भोजन की व्यवस्था न आने का साधन

कर्नाटक में फंसे आधा सैकड़ा से अधिक मजदूर, ऑनलाइन आवेदन करना भी नहीं आता, दूरभाष पर बता रहे हैं अपनी व्यथा, शासन-प्रशासन से लगा रहे हैं मदद की गुहार

By: Bhaneshwar sakure

Updated: 10 May 2020, 07:34 PM IST

बालाघाट. हम कर्नाटक में फंसे हुए हैं, खाने-पीने के लिए पैसे नहीं है। घर आना चाहते है लेकिन कोई साधन भी नहीं हैं। यहां अधिकारी भी हमें जाने के लिए कोई व्यवस्था नहीं बना रहे है और 11 सौ किमी पैदल चलने की हिम्मत हमारे साथ काम करने के लिए आई महिलाओं में नही है। यहां अधिकारी कहते है कि ऑनलाइन आवेदन करो तो अनुमति मिलेगी, तब घर जा सकते हैं। उसके लिए भी खुद का वाहन किराए से करना पड़ेगा। अनाज खरीदने के लिए पैसा नहीं है तो वाहन किराया कैसे करें। हम उतने पढ़े-लिखे भी नहीं है कि ऑनलाइन आवेदन कर सकें। यहां हमारी कोई मदद नहीं कर रहा है। हम बालाघाट जिले के कलेक्टर से दया की अपील करते है कि वह हमें हमारे घर तक वापस बुलवाने में हमारी मदद करें। यह अपील कर्नाटक से बालाघाट जिले के उन मजदूरों ने की है कि जिन्हें पढऩा-लिखना भी ठीक तरीके से नहीं आता और आर्थिक तंगी की वजह से कर्नाटक में नारकीय जीवन जीने को मजबूर हो चुके हैं।
कटंगी के अर्जुननाला निवासी टुण्डीलाल सोनवाने ने जो कर्नाटक में मजदूरी करने के लिए गए हुए है ने दूरभाष पर जानकारी देते हुए बताया कि बालाघाट जिले के 53 मजदूर वहां फंसे हुए है। जिसमें लोहमारा के 30, सेलवा के 4, अर्जुननाला के 3, चिकमारा के 2, लालबर्रा से 1, लेड़ेझरी से 1 और अन्य गांव के 10 मजदूर शामिल है। जिसमें 20 महिलाएं और 4 बच्चे भी शामिल है। यह सभी कर्नाटक के जिला बल्लारी तहसील हासपेट गांव तोरनगर में फंसे हुए है। यह घर आना चाहते हंै लेकिन शासन-प्रशासन से अब तक इन मजदूरों को कोई मदद मुहैया नहीं हो पाई है। अब यह इतने परेशान हो चुके हैं कि 12 मई को पैदल निकलने की तैयारी करने की हिम्मत जुटा रहे है। वहीं कर्नाटक से ही सेलवा और छतेरा के 23 मजदूर मदद नहीं मिलने पर मजबूरन 2 दिन पहले साइकिल से घर के लिए निकल चुके है। इन मजदूरों ने बताया कि कई बार कर्नाटक में अधिकारियों के पास मदद के लिए गुहार लगाई, लेकिन मदद नहीं मिली. कर्नाटक में फंसे मजदूरों ने जिला प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है। जिला प्रशासन अगर कर्नाटक में फंसे इन मजदूरों की घर आने में मदद कर सकता है तो वहां फंसे एक मजदूर के मोबाइल नंबर 9945627086 में संपर्क कर मदद कर सकते है।
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार और जिला प्रशासन अन्य राज्यों में पढऩे लिखने के लिए जाने वाले छात्र-छात्राओं को घर वापस लाने के लिए वाट्सअॅप नंबर जारी कर आवेदन करने के लिए कह रहा है। मगर, विडम्बना यह है कि अन्य राज्यों में फंसे निरक्षर मजदूरों को ऑनलाइन आवेदन के लिए कहा जा रहा है जो बेहद चिंतनीय विषय है। सरकार तथा जिला प्रशासन को मजदूरों के लिए भी इस तरह की सुविधा बनानी चाहिए ताकि वे भी आसान प्रक्रिया से घर लौट आए। ज्ञात रहे कि कटंगी क्षेत्र के अब भी करीब हजारों मजदूर अन्य राज्यों में फंसे हुए है जो घर वापस आना चाह रहे है कि लेकिन यातायात सुविधा के अभाव में फंसे हुए है जिनके पास अभी दो वक्त की रोटी का भी ठिकाना नहीं है। सड़क किनारे त्रिपाल डालकर दिन काट रहे है।

Bhaneshwar sakure Bureau Incharge
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