गर्मी में धान उत्पादन 'पानी बर्बाद कर रहा 'किसान

फसल चक्र नहीं अपना रहे किसान-
1 किलो चांवल उगाने में 3 हजार लीटर पानी का खर्च

By: mukesh yadav

Published: 07 Mar 2020, 04:08 PM IST

कटंगी। क्षेत्र में जलसंकट लगातार बढ़ते ही जा रहा है। गर्मी के मौसम में पेयजल की समस्या सभी के लिए चुनौती बन चुकी है। साल-दर-साल गिरता भू-जलस्तर गंभीर चिंता का विषय है। सरकार बीते कई सालों से गिरते भू-जलस्तर की समस्या से उभरने के लिए कई तहर के जन-जागरूक अभियान चला रही है, किसानों को भी कम पानी में खेती के गुर सिखाए जा रहे हैं। लेकिन इसके बावजूद कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आ रहे हैं। जनता व्यर्थ में पानी बहा रही है और किसान फसल चक्र का पालन ना कर मनमाना तरीके से खेती कर रहा है। जिससे कृषि भूमि की उत्पादन क्षमता तो धीरे-धीरे समाप्त हो ही रही है। वहीं फसलों की सिंचाई के लिए अनियंत्रित तरीके से खर्च किए जाने वाले पानी से जलस्तर कमजोर हो रहा है। मगर, इस बात की चिंता ना तो प्रशासन कर रहा है और ना ही जागरूक किसान लालची किसानों को फसल चक्र अपनाने के लिए जागरूक कर रहे हैं। खामियाजा पेयजल संकट के रुप में सभी को भुगतना पड़ रहा है। यहां क्षेत्र में गर्मी के दिनों में होने वाली धान की खेती में सबसे अधिक पानी की बर्बादी हो रही है। कृषि विभाग से जुड़े जानकार बताते हंै कि गर्मी में एक किलो चांवल उगाने में करीब 3 हजार लीटर पानी लगता है, जबकि 1 किलो गेहू के उत्पादन में 13 हजार लीटर ही पानी खर्च होता है। बहरहाल, गिरते भू-जलस्तर को लेकर अगर हम अभी नहीं संभले तो बहुत देर हो जाएगी।
क्षेत्र में खरीफ की फसल के रुप में धान का उत्पादन किया जाता है। जिसे सरकार किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीदी करती हैं। लेकिन ग्रामीण अंचल में कुछ लालची किसान गर्मी के मौसम में भी धान की फसल का उत्पादन करते हैं। इस साल भी बड़ी मात्रा में धान की खेती की गई है, जिन गांवों में इस वक्त धान की खेती जा चुकी है एवं धान की सिंचाई की जा रही है, उन सभी गांवों में जल संकट की स्थिति निर्मित होने लगी है।
दरअसल, धान की फसल में नमी बनाए रखने के लिए लालची किसान सिंचाई के लिए कूप एवं बोरवेल से पूरा दिन पानी निकालते हैं। इस कारण गांव के अन्य पेयजल स्रोतों पर प्रभाव पड़ता है। जलस्तर कमजोर होता है और गांव में पीने के पानी की दिक्कत होती हैं। जानकार बताते हंै कि अगर, इसी तरह बेमौसम फसलों का उत्पादन करने में पानी खर्च किया गया तथा जनता पानी की व्यर्थ पर विराम नहीं लगाती तो भविष्य में पानी के तमाम स्रोत सूख जाएंगे।
अधिकारी ने दी सलाह
वरिष्ट कृषि विकास अधिकारी एचसी डहेरिया बताते हंै कि किसानों को गर्मी के सीजन में साग-सब्जी, दलहन व अनाज की अन्य फसल लगाने की सलाह दी जाती है, उनके अनुसार गर्मी के दिनों में धान की खेती में 40 प्रतिशत से अधिक पानी की जरुरत पड़ती है एक भी दिन यदि खेत सूखा तो धान की फसल चौपट हो सकती है, इस कारण लगातार धान में पानी भरना पड़ता है। जबकि इस गर्मी के सीजन में साग-सब्जी, मक्का, दलहन जैसी फसलें ली जाती तो काफी कम पानी में ही बेहतर खेती की जा सकती है। किसानों को विभाग अन्य फसलों के प्रेरित भी करता है तथा सरकार की योजना अनुसार बीज का वितरण भी किया जाता है। खैर गर्मी में धान की बुआई कर पानी की बर्बादी की जा रही है। अत्यधिक पानी की खपत को देखते हुए भी शासन-प्रशासन धान की फसल लेने पर रोक नहीं लगा पा रहा है।

mukesh yadav Reporting
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