नदियों में पानी की जगह नजर आ रही रेत

नदियों में पानी की जगह नजर आ रही रेत

Bhaneshwar Sakure | Publish: Apr, 21 2019 08:52:03 PM (IST) | Updated: Apr, 21 2019 08:52:04 PM (IST) Balaghat, Balaghat, Madhya Pradesh, India

तेजी से गिरते भू-जल स्तर से नदियां भी सूखी, प्यास बुझाने गांवों की ओर आ रहे वन्य जीव, हैंडपंप भी उगल रहे हवा, ग्रामीण क्षेत्रों में गहरा रही पानी की समस्या

बालाघाट. नदियों में पानी की जगह रेत, हवा उगलते हैंडपंप, कुओं में नजर आती जमीन। जंगलों में सूखी नदियां, गांवों में गहराता पेयजल संकट। कुछ इस तरह की स्थिति अब बालाघाट जिले के ग्रामीण अंचलों में नजर आने लगी है। इधर, जंगलों में पानी की कमी के चलते अपनी प्यास बुझाने के लिए वन्य जीवों ने गांवों की ओर अपना रुख कर लिया है। वहीं ग्रामीणों को भी पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
दरअसल, गिरते भू-जल स्तर के कारण जिले में पेयजल की समस्या गहराने लगी है। यह समस्या परसवाड़ा, बैहर, बिरसा, लांजी, किरनापुर सहित अन्य सभी क्षेत्रों में बनी हुई है। खासतौर पर आदिवासी अंचल और पठार क्षेत्र में यह समस्या सर्वाधिक है। हालात ऐसे हैं कि ग्रामीणों को पानी के लिए परेशन होना पड़ रहा है।
जानकारी के अनुसार जिले के आधे से अधिक आबादी ग्रामीण अंचलों में निवास करती है। मौजूदा समय में अधिकांश गांवों में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया है। अप्रैल माह में ही ऐसे गांवों में तेजी से गिर रहे भू-जल स्तर के कारण पानी की समस्या ने विकराल रुप ले लिया है। जिले के पठार अंचल में सबसे अधिक समस्या बनी हुई है। वनग्रामों के हालात काफी खराब हो गए हैं। इन गांवों में बने हुए कुएं भू-जल स्तर गिरने के कारण पूरी तरह से सूख गए हैं।
इन क्षेत्रों में गहराने लगी पेयजल की समस्या
जिले के परसवाड़ा क्षेत्र के वन ग्राम कोथुरना, पोलबत्तुर, खारा, दक्षिण बैहर क्षेत्र के ग्राम चौरिया, ईक्को, धुनधुनवार्धा, लूद, हर्रानाला, बिठली, मोहगांव, पालागोंदी, पाथरी, नवी, चुक्काटोला, लातरी, लिमोटी, सोनगुड्डा, नवी, सायर, संदूका, कुर्रेझोड़ी, दुल्हापुर, मुरूम, राशिमेटा, कोसमबेहरा, बिलालकसा, जैतपुरी, छुहीडोडा, झकोरदा, चिलौरा, चितालखोली, नरपी, चिरकोना, टेमनी सहित अन्य गांवों में पेयजल की समस्या सबसे अधिक बनी हुई है। ये गांव सघन जंगलों के बीच बसे हुए हैं। पहाड़ी के किनारे बसे होने की वजह से यहां गर्मी के दिनों में भू-जल स्तर तेजी से गिर जाता है, जिसके कारण इन गांवों में पेयजल की समस्या गहराने लगती है। वहीं वन्य जीवों को भी अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। जिसकी वजह से वे गांवों की ओर आ रहे हैं।
नदी, नाले भी सूखे
अप्रैल माह से ही इन क्षेत्रों में नदी-नालों का जल स्तर गिर गया है। नदी-नाले पूरी तरह से सूख गए हैं। जब अप्रैल माह में ऐसी स्थिति है तो मई और जून माह में कैसी समस्या होगी, इसका अंदाजा सहर्ष लगाया जा सकता है। ग्रामीणों के पास पेयजल के अन्य स्रोत नहीं होने की वजह से उन्हें काफी परेशान होना पड़ता है।
नहीं हो पा रहा है जल संरक्षण
जल संरक्षण के प्रति लोगों में जागरुकता की कमी है। जिसके चलते वर्षा ऋतु का पानी व्यर्थ बह रहा है। जिसके कारण ग्रीष्म ऋतु में भू-जल स्तर में काफी गिरावट आने के साथ ही पानी की समस्या गहराने लगती है। पिछले वर्ष की भांति इस वर्ष भी जिले में पानी की कमी होने की मुख्य वजह अल्प वर्षा है। ग्रामीण अंचलों में पिछले कुछ वर्षों से पेड़ों की अंधाधुंध कटाई की गई है, जिसके कारण तापमान में भी वृद्धि हो रही है।

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