कंडम एंबुलेंस की रफ्तार हुई धीमी

मरीजों को लाते समय आधे रास्ते में ही हो जाती है बीमार

By: Bhaneshwar sakure

Published: 10 Mar 2019, 08:47 PM IST

बालाघाट/ लालबर्रा. आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाने के उद्देश्य से शासन द्वारा संजीवनी 108 एंबुलेंस की सेवाएं प्रारंभ की गई है, ताकि मरीजों व पीडि़तों का समय रहते उपचार हो सके। किंतु लालबर्रा विकासखंड में वर्ष 2013 से आई एकलौती 108 एम्बुलेंस अधिक दौडऩे के कारण स्वयं बीमार हो गई है।
जानकारी के अनुसार 60 से 65 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौडऩे वाली एंबुलेंस की रफ्तार धीमी हो चली है, जिसके चलते पायलट द्वारा एम्बुलेंस को मात्र 20-25 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलाना पड़ रहा है। पिछले 6 वर्षों से लगातार दिन-रात दौड़ रही एंबुलेंस लगभग 4 लाख किमी का सफर तय कर चुकी है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में अनावश्यक विलंब हो रहा है। एंबुलेंस चलाने के नियम की बात करे तो नियमानुसार नई एंबुलेंस को पांच साल या फिर ढाई लाख किलो मीटर तक चलाया जा सकता है। जिसका बकायदा प्रति माह दो मेंटेनेंस की जरूरत होती है, साथ ही उसके एक्यूपमेंट को भी बदला जाना है। बावजूद इसके वर्ष 2013 से संचालित संजीवनी 108 एंबुलेंस जो कि लगभग 4 लाख किमी तक चल चुकी है। इधर, नई एंबुलेंस के लिए अनेक बार प्रस्ताव तैयार किया गया है। लेकिन आज तक एंबुलेंस को बदला नहीं गया।
इनका कहना है
शासन के नए निर्देशानुसार सारे पुराने वाहनों को बदला जाना है। कंडम वाहनों की जानकारी लेकर शासन को अवगत करवा दिया जाएगा। चुंकि मामला आपके माध्यम से संज्ञान में लाया गया है तो जल्द ही लालबर्रा में नई एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी।
-महमूद खान, जोन अधिकारी, जबलपुर

Bhaneshwar sakure Bureau Incharge
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