मोहगांव मवेशी बाजार से हो रही तस्करी

मोहगांव मवेशी बाजार से हो रही तस्करी

Mukesh Yadav | Publish: Apr, 17 2019 01:12:35 PM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 01:12:36 PM (IST) Balaghat, Balaghat, Madhya Pradesh, India

ब्याज का धंधा, गौरक्षा के नाम पर हो रही वसूली

कटंगी। क्षेत्र के मोहगांव (नांदी) का साप्ताहिक मवेशी बाजार बीते कुछ सालों में गौवंश तस्करी का सबसे बड़ा अड्डा बन गया है। इस बाजार से हर सप्ताह करीब 100 से भी अधिक मवेशी पैदल रास्ते से महाराष्ट्र ले जा रहे है। वहीं महाराष्ट्र की सीमा लगते हुए ही बंद गाडिय़ों में भी गौवंशों को ठूसकर महाराष्ट्र तक ले जाया जा रहा है। मवेशियों की तस्करी का गोरखधंधा स्थानीय दलालों एवं कुछ लालची किसानों की मदद से होता है। वहीं इस अवैध तस्करी को रोकने और गौरक्षा की नाम पर कुछ संगठन अवैध वसूली भी कर रही है। इस अवैध तस्करी में जहां संगठनों पर आरोप लग रहे हंै वहीं पुलिस की भूमिका भी संदिग्ध है। सूत्रों की माने तो तिरोड़ी पुलिस के अदने कर्मचारी अवैध तस्करी करने वालों से वसूली करते है। इस कारण यह कारोबार फल-फूल रहा है। वहीं मोहगांव में खुलेआम हो रहे इस गोरखधंधे पर रोक लगाने की जरूरत प्रशासन नहीं समझ रहा है। पुलिस का कहना है कि गोवंशों की तस्करी होने की अधिकृत जानकारी नहीं है। यदि हो रही है, तो तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
प्राप्त जानकारी अनुसार मोहगांव में हर मंगलवार को मवेशी बाजार लगता है, जिसे अंचल का सबसे बड़ा बाजार माना जाता है। यहां कई गांवों व कस्बों के लोग व कोचिए मवेशियों की खरीदी-बिक्री करने आते है। कुछ साल पहले तक यहां महाराष्ट्र के कत्लखानों के दलाल भी खरीदी करने आते थे, पर हिन्दू संगठनों द्वारा उनकी गाडिय़ों की धरपकड़ कराए जाने के बाद उनका आना बंद हो गया। इसके बाद कुछ स्थानीय दलालों ने महाराष्ट्र के दलालों और कारोबारियों से सांठगांठ कर यह धंधा फिर शुरू कर दिया है। कुछ देहाती कोचियों ने बताया कि इन दलालों का नेटवर्क गांव-गांव तक फैला हुआ है। वह घर-घर घूमकर गांवों में गौवंशों की खरीदी करते हैं और हर हफ्ते इन्हें यहां के मवेशी बाजार तक लाते है। शाम तक बाजार खत्म हो जाता है, इसके पहले और बाद यहां के तस्कर अपना काम शुरू करते है। दोपहर से रात तक बाजार से गौवंशों को बंद गाडिय़ों में ठूंसकर या पैदल रास्ते से बोनकट्टा या फिर मोवाड़ की सीमा से महाराष्ट्र पहुंचाया जाता है। मोहगांव बाजार में तस्करों के साथ पंचायत की भी मिलीभगत है। पंचायत को भी अवैध तस्करी और ब्याज के धंधे की जानकारी है, लेकिन पंचायत अपनी काली कमाई के लिए चुपचाप बैठी है।
जानकारी के मुताबिक गौवंशों की तस्करी को लेकर पहले कई बार पुलिस ने कार्रवाई की है, लेकिन अब धीरे-धीरे सभी की आपस में मिलीभगत हो चुकी है। सड़क रास्ते में खतरा बताकर जंगल के रास्ते मवेशियों को महाराष्ट्र की सीमा में पहुंचाया जा रहा है या फिर रात के अंधेरे में गोवंशों को गाडिय़ों में भरकर बिना रोकटोक के ढोया जा रहा है। मवेशी तस्कर जंगल के रास्ते को यही सुरक्षित मानते है चुकि जंगल में कहीं कोई थाना भी कहीं नहीं पड़ता और अगर जंगल में कोई वनरक्षक रोक ले तो कुछ नकदी देकर मामले को जगह पर ही निपटा लिया जाता है, इसलिए जंगल के रास्ते तस्करों के लिए पूरी तरह सुरक्षित साबित हो रहे है।
वर्सन
आपके माध्यम से जानकारी मिल रही है। हम जांच करवाते है। इस मामले में यदि पुलिस कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध होगी तो वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से कार्रवाई करवाई जाएगी।
संतोष पंद्रे, टीआई तिरोड़ी

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