scriptSociety stopped hookah water for not getting shaved | मुंडन नही करवाने पर समाज ने किया हुक्का पानी बंद | Patrika News

मुंडन नही करवाने पर समाज ने किया हुक्का पानी बंद

अब बहिष्कृतों की जिंदगी बसर कर रहा परिवार
संबंध रखने वालों पर भी लगाया जा रहा जुर्माना
गांव के सब्जी, किराना व्यापारी नही देते सामान, दूसरे गांव जाकर करनी पड़ रही खरीददारी
आदिवासी अंचल बिरसा के परसाही गांव का मामला

बालाघाट

Published: July 18, 2021 11:50:18 am


बालाघाट. सामाजिक रीति रिवाजों के अनुसार मुंडन नहीं करवाया, तो समाज के दबंगों ने पूरे परिवार का समाज में हुक्का पानी बंद किए जाने का तुगलगी फरमान सुना दिया। मामला जिले के आदिवासी अंचल बिरसा जनपद क्षेत्र के परसाही से सामने आया है। यहां एक परिवार को पुरखो से चले आ रहे सामाजिक नियमों का पालन ना करने पर समाज से बहिष्कृत कर दिया गया है। अब पीडि़त परिवार ने पुलिस और मानवाधिकार आयोग से न्याय की गुहार लगाई है।
यह है पूरा मामला
जानकारी के अनुसार परसाही निवासी मुकुंदराम और दरबारीलाल के पिता गेंदलाल का 20 फरवरी 2021 को निधन हो गया है। अंतिम संस्कार भी सामाजिक रीति रिवाज से कर दिया गया। लेकिन अंतिम संस्कार के बाद सिर मुंडन की रस्म निभाने के समय मृतक के बेटों ने अटकलें ला दी। रिवाज के अनुसार मृतक के बेटों को पूरा सिर मुंडाना पड़ता है। लेकिन यह परिवार २०१५ से गायत्री परिवार से जुड़ा है। गायत्री परिवार के नियमों के अनुसार पूरा सिर नहीं मुंडवा सकते हैं। बेटों ने मुंडन के समय चोटी कटवाने से इंकार कर दिया। इस बीच पीडि़तों और सामाजिक लोगों के बीच बहस सी छिड़ गई। बहस इस बात की थी कि दोनों भाई सिर तो मुंडवा रहे थे, लेकिन चोटी (शिखा) नहीं मुंडवाना चाहते थे। ऐसे में समाज के कुछ लोगों ने उनके परिवार को समाज से बहिष्कृत कर उनका हुक्का पानी बंद करवाने का फरमान जारी कर दिया। तब से यह परिवार समाज से बृहिष्कृत करार देने का दंश झेल रहा है।
दूसरे गांव से क रहे खरीदारी
पीडि़त मुकुंदराम ने बताया कि उन्हें समाज के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाता और ना ही गांव में कोई किराना दुकान वाला सामान देता है। उन्हें दूसरे गांव जाकर घर की जरूरत का हर सामान लाना पड़ता है। इतना ही उनके पिता की तेरहवीं में शामिल हुए रजेलाल नामक रिश्तेदार पर भी 9500 रुपए का दंड लगाया गया। इसकी शिकायत पुलिस और मानवाधिकार आयोग से की गई है।
इस संबंध में आयोग मित्र फिरोजा खान ने बताया कि मामला काफी गंभीर है। मप्र मानव अधिकार आयोग भोपाल को भेज दिया गया है। इससे निपटने के लिए 1985 में एक कानून बना था। वहीं प्रदेश सरकार ने 2016 में समाज से बहिष्कृत निवारण कानून बनाया है, जिसके तहत पुलिस को कार्रवाई करना चाहिए।
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