बड़े तालाब का इस साल भी नहीं होगा गहरीकरण

बड़े तालाब का इस साल भी नहीं होगा गहरीकरण

Mukesh Yadav | Updated: 27 May 2019, 09:26:15 PM (IST) Balaghat, Balaghat, Madhya Pradesh, India

सरकारी कागजों में अटका काम-

कटंगी। शहर के बड़े तालाब का इस साल भी गहरीकरण होने की बिलकुल ही उम्मीद नहीं है। नगर परिषद ने इस तालाब के लिए स्वीकृत राशि को हासिल करने के लिए विभागीय कार्रवाई तो कर दी है, लेकिन पूरा मामला सरकारी कागजों में अटका हुआ है। मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्रीकांत पाटर ने बताया कि अभी राशि प्राप्त नहीं हो पाई है। राशि आने में अभी और वक्त लग सकता है। मतलब इससे एक बात तो स्पष्ट हो चुकी है कि इस साल भी तालाब के दिन नहीं फिरने वाले है। गौरतलब हो कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने तालाबों के गहरीकरण के लिए 2 करोड़ रुपए देने की घोषणा की थी। जिसकी प्रशासनिक स्वीकृति 8 माह पहले ही मिल चुकी है। मगर, चुनावी आचार संहिता सहित नपा द्वारा समय-सीमा में कार्रवाई नहीं करने की वजह से राशि का आंवटन नहीं मिल पाया है। फिलहाल कार्रवाई सरकारी कागजों में ही अटकी हुई है। इस राशि के नपा को आवंटित होने के बाद विभागीय कार्रवाई और टेंडर प्रक्रिया को पूरा एक साल का वक्त लग सकता है।
रेलवे ठेकेदार से नपा कर रही उम्मीद-
नगर परिषद कटंगी-तिरोड़ी रेल लाईन का निर्माण करने वाले ठेकेदार से तालाबों का मुफ्त में गहरीकरण की आश लगाए बैठी है। बताना जरूरी है कि रेल परियोजना के लिए ठेकेदार को मिट्टी की जरूरत है। ऐसे में नगर परिषद शहर के तालाबों की मिट्टी खनन करने के लिए ठेकेदार से अनुरोध कर रही है ताकि बारिश के पूर्व तालाबों से मिट्टी की कुछ परत निकाली जा सकंे तथा बरसात का पानी संग्रहित हो जाए। ठेकेदार ने निर्माण स्थल के नजदीक नट्टीटोला के तालाब से ही मिट्टी ली है। इसके बाद देवी तालाब से मिट्टी लेने की जानकारी मिल रही है। वहीं इन तालाबों से मिट्टी लेने के बाद मुंदीवाड़ा तालाब से मिट्टी निकालकर रेलवे ठेकेदार इसका उपयोग कर सकता है।
नहीं लगी लाइंटिग-
नगर परिषद पार्षद रहमान अंसारी ने मुंदीवाड़ा तालाब के साल 2012 में हुए सौन्दर्यीकरण काम पर गंभीर आरोप लगाए है। उन्होंने बताया कि स्वर्ण जंयती शहरी रोजगार योजनान्तर्गत 16 लाख रुपए की लागत से तालाब का सौन्दर्यीकरण का काम किया गया, लेकिन सौन्दर्यीकरण के नाम पर केवल टाइल्स एवं फेंसिंग लगाई गई। जबकि प्राक्कलन के मुताबिक तालाब के आस-पास लाईटिंग भी लगना था। उन्होंने बताया कि उनके द्वारा कई बार इस मामले की शिकायत की गई, लेकिन उनकी शिकायत पर किसी ने जांच नहीं की। इस कारण 7 साल बाद भी लाईटिंग का काम नहीं हो पाया है और ठेकेदार को पूर्ण भुगतान किया जा चुका है।

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