The effects of sand mining : जीवनदायिनी ही लील रही अन्नदात के खेत

बेजा रेत खनन के कारण किसानों के खेत नदी में विलय हो रहे है। साथ ही गिरने  भू-जल स्तर से परेशान हो रहे किसान। भले ही बावनथड़ी नदी से रेत खनन की स्वीकृत महाराष्ट्र सरकार ने दी हो, लेकिन खामियाजा मप्र के किसानों को उठाना पड़ रहा है।

By: mantosh singh

Published: 24 Jun 2016, 11:04 PM IST


बालाघाट. नदियों में हो रहे रेत के खनन से न केवल भूमि का कटाव बढ़ रहा है बल्कि भू-जल स्तर भी गिरने लगा है। दोनों ही समस्याओं ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें ला दी हैं। यह परेशानी किसी एक वर्ष की नहीं बल्कि प्रत्येक वर्ष की बनी हुई है। मामला दो राज्यों की सीमा में प्रवाहित होने वाली बावनथड़ी नदी में महाराष्ट्र सरकार द्वारा स्वीकृत आष्टी रेत घाट का है।
जानकारी के अनुसार बावनथड़ी नदी में महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा उन्हीं के क्षेत्र में आष्टी रेत घाट स्वीकृत किया है, लेकिन यहां रेत ठेकेदार द्वारा चिह्नित क्षेत्र के अलावा अन्य स्थानों से भी खनन का कार्य किया जा रहा है। भले ही यह खदान वैध हो, लेकिन उनके द्वारा सीमा क्षेत्र से बाहर किए जा रहा खनन का कार्य अवैध है। इसका सीधा असर किसानों की भूमि पर पड़ रहा है।
किसानों के अनुसार उनकी भूमि धीरे-धीरे कम होते जा रही है। दरअसल, रेत के खनन का कार्य नदी में पानी कम होने की स्थिति में किया जाता है, लेकिन जैसे ही वर्षा ऋतु प्रारम्भ होती है और जब नदी में पानी का लेवल अधिक होता है या फिर बाढ़ आती है, तब नदी के किनारे की कृषि भूमि का कटाव होने लगता है। प्रतिवर्ष धीरे-धीरे हो रहे भूमि कटाव से अब उनका रकबा भी कम होने लगा है।
विदित हो कि मप्र और महाराष्ट्र राज्य के सीमा में बहने वाली बावनथड़ी नदी पठार क्षेत्र व महाराष्ट्र राज्य के सीमावर्ती गावों के लिए जीवनदायिनी बनी हुई है। बेहतर फसल का उत्पादन लेने के लिए किसानों द्वारा नदी किनारों पर  अपनी भूमि पर विभिन्न प्रकार की फसलें लगाई जाती है, लेकिन शनै:-शनै: हो रही मिट्टी के कटाव ने किसानों को चिंतिंत कर दिया है।

जल स्तर पर भी प्रभावित

बावनथड़ी नदी में रोजाना हो रहे रेत के खनन का असर भू-जल स्तर पर भी पड़ा है। आलम यह है कि पानी का लेवल काफी नीचे चला गया है। किसानों के अनुसार पहले नदी का जल स्तर ग्राउंड लेवल पर था। जिसकी वजह से किसान नदी के पानी से ही सिंचाई कर लेता था। लेकिन खनन का कार्य अधिक होने पर वाटर लेवल काफी नीचे चले गया है।

नदीं में बनाए कुएं

इस वजह से उन्हें अब नदी में बनाए गए कुंए से सिंचाई करना पड़ रहा है। जिसके लिए उन्होंने कुंए में विद्युत मोटर व पाइप लाइन भी लगाई है। किसानों का कहना है कि इस स्थिति में यदि बाढ़ आ जाती है तो उनके उपकरण बह भी सकते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि नदी में बने कुंए की सतह से ही रेत खनन का अंदाजा लगाया जा सकता है। मौजूदा समय में कुंए के लिए डाले गए रिंग करीब 10-15 फीट उपर आ गए हैं।

इन किसानों की जमीन पर पड़ रहा प्रभाव

बावनथड़ी नदी में हो रहे रेत के खनन से ग्राम आंजनबिहरी में ही करीब 20 किसानों की जमीन भूमि कटाव के कारण प्रभावित हुई है। जिसमें से कुछ भूमि ढोरिया नाला और कुछ बावनथड़ी नदी में ही मिल गई। नदी में हो रहे भूमि कटाव से खत्म हो रही कृषि भूमि  के मामले में प्रशासन की ओर से किसानों को अभी तक मुआवजा भी नहीं दिया गया है। जिसका किसानों ने विरोध भी जताया है। जिसमें ग्राम आंजनबिहरी निवासी ज्ञानीराम मानेश्वर,  गिरधारी गाड़ेकर, रामजी गाड़ेकर, चोरटीन बाई मानेश्वर, शकुन बाई गाड़ेकर, रामचरण मानेश्वर, तारणबाई मानेश्वर, रामदास गाड़ेकर, विठोबा गाड़ेकर, कपूरचंद गाड़ेकर, कुमारीनबाई गाड़ेकर, कृष्णा मातरे,  हरिचंद मानेश्वर, जयकिशन मानेश्वर, रामलाल मानेश्वर,  शिवलाल मानेश्वर, लिखन मानेश्वर सहित अन्य किसान शामिल है। कृषक रामलाल गाड़ेकर के अनुसार उसकी करीब डेढ़ एकड़ कृषि भूमि नदी के कटाव के कारण नदी में विलय हो गई है।  

इनका कहना है

नदी में हो रहे रेत के खनन के कारण उनके किनारों में भूमि कटाव होने लगा है। जिसकी वजह से कृषि भूमि प्रभावित हो रही है। मेरी स्वयं की करीब डेढ़ एकड़ भूमि कटाव की वजह से नदी में विलय हो गई।
रामलाल गाड़ेकर, कृषक

नदी में हो रहे रेत खनन की वजह से भूमि का कटाव हो रहा है तो मौके पर पहुंचकर भौतिक सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। हालांकि, आष्टी रेत घाट महाराष्ट्र राज्य सरकार ने स्वीकृत किया है।
जेके सोलंकी, उपसंचालक खनिज विभाग
mantosh singh Editorial Incharge
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