scriptThe future of 52 students at stake | दांव पर लगा ५२ परीक्षार्थियों का भविष्य | Patrika News

दांव पर लगा ५२ परीक्षार्थियों का भविष्य

बिना जानकारी कैसे व कहां दें परीक्षा
वारासिवनी के एसएसपी कॉलेज का मामला
परीक्षार्थियों ने लगाए घोर लापरवाही के आरोप

बालाघाट

Published: April 04, 2022 09:20:14 pm

बालाघाट. पांच अप्रैल को परीक्षा और चार अप्रैल की देर शाम तक परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र नहीं मिल पाए हैं। अब परीक्षार्थी बिना परीक्षा केन्द्र की जानकारी के कहां और कैसे परीक्षा दें। मामला जिले के वारासिवनी तहसील स्थित शंकर साव पटेल महाविद्यालय का है। यहां के ५२ परीक्षार्थियों को प्रवेश पत्र नहीं मिलने के कारण उनका भविष्य अंधकार में नजर आ रहा है।
बताया गया कि इन विद्यार्थियों ने जिस समय बीए एवं बीएससी प्रथम एवं द्वितीय वर्ष की परीक्षाएं दी थी, उस दौरान एसएसपी कालेज की संबंधता रानी दुर्गावती विश्विद्यालय के साथ थी, लेकिन 2019 में इस कॉलेज की संबंधता राजा शंकरशाह कालेज छिंदवाड़ा हो गई। इसी दौरान इन सभी 52 विद्यार्थियों को तृतीय वर्ष की परीक्षा देने में किसी वजह से एक वर्ष का गेप हो गया। जब इस वर्ष फाइनल इयर की परीक्षा फार्म भरने का समय आया तो डिप्लोमा एक ही यूनिवर्सिटी से प्राप्त करने के फेर में इन सभी छात्रों ने रानी दुर्गावती विश्विद्यालय से ही फार्म भरना उचित समझा। परिणाम स्वरूप उन्हें पहले तो डेढ़ सौ किमी. दूर मंडला और नैनपुर में परीक्षा सेंटर होने की जानकारी दी गई। अब 5 अप्रैल से उनकी परीक्षा प्रारंभ हो रही हैं, तो समाचार लिखे जाने तक किसी भी परीक्षार्थी का प्रवेश पत्र नहीं पहुंचा हैं। जिससे ये सभी 52 परीक्षार्थी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
प्रबंधन ने नहीं किया मार्गदर्शन
इन 52 विद्यार्थियों के पालकों की माने तो इस स्थिति के लिए बहुत हद तक कालेज प्रबंधन जिम्मेदार हैं। जिन्होंने विद्यार्थियों को फार्म भरने के दौरान कोई मार्गदर्शन नहीं किया। जबकि यूनिवर्सिटी बदलने की वजह से प्रबंधन की जिम्मेदारी बनती थी कि वे दोनों यूनिवर्सिटी से सम्पूर्ण मार्गदर्शन प्राप्त कर उसी अनुसार विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करता, लेकिन यहां आपसी गुटबाजी में उलझे महाविद्यालय प्रबंधन ने इस ओर से पूरी तरह से लापरवाही बरती। अब जब प्रबंधन को 28 मार्च को ही पता चल गया था कि इन विद्यार्थियों का परीक्षा केंद्र मंडला जिले में हो रहा हैं, तो फिर उन्होंने आरडीवीवी से इन विद्यार्थियों का प्रवेश पत्र शीघ्र बुलवाने की व्यवस्था क्यों नहीं की। वहीं जब 4 अप्रैल को विद्यार्थी कॉलेज में प्रवेश पत्र को लेने पहुंचे, तब भी उन्हें थोड़ी देर में प्रवेश पत्र आने जैसे बात कहते हुए भ्रमित किए जाता रहा।
नेताओं भी नहीं हुई सुनवाई
जानकारी के अनुसार पूर्व में इन 52 छात्रों की समस्याओं को लेकर विधायक व खनिज विकास निगम अध्यक्ष प्रदीप जायसवाल द्वारा जबलपुर यूनिवर्सिटी के परीक्षा अधिकारी दीपेश मिश्रा से फोन पर बात कर तत्काल परीक्षार्थियों की समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए थे। वहीं एसडीएम संदीप सिंह एवं जनभागीदारी समिति सदस्य शैलेंद्र सेठी ने 29 मार्च को ही कुल सचिव को पत्र लिखकर परीक्षार्थियों की मुश्किलों को देखते हुए जिले में ही परीक्षा सेंटर दिए जाने और शीघ्र प्रवेश पत्र भेजने का अनुरोध किया था। लेकिन कॉलेज और युनिवर्सिटी प्रबंधन द्वारा किसी की कोई बात न सुनते हुए सभी की बातों का नकार दिया गया। जिसका खामियाजा अब विद्यार्थियों को अपना एक वर्ष खराब कर भुगतना पड़ सकता है। इस पूरे मामले में गलती किसकी है यह जिम्मेदारी तक तय नहीं हो सकी है।
इनका कहना है।
अभी तक हमारा प्रवेश पत्र नहीं आया हैं। हमें ये भी नहीं मालूम कि हमारा परीक्षा सेंटर कहां हैं। कालेज प्रबंधन ने हमें आज 10 बजे प्रवेश पत्र आ जाने की बात कही थी, अब तक हमें प्रवेश पत्र नहीं मिला हैं। पता नहीं हमारें भविष्य का क्या होगा।
परवीन कुरैशी, बीएससी फाइनल
दांव पर लगा ५२ परीक्षार्थियों का भविष्य
दांव पर लगा ५२ परीक्षार्थियों का भविष्य
सभी 52 विद्यार्थी एटीकेटी और पूर्व छात्र हैं। जिनके परीक्षा फार्म जबलपुर यूनिवर्सिटी से भरे गए हैं। हमने यूनिवर्सिटी बात की, उन्होंने जिले में सेंटर देने स्पष्ट रूप से मना कर दिया हैं और परीक्षा फीस वापस करने की बात कही हैं। हमने छिंदवाड़ा यूनिवर्सिटी से बात की हैं। लेकिन उनकी बातों से प्रतीत हो रहा हैं कि वे भी इसमें रुचि नहीं ले रहे हैं। यदि शाम तक कोई हल नही निकलता हैं। तो कल अपने प्रतिनिधि के साथ इन बच्चों को जबलपुर यूनिवर्सिटी भेजेंगे। ताकि वहां से कोई हल निकल सके।
प्रवीण श्रीवास्तव, प्राचार्य एसएसपी कॉलेज

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