न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे आदिवासी समुदाय

न्यायिक जांच रिपोर्ट पर आदिवासी समुदाय ने उठाया सवाल

By: Bhaneshwar sakure

Published: 17 Feb 2021, 11:07 PM IST

बालाघाट. गढ़ी थाना अंतर्गत बसपहरा के जंगल में हुई कथित पुलिस व नक्सली मुठभेड़ में मारे गए झामसिंह धुर्वे की मौत को लेकर कराई गई मजिस्ट्रीय जांच के बाद जांच रिपोर्ट से आदिवासी समुदाय संतुष्ट नहीं हैं। जिन्होंने अब मामले में न्यायालय के दरवाजा खटखटाने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आदिवासी समुदाय के प्रमुखों की एक बैठक भी आयोजित की गई। जो कि जिला मुख्यालय में रानी दुर्गावती भवन में आयोजित हुई। इस बैठक में मृतक झामसिंह धुर्वे के परिवार के सदस्यगण भी शामिल हुए।
इस दौरान आदिवासी समुदाय ने प्रशासन की ओर से मुठभेड़ की कराई गई न्यायिक जांच रिपोर्ट के प्रति असंतुष्टि जाहिर की और कहा कि झामसिंह की मौत में पुलिस को क्लीन चिट दी गई हैं। जो कि सही नहीं हैं। जांच रिपोर्ट में कहा गया हैं कि झामसिंह की मौत पुलिस की गोली से नहीं हुई हैं, जो सही नहीं हैं। विदित हो कि पुलिस व नक्सलियों के बीच मुठभेड़ का मामला गढ़ी थाना क्षेत्र के बसपहरा के जंगल में 6 सितम्बर 2020 को होना सामने आया था। जिसमें दूसरे दिन 7 सितम्बर को सर्चिंग के दौरान पुलिस ने एक अज्ञात व्यक्ति का शव बरामद किया गया था। जिसकी शिनाख्त झामसिंह धुर्वे निवासी बालसमुद थाना झलमल जिला कवर्धा के रूप में हुई थी। आदिवासी समुदाय सहित आदिवासी जनप्रतिनिधियों ने झामसिंह की मौत को पुलिस की गोली से होना और पुलिस पर नक्सलियों के नाम पर ग्रामीणों को मौत के घाट उतारे जाने का आरोप लगाया था। पुलिस ने झामसिंह के शव को छग सीमा के भीतर से उठाकर लाया और जिले की सीमा में रख दिया था। इस मामले की हाईकोर्ट के जज से जांच कराने व पीडि़त परिवार को नौकरी व मुआवजा देने की मांग की गई थी। वही इस मामले में जिला प्रशासन ने जिला दंडाधिकारी जांच के निर्देश जारी कर बैहर के अतिरिक्त कलेक्टर शिवगोविंद मरकाम को जिम्मेवारी सौंपी गई थी। एडीएम मरकाम ने निर्धारित 10 बिंदुओं पर झामसिंह धुर्वे की मौत को लेकर जांच की गई थी। इन 10 बिंदुओं के आधार पर हुई जांच में पाया गया कि उसकी मौत की मुख्य वजह पीएम रिपोर्ट में गन सूट आऊट से होना व अत्यधिक रक्त बहने, स्वसन तंत्र के अवरूद्ध होने, ऑक्सीजन की कमी, ब्रेन डेमेज से होना पाया गया हैं। इस जांच में यह स्पष्ट नहीं किया गया हैं कि झामसिंह की मौत पुलिस की गोली से हुई या नक्सलियों की गोली से हुई। यही वजह हैं कि झामसिंह की मौत में इस तरह से पुलिस को क्लीनचिट दिए जाने से आदिवासी समुदाय में नाराजगी हैं।

Bhaneshwar sakure Bureau Incharge
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