scriptTwo eyes and twelve hands in Varasivani subjail | वारासिवनी सबजेल में दो आंखे बारह हाथ- | Patrika News

वारासिवनी सबजेल में दो आंखे बारह हाथ-

जेलर के त्याग से प्रभावित होकर अपराधियों का हो रहा हृदय परिवर्तित
आदर्श नागरिक की तरह जीवन व्यतीत करने का संकल्प ले रहे दुर्दांत अपराधी

बालाघाट

Published: January 27, 2022 11:06:11 am


बालाघाट. सन् १९५७ में जेल पर फिल्माई गई दो आंखे बारह हाथ फिल्म की कहानी जिले के वारासिवनी सबजेल में चरितार्थ होती नजर आती है। वारासिवनी जेलर अभय वर्मा का किरदार भी फिल्म के मुख्य किरदार जेलर आदिनाथ से काफी मिलता जुलता है। हरदम कुछ अच्छा, अलग और अनोखा करने की चाह, उसके पीछे जेलर वर्मा द्वारा की जा रही मेहनत और त्याग से जेल का गण (बंदी) मजबूत होकर उनका हृदय परिवर्तन भी होने लगा है।
जेलर वर्मा की मेहनत और त्याग से प्रभावित होकर यहां हत्या जैसे संगीन अपराधों के आरोप में सजा काट रहे दुर्दांत अपराधी भी आदर्श नागरिक की तरह जीवन व्यतीत करने का संकल्प ले रहे हैं।
१० जून २०२० को प्रदेश की नरसिंहपुर जेल से स्थानांतरित होकर वारासिवनी आए जेलर अभय वर्मा के लिए यहां के ११९ बंदियों में अनुशासन और व्यवस्थाओं में सुधार लाना किसी चुनौति से कम नहीं था। जेलर वर्मा नियमित स्वास्थ्य शिविर, योगाभ्यास, धार्मिक आयोजन, सतसंग, मनोरंजन के लिए खेल विधाए, विधिक जागरूकता, कानूनी सहायता सहित अन्य प्रयास कर सबजेल को व्यवस्थित और बंदियों के कुत्सित विचारों को उनसे दूर करने प्रयास कर रहे हंै। अपने काम के प्रति लगन और इमानदारी के लिए जेलर वर्मा जिला स्तर से लेकर प्रदेश के मुखिया शिवराज सिंह चौहान तक से सम्मानीत हो चुके हैं।
अच्छी राह के अच्छे परिणाम
जेलर वर्मा के अनुसार अकेला पन और खाली दिमाग शैतानी हो जाता है। उन्होंने सबजेल परिसर में ही सब्जियों का बगीचा निर्मित किया। बंदियों को सब्जी उत्पादन की तकनीक बताकर उत्पादन करवाया जाता है। इससे बंदियों का अकेलापन दूर होने के साथ ही उनमें मेहनत करने की क्षमता विकसित होती है, रोजगार के गुर सीखने के साथ बंदियों के खाली समय का अच्छा उपयोग भी हो जाता है। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आए। इस बार बंदियों की मेहनत से साढ़े पांच क्विंटल से अधिक सब्जियों का उत्पादन हुआ, इससे प्राप्त हजारों रूपयों की राशि शासन के खाते में जमा करवाई गई।
गलत कामों से रोकती है अदृश्य बातें
वारासिवनी सबजेल के बंदियों के अनुसार उनके समक्ष कई बार ऐसी स्थिति आती हैं, जब वे सब भूलकर पहले जैसे बनने लगते हैं। तब उनके सामने जेलर वर्मा की अदृश्य बातें, मेहनत उन्हें हर बार गलतियां करने से रोकती हैं।
वीजन-
अपराध मुक्त हो समाज-
जेलर वर्मा के अनुसार कोई व्यक्ति गलत या अपराधी नहीं होता, बल्कि गलत संगती व विचार उसे गलत करने प्रेरित करते हैं। बंदियों की विचार धारा को बदलकर उनमें अच्छे आचार संस्कारित कर सुधारा जा सकता है। वे जेल में धार्मिक ग्रंथ, सफल व्यक्तियों की कहानी, बुराई से निकलकर अच्छे मार्ग में कैसे आगे बढ़े इस तरह की किताबें भी बंदियों को मुहैया करा रहे हैं, ताकि सुधार आए और समाज अपराध मुक्त हो सकें।
वारासिवनी सबजेल में दो आंखे बारह हाथ-
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