जननायक बिरसा मुंडा की जयंती पर हुए विविध आयोजन

आदिवासियों को अपने हक, अधिकारों के लिए आगे आकर संघर्ष करना होगा

बालाघाट. आदिवासी मूलनिवासी जननायक बिरसा मुंडा की 144 वीं जयंती कार्यक्रम मप्र आदिवासी विकास परिषद द्वारा गरिमामयी वातावरण में मनाया गया। जयंती कार्यक्रम में टीएल भोयर, जपं अध्यक्ष दुर्गा खोटेले, विधायक प्रतिनिधि बेनीराम खोटेले, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष युसूफ पटेल, जनपद उपाध्यक्ष हिम्मतलाल गढ़वंशी, जनपद सदस्य प्रतिनिधि मनीष भिमटे, वारा सोसायटी अध्यक्ष डॉ. लक्ष्मणसिंह कुर्राहे, भुवनसिंह कुर्राम जिलाध्यक्ष मप्र आदिवासी विकास परिषद, पीतमसिंह उईके जिला प्रवक्ता सहित अन्य बतौर अतिथि शामिल हुए।
इस अवसर पर वक्ताओं द्वारा आदिवासी बिरसा मुंडा द्वारा अपने आदिवासियों द्वारा जल, जमीन और जंगल के लिए किए गए संघर्षों को याद करते हुए सभी से शिक्षित बनने, संगठित रहकर संघर्ष करने प्रेरित किया गया। साथ ही अपने हक व अधिकारों के लिए आगे आकर सभी आदिवासियों से एकजुट होकर संघर्ष करने का आव्हान किया। वक्ताओं ने बताया कि बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 को रांची झारखंड़ में हुआ था। उनके पिता का नाम सुगना मुंडा व माता का नाम करमीबाई था। उनका बचपन नौनिहाल व मौसी के घर बीता। कुछ दिनों तक चाईबासा के जर्मन मिशन स्कूल में शिक्षा ग्रहण की। लेकिन स्कूलों में उनकी जो आदिवासी संस्कृति का उपहास किया जाता था वह बिरसा को सहन नहीं हुई। इस पर उन्होंने भी पादरियों का और उनके धर्म का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। जिससे उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया। बिरसा ने पुराने अंधविश्वास का खंडऩ किया वे लोगों को हिंसा और मादक पदार्थों से दूर रहने की सलाह दी। बताया गया कि उस समय भोलभाले आदिवासियों को अंग्रेजों व साहुकारों, जागीरदारों, सामंतों ने अधिक प्रताडि़त करने का कार्य किया। महज 25 वर्ष के अल्प जीवनकाल में बिरसा मुंडा ने आदिवासियों पर हो रहे अत्याचारों से लडऩे उस समय में भी आदिवासियों को अपने जल, जमीन और जंगल को बचाने एकजूट करने का कार्य किया। लेकिन कूटनीति वश उन्हें धोखे से फंसाकर जेल में डालकर वहां उन्हें भोजन में धीमा जहर दे देकर 9 जून 1900 को मार डाला गया। इस दौरान समाज के नन्हें-मुन्ने बच्चों द्वारा आदिवासी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गई।
इस अवसर पर आदिवासी विकास परिषद ब्लॉक किरनापुर संरक्षक आईएल नायक, अध्यक्ष किशोर मड़ावी, कार्यकारी अध्यक्ष मीना उईके, सचिव हरिराम मड़ावी, दुर्गाप्रसाद उईके, राजकुमार मड़ावी, पीएस परते, रूपलाल उईके, एसएल सोनवाने, अजय मर्सकोले, दशरथ उइके, महेश उइके सहित अन्य मौजूद थे।

Bhaneshwar sakure
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