हमने झेला दर्द अब सरकार की पारी

हमने झेला दर्द अब सरकार की पारी

Mukesh Yadav | Publish: Oct, 28 2018 04:32:08 PM (IST) | Updated: Oct, 28 2018 04:32:09 PM (IST) Balaghat, Balaghat, Madhya Pradesh, India

तिरोड़ी अस्पताल में नहीं चिकित्सक ग्रामीणों के सुर बगावती-

कटंगी/तिरोड़ी। क्षेत्र की मॉयल नगरी तिरोड़ी के प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सकों, कर्मचारियों और संसाधन की कमी अब सरकार और उनके विधायक उम्मीदवार पर भारी पड़ सकती है। दरअसल, अस्पताल में लंबे समय से चिकित्सक का पद रिक्त होने तथा ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिलने से उनमें आक्रोश पनप रहा है। ग्रामीणों के सुर काफी बगावती सुनाई दे रहे हैं। इन ग्रामीणों का यहां तक कहना है कि हमने खुब दर्द झेला है, अब सरकार की पारी है।
गौरतलब हो 10 हजार की आबादी वाले तिरोड़ी में करीब साढ़े 6 हजार से भी अधिक मतदाता है। जिनमें काफी गुस्सा भरा है। उनका कहना है कि सरकार और प्रशासन का कई बार ध्यानाकर्षण कराने के बावजूद तिरोड़ी अस्पताल में स्थाई चिकित्सक को नियुक्त नहीं की गई। इस कारण लोगों को उपचार नहीं मिल रहा है। उन्हें आर्थिक, शारीरिक तथा मानसिक रुप से परेशानियां झेलनी पड़ रही है।
ये ग्रामीण जता रहे विरोध
ग्राम पंचायत तिरोड़ी सरपंच आनंद बरमैया, महेंद्र सिंह चौहान, पंच आनंद नाग, पूर्व जनपद सदस्य प्रीतम वार्दे, पूर्व उपसरपंच ज्ञानीराम राहंगडाले, पूर्व उपसरपंच रूपेश पाण्डुरे, बीएम बोरकर, मोहनलाल डोंगरवार, संजय हरिनखेड़े, कुंजकिशोर पांडुरे, हेमन्त कौरे, नाशिम खान, राजू जैन, अनुराग कटौते, रेखा नेवारे, शीतल मेश्राम, प्रेमनारायण तिवारी, जीतू अहीर, राकेश भलावी, इंद्रकुमार पटले, राजेश नागवंशी जैसे गांव के सम्मानीयगण एवं जनप्रतिनिधि अस्पताल में चिकित्सक नहीं होने को लेकर विरोध जता रहे है। सूत्रों की माने तो ज्यों-ज्यों चुनाव की तारीख नजदीक आते जा रही है। तिरोड़ी में बैठकों को दौर तेजी से बढ़ गया है। ग्रामींण चिकित्सक, कर्मचारी को मुद्दा बना रहे हैं।
यह है केन्द्र की स्थिति
प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तिरोड़ी में डॉ केएस झोड़े पदस्थ्य है। लेकिन इसके अलावा उनके पास वारासिवनी का भी अतिरिक्त प्रभार है। डॉ झोड़े अपना अधिक समय वारासिवनी में ही सेवाएं देते हैं। ग्रामीणों का तो यह भी कहना है कि डॉक्टर ने बीते कई दिनों से अस्पताल में कदम तक नहीं रखा है। स्मरण रहे कि करीब 8-10 माह इसी अस्पताल में चिकित्सक नहीं होने की वजह से प्रसुति महिला ने गेट के सामने ही बच्चे का जन्म दिया था। ग्रामीणों ने तत्काल चिकित्सक पदस्थ करने की मांग थी। इसके बाद आनन फानन में डॉ झोडे को पदस्थ किया गया है।

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