जब सैया भय कोतवाल तो डर काहे का

जब सैया भय कोतवाल तो डर काहे का

Mukesh Yadav | Publish: Apr, 17 2019 01:02:49 PM (IST) Balaghat, Balaghat, Madhya Pradesh, India

मिरगपुर अस्पताल में दो दिन भी ड्यूटी में नहीं दिलचस्पी-
चिकित्सक गायब मरीज परेशान

कटंगी। विधानसभा क्षेत्र कटंगी के अंतर्गत आने वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मिरगपुर में मरीजों को उपचार नहीं मिल रहा है। इसकी सबसे बड़ी और प्रमुख वजह अस्पताल में चिकित्सक की कमी बताई जा रही है। जिसके चलते ग्रामीणों के द्वारा लगातार अस्पताल में चिकित्सक की नियुक्ति की मांग की जा रही थी। जिसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मोवाड़ में पदस्थ मेडिकल ऑफिसर प्रियंका नागवंशी की मिरगपुर अस्पताल में 2 दिन की ड्यूटी अनिवार्य की। यह दिन मंगलवार एवं शनिवार तय किए गए। लेकिन चिकित्सक इस 2 दिन की ड्यूटी को पूरी करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रही है। इस कारण हालत जस के तस ही बने हुए है। वहीं ग्रामीणों ने जो बताया वह काफी चौकानें वाला था। उन्होंने कहा कि '' जब सैया भय कोतवाल तो डर काहे काÓÓ यानि महिला चिकित्सक के पति खंड चिकित्सा अधिकारी है। ऐसे में मैडम पर किसी का अंकुश नहीं है। वह अपनी मर्जी की मालिक है। उनका अगर मन किया तो आएगी वरना कोई जरूरी भी नहीं।
उल्लेखनीय है कि मिरगपुर में 2 चिकित्सक एवं स्टाफ के करीब आधा दर्जन पद है। वर्तमान में केवल सुपरवाईजर एवं वार्ड बॉय ही पदस्थ है, जो पूरे अस्पताल को सप्ताह के सातों दिन संभालते हैं। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति अपनी बीमारी को लेकर अस्पताल पहुंच जाए तो यह कर्मचारी उन्हें दवा अस्पताल में मिलने वाली दवा देते है या फिर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र खैरलांजी जाकर इलाज कराने की सलाह देते हैं। ग्रामीणों की माने तो उपचार कराने के लिए उन्हें गांव के झोलाझाप पर आश्रित होना पड़ता है या फिर परेशानी को झेलते हुए खैरलंाजी मुख्यालय और जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। जो लोग आर्थिक रुप से सक्षम होते हैं। वह तुमसर और गोंदिया जाकर अपना उपचार करवाते हैं। ग्रामीणों ने जिला चिकित्सा अधिकारी का ध्यानाकर्षण कराते हुए लापरवाही बरतने वाली महिला चिकित्सक के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
बहरहाल, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सक नहीं होने के कारण मिरगपुर सहित आसपास के करीब आधा दर्जन गांवों के ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पा रही है। वहीं जिस महिला चिकित्सक को इस अस्पताल में दो दिन सेवाएं देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह भी मनमानी कर रही है। मंगलवार को जब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर ग्रामीण उपचार कराने के लिए पहुंचे तो काफी देर तक मरीज मायूस होकर लौट गए। ग्रामीणों ने बताया कि चिकित्सक के गायब रहने की शिकायत कई बार आला अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई असर नहीं पड़ता। चिंतनीय बात तो यह है कि जनप्रतिनिधि बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं एवं गांव का सर्वांगीण विकास का दावा करते हुए वोट मांगते है, लेकिन चुनाव जीतने के बाद कभी भी अपने दावों पर खरा नहीं उतरते। यहीं वजह है कि बीते 10-15 वर्षों में अस्पताल में लगातार पद घटे ही जा रही है. अधिकतर अस्पतालों में मरीजों को फार्मासिस्ट ही दवा बांट रहे हैं।
वर्सन
व्यवस्था बनाए जाने हमारे द्वारा चिकित्सकों की ड्यूटी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में लगाई गई है। इसमें लापरवाही कतई बर्दास्त नहीं की जाएगी। हम मामले को दिखवाते है।
आरसी पनिका, जिला स्वास्थ्य अधिकारी

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