पुलिस को मिली सफलताएं तो नक्सलियों ने दर्ज कराई उपस्थिति

बारिश के दिनों में नक्सलियों का मूवमेंट हो जाता है कम

By: Bhaneshwar sakure

Published: 21 Jul 2021, 10:00 PM IST

बालाघाट. बारिश में नक्सलियों की हलचल तो रहती है, लेकिन मूवमेंट काफी कम होता है। इस दौरान नक्सली कैम्प लगाकर दलम में शामिल सदस्यों को तैयार करते हैं। अपनी विचारधाराओं का विस्तार करने, ग्रामीणों में पैठ जमाने सहित अन्य क्रियाकलापों के लिए नक्सली गांव-गांव बैठकें भी करते हैं। हालांकि, जिले में पुलिस द्वारा लगातार नक्सलियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई कर रही है, जिसके चलते नक्सलियों की ग्रामीणों में पकड़ ढीली होते जा रही है। बीते एक साल में पुलिस को नक्सलियों के खिलाफ काफी सफलताएं मिली है। हाल ही में पुलिस ने नक्सलियों के अरबन नेटवर्क को ध्वस्त करते हुए उनके बैक सपोर्ट को तोडऩे का कार्य किया है। बावजूद इसके नक्सलियों की जिले में मौजूदगी बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार बारिश के मौसम में नक्सलियों द्वारा काफी कम मूवमेंट किया जाता है। इस दौरान नक्सली गांव-गांव बैठकें करते हैं। ग्रामीणों को अपनी विचारधाराओं से अवगत कराते हैं। नक्सलियों का यह कार्य वर्षा ऋतु के दौरान ज्यादा रहता है। खासतौर पर नक्सली बारिश के दिनों में उन क्षेत्रों को चिन्हित करते हैं, जहां घना जंगल हो और आवागमन के लिए समान सड़कें न हो। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मौजूदा समय में जिले के आदिवासी अंचल बिठली, सोनगुड्डा, डाबरी, पित्तकोना, चिलौरा, चौरिया, हर्राडीह, खमारडीह, चिलकोना, राशिमेटा, दड़कसा, कोद्दापार, कोरका, बोंदारी, अडोरी, नवी, जगला, देवरबेली सहित कान्हा नेशनल पार्क के गढ़ी क्षेत्र में नक्सलियों की सक्रियता बनी हुई है। जिले में मलाजखंड दलम, टांडा दलम, दर्रेकसा दलम सहित अन्य दलम के नक्सली सक्रिय हैं।
पुलिस को मिली चुकी हैं बड़ी सफलताएं
नक्सलियों का सफाया करने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलताएं मिल चुकी है। पिछले एक वर्ष में देखा जाए तो पुलिस ने मुठभेड में तीन नक्सलियों को मार गिराया। इसके अलावा लांजी थाना क्षेत्र से पुलिस ने १४ लाख रुपए का इनामी नक्सली श्यामलाल उर्फ मोतीराम सनकू जांगधुर्वे को गिरफ्तार किया। इसके पूर्व विस्तार दलम में सक्रिय सदस्य बादल उर्फ कोसा मरकाम को गिरफ्तार किया। वहीं नक्सलियों ने हाल ही में कान्हा नेशनल पार्क से विस्फोटक सामग्री जब्त की थी। वहीं नक्सलियों के अरबन नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया। इस तरह से पुलिस नक्सलियों की पकड़ को ढीली करते जा रही है। हालांकि, नक्सलियों ने भी जून २०२० में पुजारीटोला निवासी सोनू टेकाम और जून २०२१ में फिर एक और ग्रामीण भागचंद अडमें की हत्या कर अपने मंसूबों को स्पष्ट कर दिया था। वहीं ग्रामीणों में अपनी पैठ जमाने के लिए जून माह में दो अलग-अलग स्थानों पर तेंदुपत्ता फड को आग लगा दी थी। जनवरी माह में देवरबेली चौकी अंतर्गत सड़क निर्माण कार्य में लगे दो ट्रैक्टर व एक ट्रक को आग के हवाले कर अपनी मौजूदगी का एहसास कराया था।
कान्हा नेशनल पार्क बन रहा सेफ जोन
नक्सलियों के लिए कान्हा नेशनल पार्क सेफ जोन बनते जा रहा है। पूर्व में नक्सलियों के लिए दक्षिण बैहर और लांजी क्षेत्र का सघन वन बारिश के दिनों में सेफ जोन रहता था। लेकिन इन क्षेत्रों में लगातार सर्चिंग, ज्वाईंट ऑपरेशन, एरिया डॉमिनेशन की कार्रवाई से नक्सलियों के लिए यह क्षेत्र कम सुरक्षित बचा है। नक्सलियों की बढ़ती हलचल को देखते हुए कान्हा नेशनल पार्क के छग राज्य और जिले में सुरक्षा में तैनात जवानों द्वारा सर्चिंग की जा रही है। कान्हा नेशनल पार्क के रास्ते मप्र में नक्सलियों के बढ़ते कदम को रोकने के लिए पुलिस एक्शन के मूड में है। संरक्षित वन क्षेत्र होने के कारण नक्सली इसे सबसे सेफ जोन मानकर घुसपैठ करते हैं। इसी वजह से नक्सलियों की सक्रियता इस क्षेत्र में ज्यादा बढ़ गई है।
ग्रामीणों में पैठ जमाने की फिराक में नक्सली
जिले में वैसे तो नक्सलियों की पकड़ धीरे-धीरे कम होते जा रही है। लेकिन नक्सली ग्रामीणों में अपनी पैठ जमाने के लिए तरह-तरह के प्रयास कर रहे हैं। वर्ष २०१८ लगातार नक्सलियों की पकड़ कमजोर होते जा रही है। वर्ष २०१८ में पुलिस ने हार्डकोर नक्सली मुन्नालाल वरकड़े और संगम सदस्य इंदल पंद्रे को गिरफ्तार किया था। जिसके बाद से ग्रामीणों में नक्सलियों का खौफ कम हो गया था। इधर, पुलिस ने भी ग्रामीणों में नक्सलियों का खौफ कम करने के लिए सामुदायिक पुलिसिंग, जनता से संवाद को अपना हथियार बनाया है।
इनका कहना है
जिले में अलग-अलग दलम के नक्सलियों की सक्रियता बनी हुई है। पुलिस लगातार सर्चिंग कर रही है। जहां से भी नक्सलियों का इनपुट मिलता है, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है।
-अभिषेक तिवारी, एसपी, बालाघाट

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