देवी शक्ति की आराधना, उपासना का महापर्व 7 से

मंदिरों में ज्योति कलश होंगे प्रज्जवलित, सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति द्वारा स्थापित की जाएंगी मातारानी की प्रतिमा

By: Bhaneshwar sakure

Updated: 06 Oct 2021, 10:12 PM IST

बालाघाट. देवी की आराधना और उपासना का पर्व नवरात्र 7 अक्टूबर से प्रारंभ हो जाएगा। इधर, नवरात्र पर्व को लेकर मंदिरों में विशेष साज-सज्जा सहित अन्य तैयारियंा की जा रही है, जो अंतिम दौर पर है। इसी तरह सार्वजनिक स्थानों पर मातारानी की प्रतिमा स्थापना के लिए भी पंडाल तैयार कर लिए गए हैं। वहीं आकर्षक विद्युत साज-सज्जा भी की जा रही है।
अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 7 अक्टूबर गुरुवार से शारदीय नवरात्रि पर्व शुरू हो रहे हैं। इस साल दो तिथियां एक साथ पडऩे की वजह से नवरात्रि आठ दिन की है। दुर्गा मां का ये पवित्र पर्व 14 अक्टूबर को महानवमीं पर्व के साथ समाप्त हो जाएगा। ७ अक्टूबर को मंदिरों में जहां ज्योतिकलशों की विधि-विधान से पूजा अर्चना कर स्थापना की जाएगी। वहीं सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समितियों द्वारा माता रानी की प्रतिमा स्थापना की जाएगी। नवरात्र पर्व को लेकर बुधवार को बाजारों में काफी चहल-पहल देखी गई।
भक्ति, आस्था का केन्द्र है मां काली पाठ का मंदिर
नवरात्र पर्व के अवसर पर जिले के प्रसिद्ध धाम मां कालीपाट मंदिर में जगत जननी मां दुर्गा की उपासना का महापर्व पूरे आस्था व भक्ति भाव के साथ मनाया जाएगा। वैसे तो बालाघाट जिले में प्राचीन और आध्यात्मिक दृष्टि से कई महत्वपूर्ण मंदिर है, जहां पर भक्त श्रद्धानुसार प्रतिवर्ष पहुंचते हैं लेकिन सिविल लाइन स्थित मां कालीपाठ मंदिर आस्था और भक्ति का केंद्र है। कालीपाठ मंदिर में मां काली की प्रतिमा सोई हुई मुद्रा में विराजमान है, जो कि श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है। नवरात्रि के विशेष अवसर पर सिद्धपीठ मां कालीपाठ मंदिर में कलश स्थापना व अन्य आध्यात्मिक धार्मिक कार्यों में जिले वासियों की सहभागिता होती है। मंदिर के पुजारी पं. रामनारायण शुक्ला ने बताया कि इस वर्ष मंदिर में ८ सौ से अधिक ज्योति कलश प्रज्जवलित किए जाएंगे। वहीं पूरे नौ दिनों तक मंदिर में विविध धार्मिक कार्यक्रम होते रहेंगे। इस वर्ष भी काली पाठ मंदिर में शासन के निर्देशानुसार कोरोना गाइड लाइन का पालन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मंदिर में स्थापित मां काली की प्रतिमा निरंतर बढ़ते जा रही है। इस कारण मंदिर के प्रति लोगों की आस्था बहुत अधिक है। मान्यता है कि यहां जो भी मुरादे मांगी जाती है, वह अवश्य पूरी होती है।

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