भारत सरकार ने बलिया के पीपीई किट को दी मंज़ूरी, आधे दाम में तैयार हुई वर्ल्ड क्लास किट

कोरोना से जंग में बलिया का कमाल, बनायी अंतरराष्ट्रीय मानक वाली किफायती पीपीई किट। आॅर्डिड़िनेंस फैक्ट्री लेबोरेटरी कानपुर ने बताया वर्ल्ड क्लास, मिला यूनिक सर्टिफिकेट कोड।

बलिया. कोरोना महामारी से जंग में बलिया ने बड़ा कमाल किया है। कोरोना वारियर्स को संक्रमण से बचाने के लिए एक ऐसी पीपीई किट तैयार की है जो भारत सरकार की ओर से तय किये गए सारे मानकों पर खरी उतरी है। जिसकी क्वालिटी को न सिर्फ सरकार के लैब से सराहना मिली है, बल्कि लैब की सभी टेस्टिंग में पास होने और मानक पर खरा उतरने के बाद इसे यूनीक सर्टिफिकेट कोड दिया गया है। बलिया कि बनी पीपीई किट को भारत सरकार की मंज़ूरी मिल जाने के बाद अब इसे अन्य ज़िलों और राज्यों के लिये भी उपलब्ध कराया जा सकेगा। भारत सरकार के तय किये गए वर्ल्ड क्लास मानकों पर खरा उतरने के चलते यह विदेशों में भी निर्यात किये जाने के काबिल बताया जा रहा है।

 

सबसे बड़ी बात ये कि इस सुरक्षा किट को बनाने में खर्च भी बेहद कम आया है। नो प्रॉफिट नो लॉस के फॉर्मूले पर तैयार की गई इस किट से अन्य ज़िलों के मुकाबले आधे दाम पर ही कोरोना वारियर्स को सुरक्षा प्रदान कर रही है। दूसरे ज़िलों में जो किट 1200 रुपये में पड़ रही है, वह बलिया में महज़ 600 रुपये में पड़ रही है।

 

कानपुर ऑर्डिनेंन्स फैक्ट्री की लेबोरेटरी में हुई जांच

कोरोना के नोडल अधिकारी और जॉइंट मजिस्ट्रेट विपिन जैन के मुताबिक पीपीई किट को पहले मेडिकल टीम द्वारा अप्रूव करने के बाद इसे स्वास्थ्य कर्मियों को इस्तेमाल करने के लिए दिया गया। इसके बाद हुई जांच में सभी स्वस्थ मिले। कपड़ा मंत्रालय और स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइड लाइन के अनुरूप अप्रूव कराने के लिए कानपुर स्थित आॅर्डिनेंन्स फैक्ट्री लेबोरेटरी में भेजा गया। बेसिक जांच में इसकी क्वालिटी सही मिलने के बाद इसे यूनिक सर्टिफिकेट कोड दिया गया है। इसकी जानकारी मेल के ज़रिये दी गयी। लेबोरेटरी के एजीएम ने भी इस पर खुशी ज़ाहिर की है।

 

कैसे आया पीपीई किट बनाने का ख़याल

जब जानलेवा कोरोना पूरे देश में फैलने लगा तो पीपीई किट की कमी हो गयी। विदेशों से आयात भी पर्याप्त नहीं था। जॉइंट मैजिस्ट्रेट विपिन जैन ने स्थानीय स्तर पर ही किट बनाने की योजना बनायी और उद्योग केन्द्र से संपर्क किया। खालसा बैग हॉउस इसे बनाने के लिए आगे आया। मंत्रालय की गाइड लाइन के अनुरूप इसे बनाने की कवायद शुरू हुई। सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा जाय इसके लिए सीएमओ और उपायुक्त उद्योग के साथ मिलकर मंथन हुआ। खालसा बैग के सुरेंद्र सिंह छाबड़ा ने इसके लिए कच्चे माल की व्यस्था की। इसके लिये एंटी बैक्टीरियल किट बेंगलुरू से मंगाया गया। किट की कमियों पर लगातार काम हुआ और आखिरकार यह बनकर तैयार हो गयी।

 

अधिकारी बोले ज़रूरत पड़ने पर कर सकते हैं सप्लाई

जॉइंट मैजिस्ट्रेट विपिन जैन ने बताया है कि लोकल लेवल पर पीपीई किट बनने से हमें ज़िले के लिए स्टॉक की कोई समस्या नहीं। अवश्यकता के अनुरूप सौ-दो सौ किट तैयार किया जा सकता है। सप्ताह भर के समय में ही हम हज़ार-दो हज़ार किट बनाकर दे सकते हैं।

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रफतउद्दीन फरीद
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