यहां लगता है भूतों का मेला, आत्माएं करती हैं इलाज

यहां लगता है भूतों का मेला, आत्माएं करती हैं इलाज
Ghost

300 साल पहले कैद हुई थी 2 मासूमों की आत्मा

बलिया. भूत-प्रेत जिसे सुनते ही लोगों के रूह कांप उठते हैं। कुछ इसे अंधविश्वास कहते हैं तो कोई ऐसा मानते हैं कि आत्मा है। यह सच है आत्मा है कोई बुरी तो कोई अच्छी। माना जाए तो कोई ठीक ढंग से प्रेत आत्माओं से रू-ब-रू नहीं हुआ है। लेकिन मान्यता है कि अकाल मृत्यु वाली आत्माएं भटकती हैं जो जीवित मानव शरीर में समा जाती हैं। यहीं से शुरू हो जाती है मनुष्य के जेहन में भूत की कहानी। यह न तो एक बीमारी है न ही इसका इलाज। लेकिन इन्सान का भौतिक विज्ञान जहां जाकर चुप हो जाता है  वहीं से रूहानी दुनिया शुरू हो जाती है। जब  लोग अपने दुखों से छुटकारा पाने के लिए अदृस्य शक्तियों की शरण में जाते हैं। यूपी के बलिया जिले के मनियर कस्बे में नवका ब्रम्हबाबा का स्थान भी ऐसा ही है। जहां भूतों का मेला लगता है। यहां देश के सभी प्रान्तों के लोग अपने कष्टों और मनोकामनाओं को लेकर प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में आते हैं। यह सच्चाई भी है कि प्रतिवर्ष यहां आने वाले हजारों लोग ऐसे हैं जिन्हें बड़े-बड़े अस्पतालों के डाक्टरों ने ला इलाज घोषित कर दिया था लेकिन वह यहां से भले-चंगे होकर खुशी की जिन्दगी जी रहे हैं।

 

ऐसे भागते हैं भूत

ऐसी हजारों महिलाएं यहां मिली जिन्होंने बताया कि मुझे संतान ब्रम्हबाबा की कृपा से हुई है। वहीं इस स्थान पर एक दूसरा पक्ष जिसे मानवीय पहलू से अच्छा नहीं कहा जा सकता है। यहां पर ढेर सारे ओझा-गुनिया भी अपने मरीजों को लेकर आते हैं और भूत-प्रेत उतारने के नाम पर महिलाओं,युवतियों और वृद्वों तक को पानी में डुबा-डुबाकर पीटना, बाल पकड़कर नोचना और कई तरह से प्रताडि़त करते हैं।

 

 

इस स्थान की सबसे बड़ी बात यह भी है कि यहां सीधे रोगी व श्रद्धालू तो आते ही हैं। वहां ओझा-सोखा, गुनि या, तान्त्रिक-मान्त्रिक भी अपने उन प्रेत- पिचाशों को लेकर यहां आते हैं जिनपर ओझा-सोखा काबू नहीं पाते हैं। ये लोग अपने साथ लाए बदमाश प्रेत शैतानों को आत्माओं के दरबार में लाकर बेडिय़ां डलवाकर और मार-पीटकर भगाते हैं।

 


300 साल पहले कैद हुई थी 2 मासूमों की आत्मा

 

इस स्थान की कहानी भी रोचक है। वास्तव में जो इलाज करती हैं वे आत्माएं उन 2 गरीब अनाथ बच्चों की हैं जिन्हें आज से 300 साल पहले एक तान्त्रिक महिला ने मारकर उनकी आत्माओं को कैदकर लिया था। लेकिन नियति का चक्र देखिए इन अनाथ बेसहारा बच्चों कि आत्माएं इतने वषों के बाद भी माओं की खाली गोद भरती रही हैं और लोगों की बीमारियां दूर कर रही हैं। यह ब्रम्ह आत्माओं का अनोखा मन्दिर है।

 


भूत- प्रेत को लेकर लोगों का अंधविश्वास आज भी कायम है। एक तरफ चिकित्सा विज्ञान जहां दिन व दिन तरक्की कर रहा है, वहीं लोग अंधविश्वास के चक्कर में आकर भूत- प्रेतों से अपना इलाज करा रहे हैं। बलिया में लगने वाले भूत- प्रेत के मेले में महिलाओं और युवाओं का इलाज आत्माएं करती है। जिले के मनियर कस्बे में नवका ब्रह्म बाबा का स्थान भी एक ऐसा स्थान है, जहां देश के सभी प्रान्तों के लोग अपने कष्टों और मनोकामनाओं को लेकर प्रतिवर्ष लाखों की संख्या में आते है और स्वस्थ होकर हंसी खुशी की जिंदगी जी रहे हैं। यहां इलाज का तरीका भी काफी अनोखा और भयावह है। ओझा- गुनी भूत- प्रेत उतारने के नाम पर महिलाओं और युवाओं को पानी में डूबाते हैं। महिलाओं का बाल खींचकर और उन्हें तरह- तरह से प्रताड़ित कर इलाज किया जाता है।

 

 

 

ब्रह्म आत्माओं के अनोखे मन्दिर में इलाज के लिए आने वाले कई लोग इलाज के बाद हंसी खुशी लौटते हैं। इस स्थान की कहानी भी रोचक है, माना जाता है कि इस स्थान पर दो गरीब अनाथ बच्चों की आत्माएं हैं, जिन्हें आज से 300 साल तांत्रिक महिला ने मारकर अपने वश में कर लिया था। यही आत्माएं अब लोगों का कल्याण कर रही हैं।

 

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