इस जिले के बच्चे अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते, डेढ़ साल में 169 बच्चों की मौत

इस जिले के बच्चे अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते, डेढ़ साल में 169 बच्चों की मौत

Chandra Kishor Deshmukh | Updated: 18 Aug 2019, 08:08:08 AM (IST) Balod, Balod, Chhattisgarh, India

बालोद जिले में जन्म लेने वाले लगभग सैकड़ों बच्चे अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते। इसका खुलासा जिला स्वास्थ्य विभाग के ताज़ा आंकड़ों से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक बीते डेढ़ साल में 0 से 12 माह के कुल 169 बच्चों की मौत हुई है।

बालोद @ patrika. जिले में जन्म लेने वाले लगभग सैकड़ों बच्चे अपना पहला जन्मदिन भी नहीं मना पाते। इसका खुलासा जिला स्वास्थ्य विभाग के ताज़ा आंकड़ों से हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक बीते डेढ़ साल में 0 से 12 माह के कुल 169 बच्चों की मौत हुई है।

जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर
खास बात यह है की यह बच्चे जन्म के पहले वर्ष में ही दम तोड़ दिए। यह बच्चे अपना पहला जन्म दिन भी नहीं मना पाए। हालांकि जिला स्वास्थ्य विभाग की मानें तो जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर है। बच्चों की मौत के कारण में सिर्फ स्वास्थ्य विभाग को दोषी नहीं ठहरा सकते बल्कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवतियों की लापरवाही भी शामिल हैं। गर्भावस्था के दौरान इनकी एक लापरवाही बड़ी परेशनी बन जाती है।

डेढ़ साल में गुरुर में सबसे ज्यादा बच्चों की मौत
स्वास्थ्य विभाग की चौकाने वाले आंकड़े के मुताबिक जिले से सबसे ज्यादा शून्य से 12 माह के बच्चों की मौत गुरुर ब्लॉक में हुई है गुरुर ब्लॉक में बीते डेढ़ साल के भीतर ही 44 बच्चों की मौत हुई हैं। इसके बाद डौंडीलोहारा ब्लॉक में 43 व गुंडरदेही ब्लॉक में कुल 42 बच्चों की मौतें हो चुकी है। सबसे बेहतर स्थिति डौंडी ब्लॉक की है जहां डेढ़ साल में मात्र 10 बच्चों की मौत हुई है। बालोद में 32 बच्चों की मौत हो चुकी है। सबसे चिंताजनक स्थिति गुरुर ब्लॉक की है।

कम वजन के बच्चे ले रहे जन्म
शिशु रोग विशेषज्ञ बालोद की मानें तो जिले में कम वजन के बच्चे जन्म लेने की सं?या बढ़ रही है जो चिंता का कारण है। गर्भवस्था के समय चेकअप कराएं ताकि जच्चा बच्चा स्वस्थ्य रहे। जानकारी के मुताबिक जिले में सबसे ज्यादा डेढ़ से 2 किलो के बच्चे जन्म ले रहे हंै।

नवजात बच्चों की मौत की यह वजह
लो बर्थ रेट 2-5 किलो ग्राम से कम के बच्चों का जन्म होना।
जन्म के समय सांस लेने में तकलीफ ।
संक्रमण निमोनिया, पीलिया, मलेरिया हो जाना।
हाइपोथर्मिया जन्म के समय नवजात को उचित तापमान न मिलना।

एक नजर में आंकड़े
ब्लॉक - 2017-18, 2018 -19
बालोद - 29 - 3
गुरुर - 43 - 1
गुंडरदेही - 38 - 3
डौंडीलोहारा - 35 - 7
डौंडी- 9 - 1
कुल - 154 - 15

गर्भावस्था के दौरान रखें यह सावधानी
एसपी केसरवानी सीएस व शिशु रोग चिकित्सक ने बताया कि एएनसी परेड की अवस्था में गर्भवती की देखभाल बहुत ही जरुरी है।गर्भवस्था के दो माह में रजिस्ट्रेशन कराकर टीका लगाए, महीने में चेकप कराते रहे, खानपान पर ध्यान दें, पोषण आहार ले ताकि जन्म लेने वाले बच्चे व मां भी स्वस्थ रहे। गर्भवती की ठीक से देखभाल नहीं होने के कारण ही बच्चे का वजन कम होता है और आगे परेशानी होती है। प्रसव हमेशा अस्पताल में कराए शासकीय अस्पताल में बेहतर प्रसव सुविधाएं है।

जन्म के 28 दिन तक बच्चा नवजात रहता
जिला अस्पताल बालोद के शिशु रोग विशेषज्ञ आरके श्रीमाली ने बताया जन्म के 28 दिन तक बच्चा नवजात रहता है। प्रसव के पहले और बाद में मां और बच्चे की लगातार देखभाल होनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान 4 एएनसी जांच समय पर कराए जिसमें सोनोग्राफी, ब्लड व शारीरिक जांच शामिल हैं। गर्भधारण के तीन माह के बाद आयरन कैल्सियम का सेवन करें, समय में स्वास्थ्य जांच से बच्चा व मां स्वस्थ्य रहेगा। सभी जांच तो कराते है पर स्तन की जांच नहीं कराते स्तन की भी जांच जरुरी है। कई बार बच्चे के दूध न पीने की शिकायत भी आती हैं।

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