पांच साल में 18 बाल विवाह का प्रयास, मुखबिर की सूचना पर रोकी गई शादियां, परिवार को दी समझाइश

अक्षय तृतीया पर अक्सर बाल विवाह करने की जानकारी मिलती है। लेकिन जिले में शिक्षित लोग भी जागरूक नहीं हो रहे हैं। बाल विवाह करना अपराध है, यह जानते हुए भी बाल विवाह करते नजर आ रहे हैं।

By: Chandra Kishor Deshmukh

Updated: 21 Feb 2021, 07:05 PM IST

बालोद. अक्षय तृतीया पर अक्सर बाल विवाह करने की जानकारी मिलती है। लेकिन जिले में शिक्षित लोग भी जागरूक नहीं हो रहे हैं। बाल विवाह करना अपराध है, यह जानते हुए भी बाल विवाह करते नजर आ रहे हैं। जिले में इस साल एक माह के भीतर दो बाल विवाह के प्रयास किए गए, जिसे रोकने में सफल हुए।

समय पर कार्रवाई नहीं करते तो बाल विवाह हो जाता
महिला एवं बाल विकास विभाग के लगातार प्रचार-प्रसार के बाद भी लोग जागरूक नहीं हो पा रहे हैं। पांच साल में जिले में 18 बाल विवाह रोकने के प्रकरण सामने आए हैं। इन पर समय पर कार्रवाई नहीं करते तो बाल विवाह हो जाता। बाल विवाह के बढ़ते मामले को देखते हुए राज्य सरकार ने इस बार जिला महिला बाल विकास विभाग को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जहां-जहां बाल विवाह कराने की बातें आई हैं, वहां जाकर और जांच-पड़ताल करें। लोगों को समय से पहले ऐसा नहीं करने के निर्देश दिए हैं। वही जिले में लगातार मिल रहे बाल विवाह के प्रकरण के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग और बाल संरक्षण विभाग गांव-गांव में जाकर लोगों को जागरूक करने का अभियान चला रहा है।

बाल विवाह कराने वाले पंडित भी जेल जाएंगे
माना जाता है इसी समय ज्यादा बाल विवाह होने की स्थिति बनती है। हालांकि ऐसी शादियों रोकने लाखों रुपए हर साल खर्च करते हैं, फिर भी लोग जागरूक नहीं हो रहे हैं। आज भी लोग पुरानी सोच में जी रहे हैं। ऐसे में शासन सख्त हुआ है, इसलिए आदेश जारी किया गया है कि बाल विवाह कराने में सहयोग करने वाले पंडित भी जेल भेजे जाएंगे।

शिक्षित जिले में अनपढ़ जैसी हरकत
शिक्षा में जिला अग्रणी है। यहां के कई क्षेत्र के लोग आज भी शिक्षित होकर अशिक्षित जैसी हरकत करते हैं। शिक्षा के क्षेत्र में प्रदेश में अव्वल रहने वाले जिले में अभी भी लोग अपने कलेजे के टुकड़े की शादी कम उम्र में ही कराने को तत्पर रहते हैं। पुलिस व महिला बाल विकास विभाग ने 5 साल में 18 नाबालिगों की शादी रुकवाई है। अकेले गुरुर ब्लॉक में ही सबसे ज्यादा बाल विवाह रोके गए हैं।

अब ये करेगा महिला बाल विकास विभाग
बाल विवाह रोकथाम के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार, नारा लेखन, दीवाल लेखन, बाल विवाह रोकथाम, स्कूलों में निबंध, ग्राम पंचायतों में जागरूकता सभा, गांवों में बाल विवाह रोकथाम की जानकारी देंगे। जिसकी तैयारी पूरी कर आभियान शुरू कर दिया गया है।

महिलाओं की साक्षरता का स्तर सम्मानजनक
महिला एवं बाल विकास विभाग ने प्रचार-प्रसार के बावजूद नाबालिगों की शादी कराने का शिलसिला रुक नहीं रहा है। कई नाबालिगों की शादी छुप कर हो जाती है, जिसकी जानकारी विभाग को ही पता नहीं चल पाती। इधर विभाग गांवों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व बाल मित्र टीम गठित कर बाल विवाह रोकने का प्रयास कर रहा है। प्रदेश में अभी भी जिले में साक्षरता का स्तर भी सम्मानजनक है।

डौंडीलोहारा में रोका गया बाल विवाह
इस साल 2 बाल विवाह रोके गए हैं। रोके बाल विवाह बालोद व डौंडीलोहारा क्षेत्र के हैं। इस स्थिति से महिला बाल विकास विभाग भी चिंतित हैं। अचानक इतने बाल विवाह के आंकड़े आ रहे हैं। हालांकि विभाग नाबालिगों की शादी रोकने में सफल हुआ है। जिस तरह पालक कम उम्र में ही बच्चों की शादी करने पर उतारू हैं, उससे विभाग भी चिंतित है। अब इन सुदूर क्षेत्रों में व्यापक प्रसार-प्रसार करने की योजना बन रही है।

दुल्हन निकली नाबालिग
18 फरवरी को बालोद ब्लाक के एक गांव में एक लड़की की शादी थी। दूल्हा बारात के साथ आने वाला था। सेहरा सज गया था। बाराती गाड़ी भी सज कर तैयार थी। दूल्हा हाथों में मेंहदी, शेरवानी पहनकर बारात निकालने को तैयार था, वहीं दुल्हन भी होने वाले पति के नाम की मेहंदी रचा कर बारात का इंतजार कर रही थी। लेकिन बारात की जगह अचानक महिला बाल विकास की टीम पहुंच गई। पता चला कि दुल्हन नाबालिग है तो शादी रुकवा दी गई। अब यह शादी दुल्हन के बालिग होने के बाद होगी।

गांव-गांव में जागरूकता अभियान भी शुरू कर दिया है
जिला महिला बाल विकास अधिकारी एचके राठौर ने बताया बाल विवाह के लगातार प्रकरण आना चिंता का कारण है। हमारी टीम दो बाल विवाह रोकने में सफल हुई। अभी भी लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। लोगों को जागरूक करने गांव-गांव में अभियान भी शुरू कर दिया है।

Chandra Kishor Deshmukh Bureau Incharge
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