मुसीबत में किसान: रबी फसल के लिए तांदुला जलाशय ने नहीं मिलेगा पानी, अधिकारियों ने मंत्री को लिखा पत्र

जिला सिंचाई विभाग ने कृषि व जलसंसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे को भी पत्र लिखकर व मौखिक रूप से भी तांदुला जलाशय से रबी फसल के लिए पानी देने से साफ मना कर दिया।

By: Dakshi Sahu

Updated: 24 Oct 2020, 02:52 PM IST

बालोद. खरीफ की फसल की कटाई शुरू हो चुकी है। किसान अब रबी फसल के लिए पानी मिलेगा या नहीं, इसके लिए गांव-गांव में सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इस बार तांदुला जलाशय से जुड़े किसानों को जलाशय से पानी नहीं मिलेगा। सिंचाई विभाग भले ही गोंदली व खरखरा जलाशय से रबी की फसल के लिए पानी छोड़ देगा, लेकिन तांदुला से किसी भी स्थिति में पानी छोडऩे तैयार नहीं है। जिला सिंचाई विभाग ने कृषि व जलसंसाधन मंत्री रविन्द्र चौबे को भी पत्र लिखकर व मौखिक रूप से भी तांदुला जलाशय से रबी फसल के लिए पानी देने से साफ मना कर दिया। इस साल तांदुला जलाशय से लगभग 1500 किसानों के 25 हजार हेक्टेयर की फसल के लिए पानी नहीं छोड़ा जाएगा।

पुल के जीर्णोद्धार में लग सकते हैं चार माह
तांदुला जलाशय से पानी नहीं देने का प्रमुख कारण तांदुला नहर में ग्राम जामगांव (बी) के बीच 1912 में बनाए गए पुल का जीर्णोद्धार करना है। 109 साल पुराना यह पुल दिखने में खूबसूरत भी है, लेकिन धीरे-धीरे कमजोर हो रहा है। कई हिस्से में भी दरारें आ गई हैं, जिससे पानी का रिसाव होने लगा है। कमजोर होते इस पुल का जीर्णोद्धार दशहरा के बाद शुरू करने की योजना है। काम शुरू होने के बाद काम पूरा होने में ही तीन से चार माह का समय लग सकता है।

कई किसान नहीं लेंगे रबी की फसल
सिंचाई विभाग के मुताबिक तांदुला से बालोद सहित दुर्ग, बेमेतरा जिले तक सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जाता है। इस बार भी किसानों को उम्मीद थी कि तांदुला से पानी मिलेगा। पुल की मरम्मत होने के कारण इन तीन जिले के 25 हजार हेक्टेयर की कृषि भूमि में सिंचाई की सुविधा नहीं मिलने से किसान रबी की फसल नहीं लेंगे। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन हैं, वह रबी की फसल ले सकते हैं।

सिंचाई विभाग के ईई सतीश कुमार टीकम ने पत्रिका को बताया कि अभी लगातार किसान रबी फसल के लिए पानी मिलेगा या नहीं, इसकी जानकारी मांगते है। लेकिन नहर के बीचों बीच बना यह पुल जिसे अंग्रेजों ने बनाया है, वर्तमान में यह कमजोर होने लगा है। इसके लिए सालभर पहले ही शासन ने लगभग 2 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी है। टेंडर भी हो चुका है। जल्द ही मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा। इस पुल की समय रहते मरम्मत नहीं की गई तो यह पुल ढह भी सकता है। भिलाई स्टील प्लांट के लिए भी खतरे की घंटी है। प्राथमिकता से मरम्मत होगी।

पुल से रेलिंग और पत्थर भी उखड़ गए
दरअसल यह पुल अंग्रेजों के जमाने का है। काफी दिनों से उपेक्षित पुल की रैलिंग, पत्थर भी असामाजिक तत्व उखाड़ कर नुकसान पहुंचा रहे हैं। रैलिंग नहीं होने से आवाजाही करने वालों के लिए खतरनाक है। समय-समय पर ग्रामीण लगातार मम्मत की मांग भी कर रहे थे।

सावधानीपूर्वक होगी मरम्मत, कलाकृति से नहीं होगी छेडख़ानी
अंग्रेज जमाने के इस पुल पर कांट्रेक्टर जो पुल की मरम्मत करेंगे उसे सिंचाई विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिए है कि अंग्रेजों के पुल की कलाकृति पर किसी भी प्रकार की छेडख़ानी नहीं करें। सावधानी से ही पुल की मरम्मत करें।

खरखरा व गोंदली से छोड़ सकते हंैं पानी
सिंचाई विभाग के ईई सतीश कुमार टीकम ने बताया कि तांदुला में भी पर्याप्त पानी है, लेकिन इस बार पानी नहीं दिया जाएगा। लेकिन खरखरा व गोंदली जलाशय में भी पर्याप्त पानी है। यहां से रबी फसल में पानी दिया जा सकता है। हालांकि इस पर जिला जल उपभोक्ता समिति की बैठक में निर्णय होगा।

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Dakshi Sahu Desk/Reporting
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