नवजात शिशुओं को मृत्यु से बचाने के मामले में बालोद जिला छत्तीसगढ़ में दूसरे नंबर पर

बालोद जिले का सबसे बड़ा जिला अस्पताल पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं व गंभीर शिशु बचाने की स्थिति में राजधानी रायपुर को पीछे छोड़ दिया है। बीते साल दिसंबर के अंतिम दिनों में जारी सालाना रैकिंग में शिशु बचाने की स्थिति में जिला अस्पताल के एसएनसीयू पूरे प्रदेश में 89.1 अंक लेकर दूसरे स्थान पर है।

बालोद @ patrika . जिले का सबसे बड़ा जिला अस्पताल पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं व गंभीर शिशु बचाने की स्थिति में राजधानी रायपुर को पीछे छोड़ दिया है। बीते साल दिसंबर के अंतिम दिनों में जारी सालाना रैकिंग में शिशु बचाने की स्थिति में जिला अस्पताल के एसएनसीयू पूरे प्रदेश में 89.1 अंक लेकर दूसरे स्थान पर है।

धमतरी पहले स्थान पर
प्रदेश में 91.2 अंक लेकर धमतरी जिला प्रथम स्थान पर है। जिले के एसएनसीयू में आधुनिक चिकित्सा विस्तार व स्वास्थ्य विभाग की चिकित्सको की टीम का 24 घंटे निगरानी व स्वास्थ्य सुविधाओं का नतीजा है कि अब यहां निजी अस्पतालों से ज्यादा की सुविधाएं व साफ -सफाई एसएनसीयू में दिया जा रहा है। यही वजह है कि अब जिलेवासियों का रुझान निजी अस्पतालों की तुलना शासकीय अस्पतालों में बढ़ रहा है। यही वजह है जिला अस्पताल के एसएनसीयू में एक माह में ही 80 महिलाओं का सुरक्षित प्रसव हुआ है।

10 रुपए की पर्ची से निजी अस्पतालों से बेहतर
जिला बनने के बाद जिला अस्पताल बनाया गया, लेकिन शुरुआती दौर में चिकित्सकों की कमी से बहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही थी। बीते कुछ वर्षों में जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार हुआ और नतीजा यह है कि वर्तमान में एसएनसीयू में मात्र 10 रुपए की पर्ची में निजी अस्पतालों से भी बेहतर सुविधाएं मिल रही है। जिस जिला अस्पताल को सरकारी समझकर इलाज कराने कतराते थे आज वही लोग बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को देखकर अब जिला अस्पताल पहुंच रहे हैं।

सामान्य व सिजेरियन प्रसव की भी सुविधा, हर साल 550 से ज्यादा प्रसव
दो साल पहले इस अस्पताल में जहां प्रति वर्ष मात्र 300 से 350 तक ही प्रसव होता था और सुविधाओं के अभाव में अन्य गर्भवती महिलाएं प्रसव अन्य अस्पतालों में कराते थे। एसएनसीयू में सामान्य प्रसव, सिजेरियन प्रसव की सुविधाएं उपलब्ध होने के बाद से यहां प्रसव की संख्या बढ़ी है। वर्तमान में एसएनसीयू में साल भर में 539 प्रसव हुआ है। जिसमें 459 सामान्य व 80 सिजेरियन से प्रसव हुआ है।

जिन पालकों ने छोड़ी उम्मीद, ऐसे शिशु की बची जान
जिले के इस एसएनसीयू में जबसे आधुनिक इलाज शुरू हुआ है तब से अब तक कई ऐसे गंभीर नवजात शिशु का इलाज हुआ है जिनकी उम्मीद घरवालों ने छोड़ दी थी, लेकिन यहां इलाज के बाद उनकी जान बची हालांकि यहां कुछ मामले ऐसे भी सामने आए जहां नवजात बच्चे काफी गंभीर स्थिति में होने के कारण चिकित्सक बचाने का प्रयास किया लेकिन बचाने में सफल नहीं हो पाए।

नवजात शिशुओं को मृत्यु से बचाने के मामले में बालोद जिला छत्तीसगढ़ में दूसरे नंबर पर
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यहां है अविकसित शिशु को मां का गर्भ जैसा वातावरण देने वाली मशीन
कई बार समय पूरा नहीं (प्री मेच्योर) होने के बाद भी प्रसव हो जाता है जिससे जन्म लेने वाले नवजात शिशु अविकसित भी जन्म ले लेते है। ऐसे में मां के गर्भ जैसा वातवरण में अविकसित नवजात शिशु को भी आधुनिक मशीनों के जरिए ही शिशु को रिडेक्ट वार्मर मशीन में रखा जाता है। 24 घण्टे कड़ी निगरानी के बाद व चिकित्सकों की देखरेख में बच्चो को सामान्य स्थिति में लाने का प्रयास किया जाता है। लगभग बच्चों को सामान्य स्थिति में भी लाया गया है।

संक्रमित महिलाओं के लिए अलग प्रसव कक्ष
कई गर्भवती महिलाएं एचआईवी पीडि़त व संक्रमित भी होती हैं। ऐसे में इन महिलाओं के लिए अलग से सेप्टिक प्रसव कक्ष भी बनाया गया है। जहां ऐसी महिलाओं का प्रसव कराया जाता है।

जाने कौन से जिले को कितना रैंक मिला
धमतरी - 91.2, बालोद - 89.1, सुकमा - 85.7, रायपुर - 52, बलरामपुर - 83.2, कवर्धा - 81.7 , कांकेर - 81.7, जशपुर - 80.7, कोंडागांव - 79.7, दुर्ग - 79.2, बैकुंठपुर - 78.6, रायगढ़ - 77.4, जगदलपुर - 73.4, सहित अन्य जिलों का भी रैंक जारी किया गया है।

स्वास्थ्य सुविधाओं का और होगा विस्तार
जिला अस्पताल बालोद के सिविल सर्जन डॉ. आरके माली ने बताया कि जिला अस्पताल व एसएनसीयू में आधुनिक चिकित्सा का विस्तार किया जा रहा है। गर्व की बात है शिशु बचाने की स्थिति में हम पूरे प्रदेश में दूसरे स्थान पर है। अभी और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा।

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Chandra Kishor Deshmukh Bureau Incharge
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