ऑक्सीजन सहेजने पूरा परिवार जुटा है हजारों सीड बॉल बनाने, क्योंकि ये जानते हैं जीवन के लिए पेड़ कितना है जरूरी...

Tree plantation in Balod: ऑक्सीजन संकट को देखते हुए बालोद जिले के पर्यावरण प्रेमी भोज साहू और उनका परिवार अभी से आने वाली पीढिय़ों के लिए सांसें संजोने में जुट गया है।

By: Dakshi Sahu

Updated: 17 May 2021, 12:33 PM IST

बालोद. कोरोना महामारी (Coronavirus in Chhattisgarh) में इस वक्त अगर पूरे देश को किसी चीज की सबसे ज्यादा जरूरत है, तो वो है प्राणवायु ऑक्सीजन। ऑक्सीजन (Oxygen) संकट को देखते हुए बालोद जिले के पर्यावरण प्रेमी भोज साहू और उनका परिवार अभी से आने वाली पीढिय़ों के लिए सांसें संजोने में जुट गया है। वे बरसात आने से पहले हजारों सीड बॉल (Seed ball) तैयार कर रहे हैं ताकि ये बीज बरसात में नन्हें पौधों का आकार लेकर बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन का स्त्रोत बने। पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम करते हुए पूरा परिवार सीड बॉल बनाने में जुटा है। भोज ने बताया कि इस साल एक हजार सीड बॉल तैयार कर उसे खाली स्थानों में रखेंगे जो बारिश के पानी में भीगने के साथ पौधा बनेगा और आगे चलकर पेड़ बनेगा।

हर व्यक्ति को अपने स्तर पर पहल करने की जरूरत
भोज साहू ने बताया कि वह व उनका परिवार एक माह से तैयारी कर रहे हैं, जो लगभग पूरा हो गया है। उन्होंने अनार, करंज, अर्जुन आदि के बीज इक_े किए हैं। उसे मिट्टी से बॉल आकार बनाकर रख दिया है। उन्होंने बताया कि मानसून में वक्त है। अभी बिटबाल बनाने की तैयारी भी लगभग पूरी कर ली है। वर्तमान में लगातार पेड़ों की कटाई हो रही है, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो रही है। हर व्यक्ति अपने अनुसार इस तरह की पहल करे तो पर्यावरण सुधर जाएगा।

ऑक्सीजन सहेजने पूरा परिवार जुटा है हजारों सीड बॉल बनाने, क्योंकि ये जानते हैं जीवन के लिए पेड़ कितना है जरूरी...

जानिए कैसे तैयार होता है सीड बॉल
सीड बॉल तैयार करने सबसे पहले बीज इक_ा करना होगा। उपजाऊ मिट्टी के साथ गोबर या कम्पोस्ट खाद की बराबार मात्रा में मिश्रण तैयार कर गीला किया जाता है। उसे लड्डू के रूप में बनाकर बीचोबीच बीज डालकर बंद कर दिया जाता है। ऐसे जगह रखकर सुखाया जाता है जहां सूरज की किरण न पहुंच सके। ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि धूप की किरण नहीं पडऩे से गीली मिट्टी के बीच में रहने के बाद भी बीज अंकुरित नहीं होता है। सीड बॉल को पूर्ण रूप से सूख जाने पर अपने हिसाब से खाली पड़े स्थानों पर बारिश के मौसम में छोड़ दिया जाता है। मिट्टी जैसे ही गीली होती है बीज अंकुरित हो जाएगा और नए पौधे तैयार हो जाएंगे।

Dakshi Sahu
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